
डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
वाशिंगटन:
अमेरिका ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की निंदा करने वाले ब्रिक्स देशों के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि वह पांच सदस्यीय दल को वैश्विक शासन एवं स्थिरता में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को एक सवाल के जवाब में कहा, ‘हम वैश्विक शासन और स्थिरता में रचनात्मक योगदान देने के लिए ब्रिक्स मंच को प्रोत्साहित करते हैं और ब्रिक्स सदस्यों द्वारा उत्तरी कोरिया के हालिया परमाणु परीक्षण की निंदा करने का स्वागत करते हैं.’
ब्रिक्स की ओर से जारी बयान में कहा गया था, ‘हम कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और परमाणु मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं और जोर देकर कहते हैं कि इसे सभी संबंधित पक्षों के प्रत्यक्ष संवाद के जरिये और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए.’
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हालांकि अधिकारियों ने ब्रिक्स के इस बयान से जुड़े प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया, जिसमें लश्कर ए तैयबा एवं जैश ए मोहम्मद को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए समस्या पैदा करने वाले आतंकवादी समूहों के रूप में नामित किया था.
चीन के श्यामन में ब्रिक्स ने अपने वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान जारी एक संयुक्त घोषणा में कहा था, ‘इस संदर्भ में, हम क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और तालिबान, आईएसआईएस, अल-कायदा एवं इसके सहयोगियों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर चिंता जाहिर करते हैं. अल कायदा के सहयोगियों में ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम), इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उजबेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और हिज्ब उत-तहरीर शामिल हैं.’
VIDEOS : ब्रिक्स में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय वार्ता
बयान में कहा है, ‘हम इस पर जोर देते हैं कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, साजिश रचने और सहयोग करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.’ हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया है.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
ब्रिक्स की ओर से जारी बयान में कहा गया था, ‘हम कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और परमाणु मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं और जोर देकर कहते हैं कि इसे सभी संबंधित पक्षों के प्रत्यक्ष संवाद के जरिये और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए.’
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हालांकि अधिकारियों ने ब्रिक्स के इस बयान से जुड़े प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया, जिसमें लश्कर ए तैयबा एवं जैश ए मोहम्मद को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए समस्या पैदा करने वाले आतंकवादी समूहों के रूप में नामित किया था.
चीन के श्यामन में ब्रिक्स ने अपने वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान जारी एक संयुक्त घोषणा में कहा था, ‘इस संदर्भ में, हम क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और तालिबान, आईएसआईएस, अल-कायदा एवं इसके सहयोगियों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर चिंता जाहिर करते हैं. अल कायदा के सहयोगियों में ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम), इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उजबेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और हिज्ब उत-तहरीर शामिल हैं.’
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बयान में कहा है, ‘हम इस पर जोर देते हैं कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, साजिश रचने और सहयोग करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.’ हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया है.
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