- लेबनान पर हमले को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच रिश्तों में लकीर खींच गई
- ट्रंप ने लेबनान के मुद्दों पर नेतन्याहू को सनकी तक कह दिया था.
- लेकिन अब ट्रंप ने कहा है कि इजरायल के प्रधानमंत्री योद्धा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच रिश्तों की खिचड़ी इन दिनों बड़ी अजीब पक रही है. कभी ट्रंप इजरायल के प्रधानमंत्री को सनकी कह देते हैं तो कभी योद्धा प्रधानमंत्री कहते है. दूसरी ओर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने रेड अलर्ट जारी कर दिया है. US खुफिया रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि नेतन्याहू अपने राजनीतिक फायदे के लिए ईरान के साथ हुई शांति डील पर पानी फेर सकते हैं.
शनिवार को कतर की ओर से तोहफे में दिए गए नए 'एयर फोर्स वन' विमान का अनावरण करने पहुंचे ट्रंप के सुर बदले-बदले नजर आए. हाल ही में दोनों नेताओं के बीच हुई तीखी बहस की खबरों के बीच ट्रंप ने इजरायल के साथ मजबूत रिश्तों की दुहाई दी. उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान युद्ध में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर बहुत शानदार ढंग से लड़ाई लड़ी है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि नेतन्याहू एक योद्धा प्रधानमंत्री हैं और उन्हें इसका श्रेय मिलना ही चाहिए.
'उन्हें थोड़ा होश में रखना पड़ता है'
भले ही ट्रंप सार्वजनिक मंचों पर नेतन्याहू की तारीफों के पुल बांध रहे हों, लेकिन अंदरूनी कहानी कुछ और ही बयां करती है. 'एक्सियोस' न्यूज आउटलेट को दिए एक इंटरव्यू में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उनका नेतन्याहू पर कोई नियंत्रण है, तो उन्होंने बेहद बेबाक जवाब दिया. ट्रंप ने कहा, "हमारे रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन हमें उन्हें थोड़ा होश में रखना पड़ता है."
अपशब्द तक कहने की नौबत आई
अमेरिकी राष्ट्रपति की यह नाराजगी महज बयानों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की डील होने के बावजूद इजरायल की ओर से लेबनान पर हमले जारी रखने से ट्रंप का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया था. इसी महीने 1 जून को दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत गाली-गलौज तक पहुंच गई थी. तब लेबनान पर इजरायली हमलों के कारण ईरान ने शांति वार्ता रोक दी थी.
खुफिया रिपोर्ट का खुलासा-कुर्सी बचाने के लिए युद्ध नहीं रोकेंगे नेतन्याहू
इजरायल का इरादा लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को रोकने का बिल्कुल नहीं है. इसके पीछे नेतन्याहू की घरेलू राजनीतिक मजबूरी को सबसे बड़ी वजह बताया जा रहा है. इसी साल इजरायल में आम चुनाव होने हैं और नेतन्याहू का राजनीतिक वजूद इसी बात पर टिका है कि वे अपनी जनता को यह दिखाएं कि वे लेबनान से सेना पीछे नहीं हटा रहे हैं. इसके अलावा, इजरायल इस बात से भी भड़का हुआ है कि ट्रंप के शांति समझौते की शर्तें ईरान पर 'अधिकतम दबाव' बनाए रखने के उसके बड़े लक्ष्य को कमजोर करती हैं.
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