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चीन को घेरने के लिए ट्रंप को आई भारत की सुध? अमेरिका ने 'नई दिल्ली पर फोकस' वाली बड़ी बैठक बुलाई

USCC public hearing: अमेरिका का US-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग (USCC) फरवरी में इस साल की अपनी पहली सार्वजनिक सुनवाई बुलाने के लिए तैयार है. इसमें भारत पर खास तौर पर फोकस रखा जाएगा. 

चीन को घेरने के लिए ट्रंप को आई भारत की सुध? अमेरिका ने 'नई दिल्ली पर फोकस' वाली बड़ी बैठक बुलाई
अमेरिका को डर है कि कहीं वर्ल्ड ऑर्डर पूरी तरह न बदल जाए

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका एक साथ कई देशों को नाराज करता जा रहा है तो दूसरी तरफ चीन आर्थिक मदद के दम पर दुनिया भर में अपना दबदबा बढ़ा रहा है. अमेरिका को डर है कि कहीं वो वर्ल्ड ऑर्डर न बदल जाए जिसके शिखर पर होने का दावा वो करता है. ऐसे में चीन का मुकाबला करने की चाहत लिए अमेरिका ने भारत-केंद्रित एक बड़ी बैठक की योजना बनाई है. अमेरिका का US-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग (USCC) फरवरी में इस साल की अपनी पहली सार्वजनिक सुनवाई बुलाने के लिए तैयार है. इसमें भारत पर खास तौर पर फोकस रखा जाएगा. 

USCC अमेरिकी संसद का एक निकाय है जिसमें दोनों पार्टी (रिपब्लिकन, डेमोक्रेट) के मेंबर होते हैं. USCC ने कहा है कि बैठक (जो एक तरह की सुनवाई होती है) का विशेष ध्यान नई दिल्ली और बीजिंग के साथ वाशिंगटन के संबंधों और भारत-प्रशांत में शक्ति संतुलन पर होगा. कांग्रेस कमेटी ने 17 फरवरी को होने वाली इस बैठक के बारे में कहा कि इसमें चीन और अमेरिका, दोनों के साथ भारत के संबंधों से जुड़े भू-राजनीतिक और सैन्य मुद्दों की जांच की जाएगी. इसमें सीमा विवादों पर तनाव, हिंद महासागर में समुद्री पहुंच और भारत-प्रशांत शक्ति के रूप में भारत की भूमिका शामिल है.

यह बैठक भारत-चीन संबंधों के आर्थिक और टेक्नॉजी से जुड़े आयामों का भी पता लगाएगा. इसमें व्यापार और निवेश संबंध और AI, सेमीकंडक्टर और दवा आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण और उभरते टेक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बनाने के भारत के प्रयास जैसे मुद्दे शामिल हैं. भारत-चीन की गतिशीलता से परे, सुनवाई में भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने के अमेरिकी नीति प्रयासों और भविष्य में अमेरिकी आर्थिक और सुरक्षा हितों पर बीजिंग के साथ नई दिल्ली के संबंधों का क्या मतलब है, इसकी भी समीक्षा की जाएगी.

टाइमिंग है बहुत अहम

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी अर्थव्यवस्था को चीन के लिए धीरे-धीरे खोलने पर विचार कर रहा है. दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच संबंध 2020 के गलवान घाटी सीमा संघर्ष के बाद चार साल तक तनाव में रहे थे. लेकिन अब संबंध उच्च स्तरीय द्विपक्षीय यात्राओं की एक श्रृंखला के बाद बेहतर होने लगे हैं. बड़ा मोड़ अक्टूबर 2024 में आया, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. इसके बाद, पीएम मोदी ने पिछले चीन की यात्रा की, जो साल सात साल से अधिक समय में पहली ऐसी यात्रा थी.

तब से, बीजिंग और नई दिल्ली ने मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी रखे हैं. इससे पांच साल से रुकी हुई उड़ाने फिर से शुरू हो गई हैं. नई दिल्ली ने चीनी कंपनियों को भारतीय निवेश और सरकारी खरीद चैनलों में वापस लाने के लिए कदम उठाए हैं.

यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अप्रैल 2026 में चीन की राजकीय यात्रा करने की योजना से कुछ ही हफ्ते पहले भी होगी.

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