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This Article is From Mar 20, 2026

अमेरिका की ईरान के खिलाफ बड़ी साइबर स्‍ट्राइक, साइबर हमले और प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप में 4 वेबसाइट सीज

अमेरिका ने ईरान की चार संदिग्ध वेबसाइट्स को सीज कर दिया है. आरोप है कि इन वेबसाइट का इस्‍तेमाल साइबर हमले, प्रोपेगेंडा फैलाने और विरोधियों को डराने के लिए किया जा रहा था. 

अमेरिका की ईरान के खिलाफ बड़ी साइबर स्‍ट्राइक, साइबर हमले और प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप में 4 वेबसाइट सीज
  • अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने ईरान की 4 संदिग्ध वेबसाइट को साइबर हमलों और प्रोपेगेंडा के आरोप में सीज किया.
  • अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि ये वेबसाइट्स ईरान के खुफिया एवं सुरक्षा मंत्रालय की ओर से चलाई जा रही थीं.
  • हैंडाला हैक नामक फर्जी हैक्टिविस्ट ग्रुप पर साइबर हमले करने और 190 लोगों की निजी जानकारी लीक करने का आरोप है.

अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने ईरान के खिलाफ एक बड़ी साइबर कार्रवाई की है. अमेरिका ने ईरान की चार संदिग्ध वेबसाइट्स को सीज कर दिया है. अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि ये वेबसाइट्स ईरान के खुफिया एवं सुरक्षा मंत्रालय की ओर से चलाई जा रही थीं. साथ ही इनका इस्तेमाल साइबर हमले, प्रोपेगेंडा फैलाने और विरोधियों को डराने के लिए किया जा रहा था. 

अमेरिका की ओर से जिन वेबसाइट्स पर कार्रवाई की गई है, उनमें Justicehomeland.org, Handala-hack.to, Karmabelow80.org और Handala-redwanted.to शामिल हैं. जांच में सामने आया कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए हैकिंग की जिम्मेदारी ली जाती थी, चोरी किया गया संवेदनशील डेटा पोस्ट किया जाता था और पत्रकारों, ईरानी विरोधियों और इजरायल से जुड़े लोगों के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया जाता था. 

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हैंडाला हैक के नाम से चल रहा था ऑपरेशन

जांच एजेंसियों के मुताबिक, हैंडाला हैक नाम का एक फर्जी हैक्टिविस्ट ग्रुप इन वेबसाइट्स के जरिए काम कर रहा था. इस ग्रुप ने मार्च 2026 में एक अमेरिकी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी पर बड़े साइबर हमले का दावा भी किया था. 

इसके अलावा, इन साइट्स पर करीब 190 लोगों की निजी जानकारी भी लीक की गई, जिनका संबंध इजरायल डिफेंस फोर्सेज या इजरायली सरकार से बताया गया. इन पोस्ट्स में साफ धमकी दी गई थी कि इन लोगों की लोकेशन तक ट्रैक की जा रही है और उन्हें अंजाम भुगतना होगा. 

यह मामला यहीं नहीं रुका. जांच में यह भी सामने आया कि ईमेल के जरिए लोगों को जान से मारने की धमकियां दी गईं और उनकी हत्या के लिए 2.5 लाख डॉलर तक का इनाम रखा गया. इतना ही नहीं, इसमें मेक्सिको के कुख्यात जेलिस्‍को न्‍यू जेनरेशन कार्टल का नाम लेकर हमले करवाने की बात भी कही गई. 

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विरोधियों को डराने की साजिश

अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा ऑपरेशन ईरानी सरकार के विरोधियों खासतौर पर विदेशों में रह रहे ईरानी समुदाय और पत्रकारों को डराने और चुप कराने के लिए चलाया जा रहा था. सोशल मीडिया और वेबसाइट्स के जरिए झूठी और अपमानजनक जानकारी फैलाकर लोगों की छवि खराब की जाती थी, जिससे वे खुलकर बोलने से डरें. 

अल्बानिया से भी जुड़े तार

जांच में यह भी पता चला कि Justicehomeland.org का इस्तेमाल 2022 में अल्बानिया सरकार के खिलाफ साइबर हमलों और डेटा लीक के लिए किया गया था. माना जा रहा है कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि अल्बानिया ने ईरान के विरोधी संगठन मुजाहिदीन-ए-खल्क का समर्थन किया था. 

इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्‍टेट ने रिवार्ड फोर जस्टिस प्रोग्राम के तहत 10 मिलियन डॉलर (करीब 80 करोड़ रुपये) तक का इनाम घोषित किया है. यह इनाम उन लोगों की जानकारी देने पर मिलेगा जो किसी विदेशी सरकार के इशारे पर अमेरिकी महत्वपूर्ण ढांचे पर साइबर हमले करते हैं. 

इस केस की जांच एफबीआई का बाल्टीमोर फील्ड ऑफिस कर रहा है, जिसमें उसकी साइबर डिवीजन भी शामिल है. वहीं, केस को आगे बढ़ाने का काम मैरीलैंड जिले के लिए अमेरिका का अटॉर्नी कार्यालय और नेशनल सिक्योरिटी डिवीजन की साइबर टीम कर रही है. 

यह मामला साफ दिखाता है कि अब साइबर वॉरफेयर सिर्फ डेटा चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल मनोवैज्ञानिक दबाव, डर और हिंसा फैलाने के लिए भी किया जा रहा है. अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि ऐसे साइबर नेटवर्क्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. 

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