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मध्य पूर्व की शांति में रोड़ा बन रहे इजरायल-लेबनान के बीच सीजफायर, पर्दे के पीछे किसने किया ये काम?

इजरायल और लेबनान के झगड़े में एक वक्त तो ऐसा लगा जैसे अमेरिका और ईरान के बीच डील टूटने वाली है. लेकिन ऐन वक्त पर अमेरिका ने इस डील को खत्म होने से बचा लिया है.

मध्य पूर्व की शांति में रोड़ा बन रहे इजरायल-लेबनान के बीच सीजफायर, पर्दे के पीछे किसने किया ये काम?
लेबनान और हिजबुल्लाह पर हमले की वजह से अमेरिका और इजरायल की दोस्ती सबसे खराब दौर से गुजर रही है.

इजरायल और हिजबुल्लाह एक बेहद नाजुक युद्धविराम को दोबारा लागू करने पर सहमत हो गए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को खत्म करने के लिए हुए नए समझौते के सामने यह अब तक की सबसे बड़ी और शुरुआती चुनौती थी, जो हिजबुल्लाह के हमले और इजरायल की भीषण जवाबी कार्रवाई के बाद खतरे में पड़ती दिख रही थी.

दरअसल, स्विट्जरलैंड में इस नए समझौते को जमीन पर उतारने के लिए शुक्रवार को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक बेहद अहम बैठक होने वाली थी. लेकिन इससे ठीक पहले इजरायल ने दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में हवाई हमलों कर दिए थे. इसमें कम से कम 47 लोगों की मौत हो गई. फिर जवाबी हमले में हिजबुल्लाह ने चार इजरायली सैनिकों को मार दिया. हिंसा के बाद इजरायल और अमेरिका को यह बैठक रद्द करनी पड़ी.

अमेरिका और कतर की मध्यस्थता से थमी जंग

तनाव को कम करने की भारी कूटनीतिक कोशिशों के बाद, शुक्रवार (19 जून) को स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे से इस नए युद्धविराम को लागू कर दिया गया. सूत्रों के मुताबिक, इजरायल और हिजबुल्लाह को दोबारा इस समझौते पर लाने के लिए अमेरिका और कतर ने पर्दे के पीछे से बड़ी मध्यस्थता की है. वहीं, एक अन्य राजनयिक सूत्र ने बताया कि इस समझौते को अमलीजामा पहनाने में वॉशिंगटन और दोहा के साथ-साथ ईरान ने भी अहम भूमिका निभाई है.

इस बीच, लेबनान की संप्रभुता को लेकर वैश्विक स्तर पर हलचल तेज हो गई है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से फोन पर लंबी बात की. इस बातचीत में रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका लेबनान की सुरक्षा, स्थिरता और देश के सभी हिस्सों पर वहां की सरकार का अधिकार बहाल करने की कोशिशों का पूरी तरह समर्थन करता है.

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने और क्या कहा?

लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं की बातचीत का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया के ताजा हालात रहे. मार्को रुबियो ने लेबनान की सेना और सुरक्षा बलों सहित वहां की तमाम कानूनी संस्थाओं को मजबूत करने के लिए अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई.

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वॉशिंगटन लेबनान में शांति की बहाली चाहता है, ताकि लेबनानी सरकार अपनी सीमाओं के भीतर हर हिस्से पर अपना नियंत्रण मजबूत कर सके. अमेरिका इसके लिए लेबनानी सेना को हर जरूरी मदद देने के लिए तैयार है.

वाशिंगटन में अगले हफ्ते होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता

इस समर्थन के लिए राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिका का आभार जताया, लेकिन साथ ही उन्होंने लेबनानी धरती पर इजरायली सैन्य कार्रवाइयों को पूरी तरह रोकने की जरूरत पर जोर दिया. राष्ट्रपति औन ने स्पष्ट किया कि अगले हफ्ते वॉशिंगटन में होने वाली लेबनान-अमेरिका-इजरायल की त्रिपक्षीय वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए एक पूर्ण और व्यापक युद्धविराम होना बेहद जरूरी है.

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चंदन सिंह राजपूत
Senior Sub Editor
चंदन सिंह राजपूत एनडीटीवी हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर कार्यरत हैं. डिजिटल मीडिया में करीब 5 साल का अनुभव है. एनडीटीवी से पहले बीबीसी हिंदी, क्विंट... और पढ़ें
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