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जंग में कराह रही विरासत, ईरान के कई ऐतिहासिक विश्व स्थल हुए तबाह, यूनेस्को को करनी पड़ी अपील

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों में तेहरान में कजार युग का आलीशान गुलिस्तान पैलेस, इस्फहान का 17वीं सदी का चेहेल सोतौन पैलेस और देश की सबसे पुरानी शुक्रवार मस्जिद, मस्जिद-ए-जामे समेत कई विश्व विरासतों को भारी नुकसान पहुंचा है.

जंग में कराह रही विरासत, ईरान के कई ऐतिहासिक विश्व स्थल हुए तबाह, यूनेस्को को करनी पड़ी अपील
  • ईरान में हमलों से गुलिस्तान पैलेस और मस्जिद-ए-जामे जैसे कई ऐतिहासिक स्थलों को गंभीर नुकसान पहुंचा है
  • 63 हजार ईसा पूर्व की प्रागैतिहासिक गुफाएं और रॉक शेल्टर्स सहित कई प्राचीन धरोहरें भी चपेट में आई हैं
  • हमलों से इजरायल की व्हाइट सिटी, लेबनान के टायर समेत कई अन्य जगहों पर विरासतों को नुकसान हुआ है
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जब जंग की आग भड़कती है तो सिर्फ इंसानी जान और इमारतें ही खाक नहीं होतीं, बल्कि उस देश की विरासत और पहचान भी झुलसने लगती है. ईरान को हालिया हमलों ने कुछ ऐसे ही ऐतिहासिक जख्म दिए हैं. हजारों सालों से समृद्ध इतिहास की गवाही दे रही कई विश्व विरासतें आज हथियारों की चोट से कराह रही हैं. 14वीं और 17वीं सदी के महल, ईरान की सबसे पुरानी मस्जिद, 63 हजार ईसा पूर्व के सबूत इस जंग की भेंट चढ़ गए हैं. हालात इतने भयावह हैं कि यूनेस्को को भी अपील करनी पड़ी है. 

महल से मस्जिद तक हमलों के शिकार

अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान की कम से कम 4 सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है. संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने कन्फर्म किया है कि तेहरान में कजार युग का आलीशान गुलिस्तान पैलेस, इस्फहान का 17वीं सदी का चेहेल सोतौन पैलेस और देश की सबसे पुरानी शुक्रवार मस्जिद, मस्जिद-ए-जामे को हमलों में भारी नुकसान पहुंचा है. 

ईरान की प्राचीन विरासत पर जख्म

इतना ही नहीं, खुर्रामाबाद घाटी के पास स्थित प्रागैतिहासिक गुफाओं, रॉक शेल्टर्स और अन्य ढांचों को भी नुकसान हुआ है, जहां 63 हजार ईसा पूर्व इंसानों के रहने के सबूत मिलते हैं. गुलिस्तान पैलेस की हालत तो बहुत खराब है. वहां के शानदार शीशे वाली छतों के कांच अब फर्श पर बिछ गए हैं, मेहराबें टूट चुकी हैं और सदियों पुरानी खिड़कियां धमाकों की गूंज से चकनाचूर हो चुकी हैं. 

सरकार ने दिखाई तबाही की झलक 

ईरान सरकार ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालकर बताया है कि अमेरिका-इजरायल के हमलों में तेहरान के गुलिस्तान पैलेस, इस्फहान के 17वीं सदी के चेहेल सोतौन पैलेस ही नहीं, सनंदाज के कई ऐतिहासिक स्थलों को भी नुकसान हुआ है. इनमें आसिफ हवेली, सालार सईद हवेली और खुसरो आबाद हवेली जैसी प्रतिष्ठित इमारतें शामिल हैं. हमलों में इनकी सदियों पुरानी नक्काशी, आईनाकारी के साथ ही कई दीवारें और खिड़कियां पूरी तरह नष्ट हो गई हैं. 

यूनेस्को से ईरान ने लगाई गुहार

अपनी प्राचीन विरासत पर हो रहे हमलों को देखते हुए ईरान और लेबनान को यूनेस्को से गुहार लगानी पड़ी है. उन्होंने ऐतिहासिक स्थलों को सुरक्षा की विशेष सूची में शामिल करने का अनुरोध किया है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक पोस्ट में इजरायल के हमलों में 14वीं सदी के ऐतिहासिक स्थल, यूनेस्को की कई विश्व विरासतों को क्षति पर चिंता जताई है. यूनेस्को ने कहा है कि उसने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को ऐतिहासिक धरोहरों की सटीक जगह पहले ही बता दी थी ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके.

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इजरायल-लेबनान में भी नुकसान

युद्ध में ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान सिर्फ ईरान में ही नहीं हो रहा है, बल्कि मिडिल ईस्ट और अन्य जगहों पर भी इसकी धमक गूंज रही है. इजरायल की व्हाइट सिटी, लेबनान के टायरे (Tyre)  और अन्य स्थलों पर हुए नुकसान का यूनेस्को जायजा ले रहा है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध में ही ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है. इससे पहले रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास की जंग में भी दर्जनों ऐतिहासिक महत्व की इमारतें या तो तबाह हो चुकी हैं या फिर गहरे जख्म झेल रही हैं. 

संघर्ष की कीमत चुका रही विरासत

यूएन के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने हाल ही में कहा था कि तेजी से बढ़ते आधुनिक संघर्षों में जो कुछ हो रहा है, उसकी कीमत आम नागरिक, बुनियादी ढांचे और अमूल्य ऐतिहासिक विरासत विनाश के रूप में चुका रहे हैं. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध ने न सिर्फ एक हजार से अधिक लोगों की जान ले ली है, बल्कि उन ऐतिहासिक स्थलों को भी तहस-नहस कर दिया है जो समाज की पहचान का आधार रहे हैं.

इतिहास के गौरवशाली सबूत खतरे में

यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट के तहत ईरान के करीब 30 स्थलों को स्पेशल प्रोटेक्टेड मॉन्यूमेंट्स घोषित कर रखा है. इनमें भी कई स्थलों को युद्ध में नुकसान हुआ है. यूनेस्को ने बयान में कहा है कि सांस्कृतिक स्थल अंतरराष्ट्रीय कानून खासकर 1954 के हेग कन्वेंशन और 1972 के कन्वेंशन के तहत प्रोटेक्टेड हैं. बहरहाल इतना साफ है कि अगर इन ऐतिहासिक विरासतों पर हमले होते रहे तो मानवता अपने इतिहास के कई गौरवशाली पन्नों को हमेशा के लिए खो देगी.

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