- डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में नाटो पर अमेरिका के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया और इसकी आलोचना की
- ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दशकों तक नाटो का अधिकांश वित्तीय भार उठाता रहा है
- उन्होंने कहा कि नाटो के हर सदस्य देश को अपनी सुरक्षा के लिए सक्षम होना चाहिए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने संबोधन के दौरान नाटो को भी जमकर सुनाया. नाटो पर भड़के ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने दशकों तक नाटो को फंड दया लेकिन उसने हमें बदले में ज्यादा नहीं दिया. उससे हमें बहुत कम मिला. जबकि उसकी सारी फंडिंग अमेरिका करता है. ट्रंप ने कहा कि नाटो के हर सहयोगी देश का यह दायित्व है कि वह अपने क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम हो. सच्चाई यह है कि अमेरिका के अलावा कोई भी राष्ट्र या राष्ट्रों का समूह ग्रीनलैंड को सुरक्षित करने की स्थिति में नहीं है. हम वो महाशक्ति हैं, जिसकी शक्ति का लोग अनुमान भी नहीं लगा सकते.
ये भी पढे़ं- ग्रीनलैंड को कोई बचा नहीं सकता... वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी चेतावनी | 10 बड़ी बातें
-
NDTV वर्ल्ड समिट 2026 में बोलीं बासिस्ट मोहिनी डे: 'खुशनसीब हूं कि भारत में पैदा हुई -
क्या AI को इंसान जैसा माना जाना चाहिए? सुनिए स्वामी सर्वप्रियानंद का जवाब -
'AI इंसानियत के लिए चौथा बड़ा झटका हो सकता है', NDTV से बोले AI को नैतिकता सिखाने वाले स्वामी सर्वप्रियानंद -
दीप प्रज्वलन से हुआ NDTV वर्ल्ड समिट 2026 का शानदार आगाज़ -
मोहिनी डे की धुनों ने जीता दिल, शानदार अंदाज में शुरू हुआ NDTV वर्ल्ड समिट -
मोहिनी डे के म्यूजिक से सजी NDTV वर्ल्ड समिट 2026 की शुरुआत -
NDTV World Summit 2026: PM मोदी से जयशंकर तक... NDTV के मंच पर आज दुनिया की नजर -
NDTV World Summit 2026 का आगाज... मोहिनी डे ने दी प्रस्तुति, एक मंच पर जमा हो रहे दुनिया के दिग्गज -
भारत की आर्थिक बढ़त से मानवता पर AI के खतरों तक, NDTV World Summit 2026 के दूसरे दिन किन मुद्दों पर होगी बात -
NDTV World Summit का हुआ आगाज... डिजिटल इकोनॉमी, एनर्जी, ग्लोबल ट्रेड समेत पहले दिन किन मुद्दों पर हो रही बात?
अमेरिका के साथ नाटो का व्यवहार अन्यायपूर्ण
ट्रंप ने कहा कि नाटो ने अमेरिका के साथ बहुत अन्यायपूर्ण व्यवहार किया है. कोई इस बात से इनकार नहीं कर सकता. ट्रंप ने कहा कि कई सालों से वह नाटो के आलोचक रहे हैं, फिर भी उन्होंने नाटो की मदद के लिए किसी से भी ज्यादा किया है. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी की सत्ता में आते ही उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो नाटो अस्तित्व में ही न होता. इसका बड़ा उदाहरण यूक्रेन के साथ युद्ध है. हम हजारों मील दूर हैं, एक विशाल महासागर हमें अलग करता है. यह एक ऐसा युद्ध था जो शुरू ही नहीं होना चाहिए था. गर 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में धांधली न हुई होती तो यह शुरू ही नहीं होता.
अमेरिका नाटो का पूरा खर्च उठाता था
ट्रंप ने कहा कि उनके आने से पहले, नाटो को जीडीपी का सिर्फ 2 प्रतिशत देना होता था. लेकिन फिर भी वह भुगतान नहीं कर रहा था. ज्यादातर देश कुछ भी भुगतान नहीं कर रहे थे. अमेरिका नाटो का लगभग 100 प्रतिशत खर्च उठा रहा था और उन्होंने इसे रुकवा दिया. उन्होंने कहा कि यह उचित नहीं है. लेकिन फिर, उससे भी अहम बात यह है कि उन्होंने नाटो को 5 प्रतिशत भुगतान करने के लिए राजी कर लिया और अब वह भुगतान कर रहा है.
ट्रंप ने नाटो को पहले भी जमकर सुनाया
ये पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने नाटो को जमकर सुनाया है. ग्रीनलैंड के मुद्दे पर वह नाटो की दलील मानने के बिल्कुल भी मूड में नहीं हैं. ट्रंप और नाटो के बीच अलग ही जंग छिड़ी हुई है. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा था, किसी शख्स या राष्ट्रपति ने नाटो के लिए उतना नहीं किया, जितना मैंने किया. अगर मैं नहीं आता तो आज नाटो नहीं होता. यह इतिहास के कूड़ेदान में चला जाता, यह बहुत ही दुखद, लेकिन सच है.
बता दें कि ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि अमेरिका की रक्षा जरूरतों की पूर्ति के लिए ग्रीनलैंड पर उसका कंट्रोल जरूरी है. हालांकि डेनमार्क, ग्रीनलैंड के अलावा फ्रांस भी विरोध में आ गया है. ट्रंप की इस जिद ने नाटो सहयोगियों में चिंता पैदा कर दी है. लंबे समय से सहयोगी देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं. इसने दशकों पुराने नाटो की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं