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This Article is From Jul 07, 2025

पाकिस्तान के आतंकवाद से ट्रंप के टैरिफ तक, ब्रिक्स देशों के घोषणापत्र में यह 4 बडे़ संदेश

BRICS Declaration: ब्राजील के शहर रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स देशों का शिखर सम्मेलन जारी है. आपको बताते हैं कि ब्रिक्स देशों के इस 'रियो डी जेनेरियो घोषणापत्र' से किसे और क्या संदेश देने की कोशिश की गई है.

पाकिस्तान के आतंकवाद से ट्रंप के टैरिफ तक, ब्रिक्स देशों के घोषणापत्र में यह 4 बडे़ संदेश
BRICS Declaration: रियो डी जनेरियो में चल रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
  • ब्रिक्स नेताओं ने सीमापार आतंकवाद की कड़ी निंदा की और पहलगाम हमले की आलोचना की.
  • घोषणापत्र में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इशारा स्पष्ट था.
  • ब्रिक्स ने ट्रंप के आयात शुल्क को लेकर गंभीर चिंता जताई, बिना सीधे नाम लिए आलोचना की. ट्रंप ने अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी.
  • ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा की गई, ईरान को समर्थन दिया गया.
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BRICS Declaration: ब्राजील के शहर रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स देशों का शिखर सम्मेलन जारी है. ऐसे में ब्रिक्स नेताओं ने एक घोषणापत्र जारी करके सीमापार आतंकवाद की कड़ी निंदा की, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के "अंधाधुंध" आयात शुल्क (टैरिफ) और ईरान पर हाल ही में इजरायली-अमेरिकी हमलों पर निशाना साधा है. भले आतंकवाद के मुद्दे पर घोषणापत्र में किसी खास देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन पहलगाम हमले की कड़े शब्दों में निंदा और सीमा पार आतंकवाद का संदर्भ बता रहा है कि इशारा पूरी तरह से पाकिस्तान पर केंद्रित रहा है. चलिए आपको बताते हैं कि ब्रिक्स देशों के इस 'रियो डी जेनेरियो घोषणापत्र' से किसे और क्या संदेश देने की कोशिश की गई है.

पाकिस्तान को संदेश

फिर से साफ कर दें कि घोषणापत्र में पाकिस्तान का सीधे नाम नहीं लिया गया है लेकिन उसकी पोल खोलने के लिए कुछ छोड़ा भी नहीं गया है. रविवार देर रात शिखर सम्मेलन में अपनाए गए ‘रियो डी जनेरियो घोषणापत्र' में, ब्रिक्स नेताओं ने पहलगाम आतंकवादी हमले की "कड़े शब्दों में" निंदा की, और "आतंकवादियों के सीमा पार आंदोलन, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने" का आह्वान किया.

ध्यान रहे कि ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है. इसमें दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं. इसमें चीन भी शामिल है और ऐसे में यह तो संभव नहीं था कि वह आतंकवाद की आलोचना करते घोषणापत्र में अपने करीबी यार पाकिस्तान का नाम आने देता. इसके बावजूद पहलगाम आतंकी हमले के साथ-साथ आतंकवाद पर इतना कड़ा स्टैंड भारत के दबदबे और उसके पहल का सबूत देता है.

इस घोषणापत्र के आने के पहले 'वैश्विक शासन में सुधार' विषय पर सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पूरी दुनिया को साफ-साफ मैसेज दिया कि भारत आतंकवाद पर समझौता करने को तैयार नहीं है. पहलगाम जैसा कोई आतंकी हमला सिर्फ भारत पर हमला नहीं है, यह पूरी मानवता पर हमला है.  

ट्रंप को संदेश और फिर ट्रंप की धमकी

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित इन 11 उभरते देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक आर्थिक उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा है. भले अन्य मुद्दों पर यह गुट काफी हद तक बंटा हुआ है, लेकिन जब उग्र अमेरिकी नेता और उनके टैरिफ युद्धों की बात आती है, तो इन देशों को साथ आने का एक कॉमन ग्राउंड मिल जाता है. उन्होंने अपने घोषणापत्र में अमेरिका और ट्रंप का बिना नाम लिए आलोचना की है.

घोषणापत्र के अनुसार, ब्रिक्स सदस्यों ने "एकतरफा टैरिफ में वृद्धि के बारे में गंभीर चिंता" व्यक्त करते हुए कहा कि टैरिफ से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने का खतरा है. ब्राजील, भारत और सऊदी अरब जैसे अमेरिकी सहयोगियों को देखते हुए, घोषणापत्र में किसी भी बिंदु पर अमेरिका या उसके राष्ट्रपति की नाम लेकर आलोचना नहीं की गई.

हालांकि ब्रिक्स के घोषणापत्र को देखते हुए ट्रंप ने भी धमकी दे दी है. ट्रंप का कहना है कि जो देश ब्रिक्स की 'अमेरिकी विरोधी नीतियों' के साथ तालमेल बैठाएंगे उनपर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगेगा.  ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, "ब्रिक्स की अमेरिकी विरोधी नीतियों के साथ खुद को जोड़ने वाले किसी भी देश पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाया जाएगा. इस नीति में कोई अपवाद नहीं होगा. इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद!"

ईरान पर हमले की निंदा

ब्रिक्स ने इजरायल और अमेरिका द्वारा परमाणु और अन्य टारगेट पर किए गए सैन्य हमलों की निंदा करते हुए, साथी सदस्य ईरान के लिए समर्थन भी दिखाया. 

दो दशक पहले तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मंच के रूप में कल्पना की गई ब्रिक्स को अमेरिका और पश्चिमी यूरोपीय शक्ति के खिलाफ काउंटरबैलेंस के रूप में देखा जाने लगा है.

लेकिन जैसे-जैसे समूह का विस्तार हुआ है और इसमें ईरान, सऊदी अरब और अन्य देश शामिल हो गए हैं. ऐसे में ब्रिक्स को गाजा युद्ध से लेकर अमेरिकी वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती देने तक के मुद्दों पर सार्थक सहमति तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ा है.

इसे एक उदाहरण से समझिए. ब्रिक्स देशों ने अपने घोषणापत्र में सामूहिक रूप से इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष के शांतिपूर्ण दो-राज्य समाधान का आह्वान किया है. हालांकि तेहरान की लंबे समय से स्टैंड रहा है कि इजरायल का कोई हक नहीं बनता, उसे खत्म कर दिया जाना चाहिए. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार एक ईरानी राजनयिक सूत्र ने कहा कि उनकी सरकार ने अपनी आपत्ति को मेजबान ब्राजील को बता दिया है. फिर भी, ईरान ने इस घोषणापत्र को सिरे से खारिज नहीं किया, बल्कि उसने अपना साइन कर दिया.

शी जिनपिंग की गौरमौजूदगी

इस साल के शिखर सम्मेलन का राजनीतिक प्रभाव चीन के शी जिनपिंग की अनुपस्थिति से कम माना जा रहा है. शी जिनपिंग राष्ट्रपति के रूप में अपने 12 वर्षों में पहली बार बैठक में शामिल नहीं हुए. ऐसा नहीं है कि चीनी नेता ही ऐसे बड़े नाम थे जो शिखर सम्मेलन से अनुपस्थित रहे. यूक्रेन में युद्ध अपराधों के आरोपी बन चुके रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी दूर रहने का विकल्प चुना और वीडियो लिंक के जरिए इसमें भाग लिया. सम्मेलन में पुतिन ने समकक्षों से कहा कि ब्रिक्स वैश्विक शासन में एक प्रमुख खिलाड़ी बन गया है.

यह भी पढ़ें: ब्रिक्स देशों पर भड़के ट्रंप! 'अमेरिका विरोधी नीतियों' का साथ देने वालों पर अतिरिक्त 10% टैरिफ की धमकी दी

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