- अल-अरबिया ने अमेरिका-ईरान डील के 14 प्वाइंट को सबसे पहले हासिल करने और दुनिया के सामने लाने का दावा किया है
- इस रिपोर्ट के अनुसार 19 जून को डील पर मुहर लगते हर मोर्चे पर जंग रुक जाएगी, लेबनान में भी
- इसके बाद ईरान और अमेरिका अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत करके उसे पूरा करने की कोशिश करेंगे
अमेरिका और ईरान में डील हो चुकी है और 19 जून को जिनेवा में इसपर मुहर भी लग जाएगी. पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि इस डील (समझौता ज्ञापन या मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में किसे क्या मिला है क्योंकि अभी तक इस डील की शर्तों को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है. ऐसे में सऊदी अरब के मीडिया आउटलेट अल-अरबिया ने इस पूरी डील के 14 प्वाइंट को सबसे पहले हासिल करने और दुनिया के सामने लाने का दावा किया है. अगर अल-अरबिया की यह रिपोर्ट सही निकलती है, तो यह हाल के सालों में ईरान की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा सकती है.
जिस देश पर भारी प्रतिबंध लगे थे, जिसकी अरबों डॉलर की संपत्ति फ्रीज (जब्त) की गई थी, उसे जंग के बाद हर तरह का फायदा होता दिख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका न सिर्फ प्रतिबंध हटाने की दिशा में जाएगा, बल्कि 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड का भी समर्थन करेगा. बदले में ईरान को केवल यह दोहराना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा (जो वह पहले से कहता रहा है). चलिए आपको बताते हैं कि इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच के इस MoU में कौन से 14 प्वाइंट लिखे हैं.
- ईरान और अमेरिका, साथ ही मौजूदा युद्ध में उनके सहयोगी देश, इस MoU पर हस्ताक्षर होते ही सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म घोषित करेंगे. इसमें लेबनान भी शामिल है. दोनों पक्ष वादा करेंगे कि आगे से वे एक-दूसरे को धमकी नहीं देंगे और न ही ताकत का इस्तेमाल करेंगे. अंतिम समझौते में इस और बाकी सभी बिंदुओं की पुष्टि होगी.
- ईरान और अमेरिका एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे.
- ईरान और अमेरिका अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत करके उसे पूरा करने की कोशिश करेंगे. दोनों की सहमति से यह समय बढ़ाया जा सकता है.
- MoU पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान पर लगी समुद्री नाकाबंदी खत्म करेगा. ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की रुकावट या बाधा को रोकेगा. अधिकतम 30 दिनों के भीतर समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही को पूरी क्षमता तक बहाल किया जाएगा. ईरान के लिए जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर के अनुसार होगी. अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका आसपास के क्षेत्रों से अपनी सेनाएं भी हटा लेगा.
- MoU पर हस्ताक्षर होते ही ईरान तुरंत कदम उठाएगा ताकि फारस की खाड़ी से ओमान सागर और वापस आने-जाने वाले व्यापारिक जहाजों की आवाजाही 30 दिनों के भीतर युद्ध से पहले के स्तर पर लौट सके. इसके लिए तकनीकी बाधाओं को हटाया जाएगा और ईरान समुद्री बारूदी सुरंगों (माइंस) को निष्क्रिय करेगा.
- अमेरिका और उसके क्षेत्रीय पार्टनर मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए एक व्यापक योजना बनाएंगे, जिस पर दोनों पक्ष सहमत होंगे. इसके लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की फंडिंग सुनिश्चित की जाएगी. इस योजना को लागू करने का तरीका अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में 60 दिनों के भीतर तय किया जाएगा.
- अमेरिका अंतिम समझौते में तय टाइमटेबल के अनुसार ईरान पर लगे सभी प्रकार के प्रतिबंध खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध होगा. इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से जुड़े प्रतिबंध, और अमेरिका के सभी प्रतिबंध शामिल होंगे.
- ईरान फिर से दोहराता है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. ईरान और अमेरिका इस बात पर सहमत हैं कि एनरिच्ड यूरेनियम और अन्य सभी परमाणु मुद्दों, जिनमें ईरान की परमाणु जरूरतें भी शामिल हैं, का समाधान अंतिम समझौते में किया जाएगा. अंतिम समझौता इस बिंदु की भी पुष्टि करेगा.
- अंतिम समझौता होने तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति बनाए रखेंगे. ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा और अमेरिका ईरान पर नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा तथा क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ाएगा.
- अमेरिका वादा करता है कि MoU पर हस्ताक्षर होते ही और प्रतिबंध हटने तक, अमेरिकी वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी) ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े सभी उत्पादों के निर्यात के लिए छूट जारी करेगा. इसमें बैंकिंग, बीमा, परिवहन और अन्य संबंधित सेवाएं भी शामिल होंगी.
- अमेरिका वादा करता है कि अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ने के साथ ईरान की फ्रीज (जब्त) हुई या सीमित की गई संपत्ति और धनराशि को रिलीज किया जाएगा और पूरी तरह उपलब्ध कराया जाएगा. यह धन, चाहे मेन अकाउंट में हो या कहीं और भेजा गया हो, ईरान के केंद्रीय बैंक द्वारा तय किए गए अकाउंट को भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा. अमेरिका इसके लिए जरूरी सभी परमिट और लाइसेंस जारी करेगा.
- ईरान और अमेरिका सहमत हैं कि अंतिम समझौते को सफलता से लागू करने और भविष्य में उसके पालन की निगरानी के लिए एक विशेष व्यवस्था बनाई जाएगी.
- MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद, और जब ईरान को इस बात का भरोसा मिल जाएगा कि बिंदु 4, 5, 10 और 11 लागू होने शुरू हो गए हैं तथा लगातार लागू रहेंगे, तब ईरान और अमेरिका केवल बाकी बचे हुए बिंदुओं पर अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू करेंगे.
- अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाध्यकारी (कानूनी रूप से लागू) प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी.
नोट- इस मीडिया रिपोर्ट के बाद कि ईरान को 300 बिलियन डॉलर तक मिल सकते हैं, अमेरिकी सरकार की खूब आलोचना हो रही है. ऐसे में पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात को झूठा करार दिया और अब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसपर सफाई दी है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, "मान लीजिए, उदाहरण के लिए UAE ईरान में किसी न्यूक्लियर पावर प्लांट में निवेश करना चाहता है. वे ऐसा तब तक नहीं कर सकते जब तक अमेरिका कुछ प्रतिबंध को नहीं हटाए. लेकिन जबतक ईरानी अपना व्यवहार नहीं बदलते तबतक न तो UAE निवेश करेगा और न अमेरिका निवेश करने देगा. तो यह नहीं कहा जा सकता कि अमेरिका ईरान को पैसा दे रहा है. हम तो यह कह रहे हैं कि अगर ईरानी अपना व्यवहार बदलते हैं, तो हम दूसरे देशों को उनके देश को फिर से बनाने और वहां के लोगों के लिए खुशहाली लाने में निवेश करने देंगे."
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