US Iran War: "बच्चे जंग शुरू नहीं करते, और वे उन्हें समाप्त भी नहीं कर सकते, लेकिन वे हमेशा सबसे अधिक कीमत चुकाते हैं".... यूनिसेफ प्रमुख कैथरीन रसेल की यह बात हर उस जंग पर फिट बैठती है जो दुनिया ने आज तक देखी हैं. यही कहानी गाजा के बच्चों की थी, आज यही कहानी ईरान के बच्चों की है. बच्चे जिस उम्र में दुनिया को समझने की कोशिश करते हैं, ईरान के बच्चे उस उम्र ने सिर्फ उस दुनिया को हर रोज जलते देख रहे हैं, बल्कि अपनी जान भी गंवा रहे हैं. ईरान में अबतक 3600 लोगों की मौत हो चुकी है और मरना वाला हर 15वां इंसान एक मासूम बच्चा है जो पूरी तरह बेगुनाह है.
ईरान में मौत के आंकड़े
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स एजेंसी (HRANA) ने कहा कि ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से अमेरिका-इजरायली हमलों में लगभग 3,600 लोग मारे गए हैं, जिनमें कम से कम 1,665 नागरिक शामिल हैं. अमेरिका स्थित इस एनजीओ ने कहा कि मारे गए लोगों में से कम से कम 248 बच्चे थे. यानी मरने वाला हर 15वां इंसान बच्चा था.
इसके अलावा लगभग 1,500 लोग लेबनान में मारे गए हैं जहां इजरायल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह मिलिशिया को निशाना बनाया है. जंग में अमेरिका के 13 सैनिक मारे गए हैं. इजरायल की एम्बुलेंस सेवा के अनुसार, ईरान और लेबनान से इज़राइल की ओर छोड़ी गई मिसाइलों ने इजरायल में 19 लोगों की जान ले ली है.
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