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अमेरिका को G20 की 'फैमिली फोटो' रद्द करनी पड़ी, एक साथ चल रहे दो विवाद

बैठक में शामिल लोगों का कहना है कि इन असहमतियों के कारण शनिवार को बैठक खत्म होने पर विदेश मंत्रियों की ओर से कोई संयुक्त बयान जारी होने की संभावना नहीं है.

अमेरिका को G20 की 'फैमिली फोटो' रद्द करनी पड़ी, एक साथ चल रहे दो विवाद
जी20 विदेश मंत्रियों की मीटिंग में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो. (फोटो-एनडीटीवी)
  • अमेरिका में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में पारंपरिक फैमिली फोटो रूस के विदेश मंत्री के कारण रद्द हुई
  • यूरोपीय और ऑस्ट्रेलियाई देशों ने रूस के साथ फोटो सेशन का बहिष्कार करते हुए स्पष्ट विरोध जताया
  • ऑस्ट्रेलिया ने रूस के यूक्रेन पर हमले की कड़ी निंदा की और इसका वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव बताया

अमेरिका में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक की शुरुआत में होने वाली पारंपरिक "फैमिली फोटो" को अचानक रद्द कर दिया गया है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन सहित कई देशों ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ खड़े होने से इनकार कर दिया. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह फैसला तब लिया, जब ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कई यूरोपीय अधिकारियों ने साफ कर दिया कि वे इस फोटो सेशन का बहिष्कार करेंगे या इसमें शामिल नहीं होंगे. ये फोटो सेशन अक्सर इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की शुरुआत में होता है.

इसके बावजूद, रुबियो ने अटलांटा में बातचीत की शुरुआत की और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तथा व्यापार के लिए खतरा बने मुद्दों पर एकजुटता की अपील की. रुबियो ने अपने साथियों से कहा, "हम एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं. हम कई ऐसे आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रहे हैं, जो आपस में जुड़े हुए हैं." बातचीत में शामिल लगभग एक-तिहाई देशों ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी रूसी प्रतिनिधि के साथ एक मंच पर नहीं आएंगे.

यूरोप ने क्यों किया विरोध

यूरोपीय संघ के देशों ने साफ कर दिया था कि वे रूसियों के साथ किसी भी फोटो सेशन का बहिष्कार करेंगे. शुक्रवार के सत्र से पहले, जर्मनी के विदेश मामलों के मंत्री जोहान वाडेफुल ने चेतावनी देते हुए कहा, "किसी भी स्थिति में यूरोपीय साझेदारों और लावरोव की एक साथ कोई 'फैमिली फोटो' नहीं होगी, क्योंकि... रूस के साथ अब हालात सामान्य नहीं हैं." यूके के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने भी ऐसा ही रुख अपनाया. उन्होंने कहा, "हम रूसियों के साथ इस तरह से कोई जुड़ाव नहीं रखते हैं, और पिछले कई सालों से ऐसा ही है."

बैठक के शुरुआती सत्र के दौरान, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने लावरोव के सामने ही यूक्रेन पर रूस के हमले को क्रूर और अनुचित बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि रूस के इस अवैध युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित किया है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा की स्थिति को और खराब कर दिया है. वोंग के एक प्रवक्ता ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया ने ग्रुप फोटो रद्द करने के अमेरिकी फैसले का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, "ऑस्ट्रेलिया का रुख स्पष्ट और अडिग रहा है: हम यूक्रेन पर रूस के क्रूर और अवैध हमले को सामान्य नहीं मानेंगे. G20 में हमारा पूरा ध्यान हमारे सामने मौजूद महत्वपूर्ण कार्यों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने आ रही चुनौतियों से निपटने पर है."

यह मतभेद इस बात का एक और सबूत है कि ट्रंप प्रशासन ने रूस और उसके अलग-थलग पड़े राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में वापस लाने की जो कोशिश की थी, उससे कितनी गहरी दरार पैदा हुई है - खासकर तब, जब पुतिन यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं. शुरुआती सत्र में शामिल राजनयिकों ने माहौल को सौहार्दपूर्ण बताया, लेकिन यह भी कहा कि यूक्रेन के मुद्दे पर रूस का रुख बिल्कुल नहीं बदला है. इसी तरह, G20 में पोलैंड की सदस्यता के विरोध को लेकर भी रूस का रुख सख्त बना हुआ है.

दक्षिण अफ्रीका को बुलाया ही नहीं 

पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की, जो G20 बैठक में पहली बार एक अतिथि के रूप में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, को इस बात से कोई हैरानी नहीं हुई. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हमारे बीच युद्ध चल रहे हैं और उन युद्धों में शामिल पक्ष भी मेज पर मौजूद हैं, इसलिए किसी एक आम सहमति पर पहुंचना बहुत मुश्किल है." कई प्रतिभागियों ने - जिन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बात की, क्योंकि उन्हें बंद दरवाजे के पीछे हुई इन चर्चाओं के बारे में बताने की अनुमति नहीं थी - बताया कि सभी पक्ष अपने मतभेदों को दूर करने की कोशिश करने पर सहमत हुए हैं. उन्होंने कहा कि वे अगले महीने फ्लोरिडा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेज़बानी में होने वाले G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे.

यूक्रेन, जो G20 का सदस्य नहीं है लेकिन पिछली बैठकों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था, उसे इस साल नहीं बुलाया गया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह एक सोच-समझकर लिया गया फैसला था, ताकि समूह में केवल औपचारिक सदस्यों को ही शामिल किया जाए. पोलैंड, जो अभी सदस्य नहीं है, अमेरिका के समर्थन से इसकी औपचारिक सदस्यता पाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन आमंत्रण सूची से दक्षिण अफ्रीका का नाम नदारद था, जो G20 का संस्थापक सदस्य है और इस समूह में शामिल एकमात्र अफ़्रीकी देश है. दक्षिण अफ्रीका के ट्रंप प्रशासन के साथ कई गंभीर विवाद चल रहे हैं. पिछले साल जब दक्षिण अफ्रीका ने G20 की अध्यक्षता की थी, तब ट्रंप और रुबियो सहित अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने उसके द्वारा आयोजित बैठकों में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था. दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध मंत्री रोनाल्ड लमोला के प्रवक्ता, फिंडिले कुनेने ने कहा, "हमने हमेशा यही कहा है कि हमारा इसमें शामिल न होना हमारी अपनी मर्जी से नहीं है." बैठक में शामिल लोगों का कहना है कि इन असहमतियों के कारण शनिवार को बैठक खत्म होने पर विदेश मंत्रियों की ओर से कोई संयुक्त बयान जारी होने की संभावना नहीं है.

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