- भारत ने फ्रांस के समर्थन से अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव रोकने के लिए राजी कर लिया है
- प्रस्ताव के अवरुद्ध होने के बाद पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के वैकल्पिक प्रतिबंध तंत्रों की तलाश कर रहा है
- चीन ने आतंकी संगठनों से जुड़े कुछ व्यक्तियों के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को अक्सर बाधित किया है
भारत ने चीन और पाकिस्तान को अमेरिका के साथ मिलकर बड़ा झटका दिया. अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र के 1267 आतंकवाद प्रतिबंध प्रावधानों के तहत नामित करने के पाकिस्तान और चीन के संयुक्त प्रस्ताव को रोक दिया है. वाशिंगटन ने कथित तौर पर तर्क दिया कि इन दोनों बलूच समूहों को अल कायदा या इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएल) से जोड़ने वाले पर्याप्त सबूत नहीं हैं. किसी संगठन को संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध ढांचे के तहत शामिल होने के लिए ये एक प्रमुख शर्त है.
असीम मुनीर की थी चाल
अमेरिका के इस कदम को पाकिस्तान और चीन के लिए एक कूटनीतिक झटका माना जा रहा है, जबकि यह आतंकवाद पर भारत के लंबे समय से चले आ रहे रुख के अनुरूप है. बीएलए और मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र के आतंकवादी प्रतिबंधों के तहत सूचीबद्ध करने के प्रयास को रोक दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर की तरफ से भारत को आतंकवाद का प्रायोजक साबित करने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र के 1267 प्रतिबंध प्रावधानों के तहत BLA और मजीद ब्रिगेड को नामित करना एक अहम कदम था.

पहलगाम हमले और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद, पाकिस्तान ने इन दोनों बलूच समूहों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक प्रयास तेज कर दिए. पिछले साल जब अमेरिका ने द रेजिस्टेंस फ्रंट को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया, तो इस्लामाबाद ने BLA और मजीद ब्रिगेड के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की मांग की.
बाद में इन दोनों समूहों पर अमेरिका ने घरेलू प्रतिबंध लगा दिए, जिससे पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंधों की सूची में इन्हें शामिल करने के लिए और जोश आ गया.
भारत को मिला अमेरिका और फ्रांस का समर्थन
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने फ्रांस के समर्थन से संयुक्त राज्य अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगाने के लिए राजी कर लिया. वाशिंगटन ने कथित तौर पर कहा कि बीएलए या मजीद ब्रिगेड को अल कायदा या आईएसआईएल से जोड़ने वाले कोई स्पष्ट सबूत नहीं हैं. प्रारंभिक रोक छह महीने के लिए लगाई गई थी, जिसे बाद में तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने अब अपना रुख स्पष्ट कर लिया है और अन्य सदस्यों को सूचित कर दिया है कि वह प्रस्ताव को रोक देगा. खबरों के मुताबिक, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम ने अमेरिकी रुख का समर्थन किया, जबकि चीन के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों के कारण भारत का दोस्त रूस चर्चा के दौरान चुप रहा.
प्रस्ताव गतिरोध में फंसा
प्रस्ताव के प्रभावी रूप से अवरुद्ध होने के बाद, पाकिस्तान कथित तौर पर संयुक्त राष्ट्र के वैकल्पिक प्रतिबंध तंत्रों की तलाश कर रहा है, जिनके माध्यम से बीएलए और मजीद ब्रिगेड को संभावित रूप से नामित किया जा सकता है.

अमेरिका के इस फैसले को इस संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है कि वाशिंगटन संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद से संबंधित मामलों पर चीन के रुख के साथ खड़ा नहीं दिखना चाहता. चीन ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े व्यक्तियों को प्रतिबंधित करने के भारत-अमेरिका के संयुक्त प्रयासों को अक्सर बाधित या विलंबित किया है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन की आपत्तियों के कारण लश्कर-ए-तैबा के तीन सदस्य - साजिद मीर, शाहिद महमूद और तलहा सईद - संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची 1267 से बाहर हैं.
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