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ईरान युद्ध में अमेरिका के तीसरे विमानवाहक पोत की एंट्री, जानें कैसे बदल सकता है पूरा गेम

Israel-Iran war updates: मिडिल ईस्ट में तीन एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात होने से न सिर्फ अमेरिका की लड़ाकू क्षमता में भारी इजाफा होगा, बल्कि होर्मुज में अटके जहाजों को सुरक्षा भी मिलने की उम्मीद है.

ईरान युद्ध में अमेरिका के तीसरे विमानवाहक पोत की एंट्री, जानें कैसे बदल सकता है पूरा गेम
  • अमेरिका अब ईरान युद्ध में एक और विमानवाहक पोत तैनात कर रहा है. उसके पहले से दो ऐसे पोत मौजूद हैं
  • मिडिल ईस्ट में तीन विमानवाहक पोत होने से क्षेत्र में अमेरिका के पास लगभग 250-270 लड़ाकू विमान होंगे
  • इसका फायदा मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों को होगा. होर्मुज में अटके जहाजों को भी सुरक्षा मिलेगी
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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग को 8 दिन हो चुके हैं और युद्ध थमने के बजाय और तेज होने के पूरे आसार दिख रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब अमेरिका के तीसरे विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) USS जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश को मिडिल ईस्ट में तैनात करने का फैसला किया है. अमेरिका के दो विमानवाहक पोत पहले से इलाके में हैं और ईरान के खिलाफ हमले कर रहे हैं.

मिडिल ईस्ट के लिए रवाना हुआ USS जॉर्ज बुश 

अमेरिका के नौसेना इंस्टिट्यूट के मुताबिक, यूएसएस जॉर्ज एचडब्लू बुश ने 5 मार्च को अपनी प्री-डिप्लॉयमेंट ट्रेनिंग पूरी कर ली है. इस दौरान पोत के एस्कॉर्ट और एयर विंग भी साथ रही थीं. अब यह कैरियर स्ट्राइक ग्रुप राष्ट्रीय मिशन के लिए तैयार है. खबरों के मुताबिक, पोत ने मिडिल ईस्ट की यात्रा शुरू कर दी है. इसके 10-12 दिनों में भूमध्य सागर के पूर्वी इलाके में पहुंचने की संभावना है. 

दो विमानवाहक पोत पहले से तैनात

अमेरिका ने फिलहाल ईरान के पास अपने दो ताकतवर विमानवाहक पोत - USS जेराल्ड आर. फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन पहले से ही तैनात कर रखे हैं. युद्ध के हालात को देखते हुए USS फोर्ड की तैनाती की अवधि बढ़ा दी गई है. USS अब्राहम लिंकन को जनवरी में दक्षिण चीन सागर से हटाकर मिडिल ईस्ट लाया जा चुका है. अब USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश के आने से इस इलाके में अमेरिका की पकड़ और भी मजबूत हो जाएगी.

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3 एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात होने के मायने

तीन एयरक्राफ्ट कैरियर मिडिल ईस्ट में तैनात होने से अमेरिका की लड़ाकू क्षमता में भारी इजाफा हो जाएगा. आमतौर पर अमेरिका के एक विमान वाहक पोत पर लगभग 90 लड़ाकू विमान तैनात होते हैं. इस तरह ऐसे तीन पोत होने से क्षेत्र में अमेरिका के पास लगभग 250-270 लड़ाकू विमान उपलब्ध होंगे. अमेरिका ने मध्य-पूर्व में तैनाती बढ़ाकर ईरान को साफ संदेश दे दिया है कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है.

USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश : ताकत और खासियतें

  • USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश अमेरिकी नौसेना की निमित्ज़ श्रेणी का 10वां विमान वाहक पोत है. 
  • इसका नाम अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश के नाम पर रखा गया है. 
  • यह पोत 1,092 फीट से अधिक लंबा है और इसका फ्लाइट डेक साढ़े चार एकड़ में फैला है.
  • इसे समुद्र में तैरता शहर भी कहा जाता है. इस पर 5 से 6 हजार सैनिक तैनात रहते हैं.
  • इसमें दो परमाणु रिएक्टर लगे हैं, जो इसे 56 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने में मदद करते हैं.
  • इसके साथ 3 गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर भी चलते हैं, जो मिसाइल हमलों को नाकाम करने में सक्षम हैं. 
  • इस युद्धपोत पर एक साथ 70 से अधिक विमान और हेलीकॉप्टर तैनात हो सकते हैं. 
  • इसमें F/A-18 हॉर्नेट, सुपर हॉर्नेट, ई-2सी हॉकआई और ईए-6बी प्रोलर जैसे घातक फाइटर शामिल हैं. 
  • इस पोत की एक खूबी यह है कि यह हर 20 सेकंड में एक विमान लॉन्च कर सकता है. 
  • लंबे समय तक मिशन को अंजाम देने के लिए इस पोत पर करीब 8,500 टन एविएशन फ्यूल रहता है.

खाड़ी देशों पर हमले नहीं कर पाएगा ईरान

तीन विमानवाहक पोत तैनात रहने का फायदा मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों को भी होगा. ईरान अभी बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर बड़े हमले कर रहा है. एक और विमानवाहक पोत आने से इन हमलों को काउंटर किया जा सकेगा और ये सऊदी अरब और इजरायल जैसे सहयोगियों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा.

होर्मुज में अटके जहाजों को मिलेगी सुरक्षा

तीसरे विमानवाहक पोत की तैनाती का एक मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)  पर अटके तेल के जहाजों को सुरक्षा प्रदान करना भी माना जा रहा है. खाड़ी देशों से दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई का ये सबसे अहम रास्ता है. ईरान ने इसे बंद कर दिया है, जिससे सैकड़ों जहाज रास्ते में फंसे हुए हैं और आवाजाही 95 फीसदी तक घट गई है. इसकी वजह से भारत जैसे तमाम देशों तक तेल और गैस नहीं पहुंच पा रही है. कई देशों में संकट खड़ा हो गया है.  

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USS जॉर्ज बुश का दमदार रिकॉर्ड

USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश पोत का ट्रैक रिकॉर्ड काफी दमदार रहा है. इसने 2017 में सीरिया और इराक में ISIS के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई थी. उस दौरान इसके जरिये 907 टन से अधिक गोला-बारूद गिराया गया था, जो 1991 में सद्दाम हुसैन के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म के बाद किसी भी कैरियर ग्रुप की सबसे बड़ी कार्रवाई थी. इसके अलावा यह पोत नाटो के सहयोगी देशों के साथ भूमध्य सागर और यूरोप में कई बड़े युद्धाभ्यासों का भी हिस्सा रहा है.
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