अमेरिकी सेना ईरान से जमीन पर उतकर लड़ाई करने की तैयारी में थी. सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली थी. लेकिन फिलहाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे रोक दिया है. अमेरिकी सेना की तरफ से इसकी प्लानिंग हो रही थी. अमेरिका सेना के टॉप जनरल ने फ्लोरिडा में अमेरिकी सेंट्रल कमांड हेडक्वार्टर का गुपचुप दौरा भी किया था. जिसका उद्देश्य ईरान में सैनिक भेजकर वहां एक सैन्य अभियान चलाने की थी.
बड़े ऑपरेशन के करीब था अमेरिका
सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी सेना एक बड़े ऑपरेशन बिल्कुल करीब थी. अमेरिका की सेना ने ईरान में जमीनी सैनिक भेजकर वहां से परमाणु हथियार बनाने वाली चीजों को जबरदस्ती जब्त करने की योजना बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए थे. यह जानकारी इतनी संवेदनशील थी कि अमेरिका में जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन 19 मई को टैम्पा में आयोजित नाटो के सीनियर अधिकारियों की मीटिंग छोड़कर फ्लोरिडा आ गए थे. जिससे यह पता चलता है कि अमेरिका इस ऑपरेशन के बिल्कुल नजदीक खड़ा था. हालांकि जॉइंट स्टाफ के प्रवक्ता ने किसी भी तरह की तैयारियों के बारे में टिप्पणी करने से इंकार कर दिया था. केन ने इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दी थी.
ट्रंप ने रोका ऑपरेशन
जैसे ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस कदम के बारे में जानकारी दी गई तो उन्होंने इसे रोक दिया था. क्योंकि ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि ईरान की तरफ से इसका कड़ा जवाब मिल सकता है. जिससे युद्ध और लंबा खिच सकता है. ऐसा होने से ग्लोबल इकॉनमी और ज्यादा मुश्किलों में घिर सकती है. यह भी जानकारी सामने आई है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की आशंका भी व्यक्त की थी. क्योंकि इस ऑपरेशन की तैयारी ऐसे वक्त में हो रही थी जब ट्रंप बार-बार कह रहे थे कि अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे. गुरुवार को ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका और ईरान जल्द ही किसी समझौते पर दस्तखत करेंगे.
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ईरान में सेना भेजने के संभावित मिलिट्री ऑपरेशन की योजनाओं पर फिलहाल ट्रंप ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है. ट्रंप ने सेना को फिलहाल ऐसा कोई भी ऑपरेशन नहीं करने के लिए कहा है. बताया जा रहा है कि अगर दोनों देशों के बीच में बातचीत नाकाम रहती है तो फिर से युद्ध शुरू हो सकता है. हालांकि ट्रंप यह कह चुके हैं कि अमेरिका ईरान में जाकर जबरदस्ती यूरेनियम पर कब्जा कर सकता है, लेकिन वे ऐसे किसी ऑपरेशन को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं हैं. सूत्रों का कहना है कि ट्रंप को इस बात की भी आशंका है कि अमेरिकी जनता इसका समर्थन करेगी या नहीं.
न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका की नजर
बताया जा रहा है कि जोखिम के बाद भी ईरान ने एनरिच्ड यूरेनियम प्रोग्राम को रद्द एनरिच किया है. ऐसे में अमेरिकी सेना ने भी इसे जब्त करने का मिशन पूरी तरह से रद्द नहीं किया है. ट्रंप की निराशा इस बात से भी बढ़ती जा रही है कि ईरान उस डील को मंजूरी देने में टालमटोल कर रहा है. जिसमें न्यूक्लियर प्रोग्राम में बड़ी रियायतें देना शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक ईरान ने अपना न्यूक्लियर का सामान अलग-अलग जगहों पर फैला रखा है. जिसमें मुख्य रूप से इस्फहान, नतांज़ और फोर्डो कॉम्प्लेक्स शामिल है, जहां इसे सुरंगों में बहुत गहराई में छिपाकर रखा गया है.
अमेरिका और इजराइल की ज्वाइंट एयर स्ट्राइक के बाद भी ईरान का सारा न्यूक्लियर मटीरियल नष्ट नहीं हुआ है. वह जमीनों में ही रह गया है. ऐसे में अमेरिकी सेना के डायरेक्टर-जनरल राफेल मारियानो ग्रॉसी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान चेतावनी दी है कि अगर ईरान अपने प्रोग्राम को हथियार बनाने के मकसद से इस्तेमाल करने का फैसला करता है, तो मौजूदा स्टॉक से वह 10 तक न्यूक्लियर बम बना सकता है.
ईरान कर सकता है पलटवार
अमेरिका को इस बात का सबसे ज्यादा खतरा है कि अगर यूरेनियम पर कब्जा करने के लिए जमीनी ऑपरेशन शुरू किया जाता है तो ईरान पलटवार कर सकता है. ऐसे में फिलहाल इस तरह के किसी ऑपरेशन पर काम नहीं किया जाएगा. लेकिन अगर दोनों देशों के बीच डील नहीं होती है तो फिर अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है.
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