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ईरान से समझौते की सारी बातें आ गईं सामने, खुद को डील मास्टर कहने वाले ट्रंप की खुल गई पोल

जंग के मैदान में कौन जीता, इसका तो नहीं पता लेकिन ईरान ने अमेरिका को डील की टेबल पर जरूर मात दे दी, यहां पढ़िए इसके 5 सबूत

ईरान से समझौते की सारी बातें आ गईं सामने, खुद को डील मास्टर कहने वाले ट्रंप की खुल गई पोल
US Iran Deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को डील मास्टर बताते हैं (फोटो- AFP)
  • ईरान को डील में ऐसे आर्थिक फायदे मिल गए हैं जिनकी वह युद्ध से पहले उम्मीद भी नहीं कर रहा था
  • ईरान को ट्रंप ने अपने हाथों से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की छूट दे दी है
  • अमेरिका ईरान के खिलाफ सभी आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त कर देगा, ईरान अब जमकर तेल बेचेगा

अमेरिका और ईरान का युद्ध खत्म हुआ. दोनों के बीच डील हुई, डील पर मुहर भी लग गई. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि 110 दिनों की इस जंग में जीत किसकी हुई? जमीन पर मुकाबला चाहे कुछ भी रहा हो, ईरान को डील में ऐसे आर्थिक फायदे मिल गए हैं जिनकी वह युद्ध से पहले उम्मीद भी नहीं कर रहा था. होर्मुज पर टोल वसूलने का मौका मिल गया है, हर तरह के प्रतिबंध हटने वाले हैं, अरबों डॉलर की जब्त हुई संपत्तियों तक पहुंच और 300 बिलियन डॉलर के निवेश की संभावनाएं भी. उसे बदले में बस एक पुराना वादा फिर से दोहराना है. इन सबने यह बहस छेड़ दी है कि कहीं यह समझौता ईरान के लिए 'युद्ध के बाद का जैकपॉट' तो नहीं बन गया है. चलिए देखते हैं.

ईरान को क्या मिला?

1- होर्मुज से टोल वसूलने की छूट

ईरान को ट्रंप ने अपने हाथों से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की छूट दे दी है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने भी अमेरिका से डील साइन होने के बाद कह दिया है कि भले अमेरिका के साथ हुए समझौते (MoU) के अनुसार 60 दिन तक कोई टोल नहीं लिया जाएगा, लेकिन उसके बाद हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ईरान टोल वसूलेगा. 14 प्वाइंट के इस MoU में अमेरिका ने ईरान के लिए टोल वसूलने का रास्ता खोल दिया है. इसके 5वें प्वाइंट में लिखा है कि 60 दिन बाद ओमान के साथ मिलकर ईरान होर्मुज को मैनेज करने का नया नियम-कायदा बना सकता है. ईरान का स्टैंड साफ है- अब वह होर्मुज से टोल वसूलेगा, जबकि जंग से पहले ऐसा नहीं था.

2- प्रतिबंधों से छूट

इस डील के प्वाइंट नंबर 7 के अनुसार अमेरिका ईरान के खिलाफ सभी आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त कर देगा. इनमें UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में शामिल और अमेरिका द्वारा एकतरफा लागू किए गए प्रतिबंध भी शामिल हैं. ईरान पर लगे प्रतिबंध हटने से वहां की कंपनियां और बैंक दुनिया के बाकी देशों के साथ व्यापार खुलकर कर सकेंगे.

3- विदेशों में जब्त संपत्ति मिलेगी वापस

डील के 11वें प्वाइंट के अनुसार अमेरिका दुनिया भर के बैंकों में जब्त ईरान के 100 अरब डॉलर से ज्यादा के फंड (फ्रोजन एसेट) को मुक्त कर देगा. यह पूरी तरह साफ नहीं है कि यह कब और कितनी मात्रा में होगा, लेकिन समझौते में कहा गया है कि ईरान की फ्रीज की गई रकम और संपत्तियां उसके केंद्रीय बैंक के उपयोग के लिए "पूरी तरह उपलब्ध" कराई जाएंगी. ईरानी मीडिया और एनालिस्ट का अनुमान है कि ईरान की 124 अरब डॉलर से 167 अरब डॉलर तक की संपत्तियां विदेशों में जब्त हैं.

4- तेल बेचने की आजादी

सबसे अहम और तुरंत असर वाली बात यह है कि इस समझौते से ईरान की इकनॉमी का सबसे बड़ा सहारा फिर से चालू हो जाएगा- तेल बेचना. अब जब प्रतिबंध हटा दिए गए हैं, तो ईरान अपने तेल टैंकरों में जमा करोड़ों बैरल तेल को खुले तौर पर बेच सकता है. एक अनुमान के अनुसार ईरान रोज करीब 20 लाख बैरल तेल भी बेच सकेगा. यह युद्ध से पहले की बिक्री से लगभग एक-तिहाई ज्यादा है. सबसे खास बात है कि कोई प्रतिबंध नहीं है तो यह बिक्री कानूनी और खुलकर होगी, इसलिए ईरान को तेल सस्ते दामों पर बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ईरान सरकार की लगभग 50% कमाई तेल बेचकर होती है. यानी ईरानी सरकार की चांदी होने वाली है.

5- 300 बिलियन डॉलर का निवेश मिलेगा

MoU के छठे प्वाइंट में कहा गया है कि अमेरिका और उसके क्षेत्रीय पार्टनर ईरान को फिर से खड़ा करने और उसके आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना तैयार करेंगे. इस योजना का अंतिम खाका समझौते के 60 दिनों के भीतर तय किया जाएगा. इस निवेश योजना के लिए सभी जरूरी मंजूरियां, छूट और लाइसेंस अमेरिका खुद देगा. यहां ध्यान रहे कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ईरान को सीधे पैसा देगा. अमेरिका की तरफ से आलोचनाओं के बीच बार-बार साफ कहा गया कि अमेरिका को ईरान को एक पैसा भी देने की जरूरत नहीं होगी और न ही वह इस फंड में पैसा डालेगा. कहा गया कि अगर ईरान समझौते की शर्तों का पालन करता है, तो UAE जैसे पार्टनर देश की कंपनियां अमेरिका की मंजूरी से ईरान में निवेश करेंगी.

यह भी पढ़ें: ईरान होर्मुज में 60 दिन के बाद वसूलेगा टोल, ट्रंप की डील ने पावर पर लगा दी मुहर

बदले में ईरान को क्या करना होगा?

ईरान को बहुत ज्यादा नहीं करना है. उसे भी अमेरिका की तरह जंग को हर मोर्चे पर रोक देना है. एक दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना है. डील के अनुसार ईरान परमाणु हथियार न खरीदने या न बनाने पर सहमत हो गया है. यहां ध्यान रहे कि ईरान शुरू से ही कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक उद्देश्यों के लिए है, उसे हथियार नहीं बनाना. ईरान ने यही वादा फिर से दोहराया है.

कमाल की बात है कि ट्रंप अब खुद कह रहे हैं कि अगर दूसरे देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं तो ईरान के पास न होना गलत होगा. यह बात उन्होंने पेरिस में कही.

इसके अलावा दोनों पक्ष ईरान के पास पहले से मौजूद अत्यधिक शुद्ध यूरेनियम (enriched uranium) से निपटने पर भी सहमत हो गए हैं. ये यूरेनियम पिछले साल से अमेरिकी हमलों के बाद न्यूक्लियर ठिकानों के नीचे दबे पड़े हैं.  MoU के 8वें प्वाइंट में बताया गया कि लगभग बम बनाने लायक स्तर के यूरेनियम को कम संवर्धित (लोअर ग्रेड के) यूरेनियम में बदला जाएगा. इस प्रक्रिया को डाउन-ब्लेंडिंग (Down-blending) कहा जाता है. यह काम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगा और वहीं पर होगा जहां वे दबे पड़े हैं. यानी ईरान के अंदर ही. 

दोनों देश सहमत हुए हैं कि अगले 60 दिन में दोनों देश परमाणु वार्ता करेंगे और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर एक बड़ी डील करेंगे.

कुल मिलाकर, जंग भले मैदान में लड़ी गई हो, लेकिन इस समझौते के आर्थिक फायदे फिलहाल ईरान के खाते में जाते दिख रहे हैं. अब असली परीक्षा अगले 60 दिनों की होगी, जब परमाणु वार्ता और इस MoU के वादों को जमीन पर उतारा जाएगा. तब पता चलेगा कि यह सिर्फ सीजफायर था या सचमुच ईरान के लिए अरबों डॉलर का 'जैकपॉट'.

यह भी पढ़ें: ईरान के परमाणु बम बनाने लायक शुद्ध यूरेनियम का क्या होगा? यह रही शांति डील की सबसे अहम बात

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Ashutosh Kumar Singh
Chief Sub Editor
आशुतोष कुमार सिंह NDTV इंडिया के साथ बतौर चीफ सब-एडिटर काम करते हैं. इससे पहले द क्विंट के साथ असिस्टेंट एडिटर के रूप में काम कर चुके हैं. देहाती यादो... और पढ़ें
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