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ईरान हारा नहीं है... अमेरिकी पायलट के लिए चले 48 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन ने 4 चीजें साबित कर दीं

US Iran War: अमेरिकी सेना ने F-15E फाइटर जेट के साथ गिरे पायटल को रेस्क्यू कर लिया है लेकिन अमेरिका के लिए इसमें 4 मैसेज भी छिपे हैं. डोनाल्ड ट्रंप की महत्वकांक्षाओं को डेंट पड़ सकता है.

ईरान हारा नहीं है... अमेरिकी पायलट के लिए चले 48 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन ने 4 चीजें साबित कर दीं
US Iran War: अमेरिकी पायलट के लिए चला रेस्क्यू ऑपरेशन (AI फोटो)

ईरान की जमीन पर अमेरिका के F-15E फाइटर जेट के गिरने और फिर अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए 48 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना... इस पूरे कवायद ने मिडिल ईस्ट की इस जंग में तनाव बहुत बढ़ा दिया है. इस संघर्ष में हवाई हमले, सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है. हाल ही में एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान गिरने की घटना ने युद्ध की गंभीरता को फिर दिखाया है. अमेरिकी सेना ने विमान के साथ गिरे पायटल को रेस्क्यू कर लिया है लेकिन अमेरिका के लिए इसमें 4 मैसेज भी छिपे हैं.

मैसेज नंबर 1- ईरान हारा नहीं है

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गिरे हुए F-15E लड़ाकू विमान के दूसरे क्रू मेंबर (पायलट) के बचाए जाने को अपनी और अपनी सेना की बड़ी जीत के रूप में बता रहे हैं. लेकिन 48 घंटे चला यह नाटकीय घटनाक्रम याद दिलाता है कि अब तक न हारा हुआ ईरान जवाब देने और अमेरिका को नुकसान पहुंचाने में सक्षम है.

मैसेज नंबर 2- ग्राउंड ऑपरेशन खतरों से खाली नहीं होगा

यह बात व्हाइट हाउस के लिए भी एक चेतावनी होनी चाहिए. व्हाइट हाउस अभी भी सोच रहा है कि क्या ईरान में ज़मीनी सैन्य अभियान शुरू किया जाए, ताकि ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा किया जा सके. प्लानिंग यह भी बनाई जा रही है कि जमीन के बहुत नीचे रखे ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को निकाला जाए और अपने कब्जे में लिया जाए. हालांकि जिस तरह से केवल एक पायटल को बचाने में अमेरिकी सेना को खुद अपने दो एयरक्राफ्ट तबाह करने पड़े, यह बताता है कि ग्राउंड पर उतरना इतना भी आसान नहीं होगा. दरअसल पायलट को और उनको बचाने गए बचावकर्मियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने वाले दो विमान ईरान के अंदर फंस गए थे और उन्हें ईरानी हाथों में पड़ने से रोकने के लिए उन्हें खुद नष्ट करना पड़ा है.

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मैसेज नंबर 3- अमेरिका का एक भी विमान गिरना दुनिया याद रखती है 

अमेरिका और इजराइल के सामने ईरान कमजोर माना जा रहा है. इसलिए युद्ध शुरू होने के पांच हफ्ते बाद भी अमेरिका के किसी एक विमान का गिराया जाना तुरंत अमेरिका के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया, क्योंकि ऐसी घटना बहुत दुर्लभ होती है और लोगों को लंबे समय तक याद रहती है. याद रहे कि आखिरी बार किसी अमेरिकी युद्धक विमान को दुश्मन बलों ने 2003 में, इराक युद्ध के दौरान गिराया था. यहां ईरान नैरेटिव बना रहा है कि हमारी ताकत किसी से कम नहीं है.

मैसेज नंबर 4- अमेरिका-इजरायल की हवाई ताकत अटूट नहीं है 

अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि F-15E विमान को कैसे गिराया गया। लेकिन इसका गिराया जाना यह याद दिलाता है कि अमेरिका और इज़राइल की वायु सेनाओं को मिली हवाई बढ़त पूरी तरह से अटूट नहीं है, भले ही वे रोज ईरान पर लगभग 300 से 500 बार बमबारी कर रहे हों.

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