अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी सहयोगी देशों बहरीन और कुवैत पर ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी है. इसके बाद मध्य पूर्व फिर से क्षेत्रीय युद्ध की कगार पर पहुंच गया है. शनिवार को हुआ यह हमला अमेरिका की ओर से शुक्रवार देर रात ईरानी ठिकानों पर की गई एयरस्ट्राइक के जवाब में किया गया. इस भीषण हमले के बाद खाड़ी देशों में दहशत का माहौल है.
यह हमला ऐसे वक्त पर हुआ है जब पिछले कई हफ्तों से पर्दे के पीछे से चल रही बातचीत और कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह से बेपटरी हो चुके हैं. दोनों देशों के बीच जारी इस युद्ध ने दुनिया को अनिश्चतता की ओर धकेल दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के चार खतरनाक अटैक ड्रोन्स को मार गिराया था और उसके तटीय रडार केंद्रों को तबाह कर दिया था. इसके बाद भड़के ईरान ने यह जवाबी कार्रवाई की.
मिसाइल हमलों से दहले बहरीन और कुवैत
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए साफ कहा है कि उन्होंने इलाके में मौजूद दुश्मन के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. अमेरिकी सेना (CENTCOM) के अनुसार, ईरान ने बहरीन और कुवैत की तरफ कुल 7 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं. इनमें से 6 मिसाइलों को अमेरिकी और सहयोगी देशों के एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही मार गिराया, जबकि एक मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही गिर गई.
इस हमले के बाद बहरीन ने इसे आक्रमण बताया है. बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय है. वहीं कुवैत ने चेतावनी दी है कि यह हमला स्थिति को बेहद खतरनाक स्तर पर ले जाने वाला है. बहरीन की राजधानी मनामा और कुवैत में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास शनिवार तड़के हवाई हमले के सायरन गूंज उठे और स्थानीय लोगों ने कई बड़े धमाकों की आवाजें सुनीं.
इजरायल ने लेबनानी जनरल को मार गिराया
इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) का कहना है कि उसने दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सैनिकों को ले जा रही गाड़ी पर हमला करने की पुष्टि के बाद जांच शुरू कर दी है. लेबनानी आर्मी ने कहा कि शनिवार के भीषण हमले में एक ब्रिगेडियर-जनरल, एक कैप्टन और एक सैनिक मारे गए. IDF ने कहा कि गाड़ी संदिग्ध रूप से सेना की ओर बढ़ रही थी और इलाके में गोलीबारी की खबर मिली है. इजरायल का लेबनानी सरकार के साथ सीधा टकराव नहीं है. इजरायल लेबनान के ईरान समर्थिक हिज्बुल्लाह को अपना दुश्मन मानता है.
ठंडे बस्ते में गई शांति वार्ता
अमेरिका और इजरायल के बीच करीब 100 दिन पहले शुरू किए गए हमलों के बाद, बीते 8 अप्रैल को एक अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ था. लेकिन अब ये पूरी तरह ध्वस्त होता दिख रहा है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए वॉशिंगटन के रवैये को भड़काऊ बताया है. दूसरी तरफ, अमेरिका में आगामी मिड टर्म चुनावों से ठीक पहले बढ़े इस तनाव ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और वैश्विक बाजार भी इस संकट से डगमगा गया है.
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसेन रजाई ने अमेरिका के सामने शर्त रखी है. उन्होंने कहा है कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका को ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर तुरंत जारी करने होंगे. हालांकि, अमेरिकी प्रशासन का रुख इसके बिल्कुल उलट है. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन इन रोके गए ईरानी पैसों का इस्तेमाल बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी सहयोगियों को हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए करने की योजना बना रहा है.
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