- अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने में मिलाने की योजना बना रहा है, और ट्रंप ऐसा किसी कीमत पर करना चाहते हैं
- ट्रंप की टीम ग्रीनलैंड के लोगों को अमेरिका में शामिल होने पर एकमुश्त भुगतान देने पर चर्चा कर रही है- रिपोर्ट
- व्हाइट हाउस के अधिकारी प्रति व्यक्ति दस हजार से एक लाख डॉलर तक की रकम देने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं
आजकल ग्रीनलैंड बहुत चर्चा में है. वजह है कि अमेरिका इस पर कब्जा जमाना चाहता है, वो भी ऐसे द्वीप पर जिस पर बर्फ की चादर बिछी रहती है और मई से जुलाई के आखिर तक 24 घंटे दिन की रोशनी रहती है. जीवन दुरूह है, फिर भी अमेरिका और खास तौर पर ट्रंप इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं. ऐसा लगता है कि ट्रंप किसी कीमत पर ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाना चाहते हैं. एक तरफ वो अपनी सैन्य ताकत का बखान कर रहे हैं तो दूसरी तरफ ग्रीनलैंड के लोगों को डॉलर का लालच देने का प्लान बना रहे हैं.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार मामले से परिचित चार सूत्रों ने बताया है कि अमेरिकी अधिकारी नई योजना बना रहे हैं. इसके तहत ग्रीनलैंड के लोगों को डेनमार्क से अलग होने और अमेरिका में शामिल होने के बदले एकमुश्त पेमेंट भेजने पर चर्चा की गई है. व्हाइट हाउस के सहयोगियों सहित अमेरिकी अधिकारियों ने प्रति व्यक्ति 10,000 डॉलर से एक लाख डॉलर तक के आंकड़ों पर चर्चा की है. भारतीय करेंसी में यह रकम लगभग 10 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक होगी. यह जानकारी नाम न छापने का अनुरोध करने वाले दो सूत्रों ने दी है. हालांकि आखिर में कितना ऑफर दिया जाता है और यह रकम किस तरह दी जाएगी, यह अभी तय नहीं हुआ है.
डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने पहले ही कर दिया है साफ इनकार
यहां यह समझ लीजिए कि ग्रीनलैंड में साल 1979 से व्यापक स्वशासन है, हालांकि रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के हाथों में है. इसीलिए ग्रीनलैंड को डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त हिस्सा माना जाता है. ग्रीनलैंड और डेनमार्क में बैठी दोनों जगह की सरकारों ने साफ-साफ कह दिया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है लेकिन ट्रंप और उनकी सरकार मान नहीं रही है. अब लगता है कि वह ग्रीनलैंड के 57,000 लोगों को ही खरीदने की कोशिश में है.
डेनमार्क और पूरे यूरोप में नेताओं ने हाल के दिनों में ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर अपना अधिकार जताने की जमकर आलोचना की है, विशेष रूप से यह देखते हुए कि अमेरिका और डेनमार्क एक आपसी रक्षा समझौते से बंधे नाटो सहयोगी हैं. मंगलवार को फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क ही अपने संबंधों के संबंध में निर्णय ले सकते हैं.
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