डरबन:
अमेरिका ने गुरुवार को डरबन में जारी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन वार्ता में एक वैश्विक करार की राह में रोड़े अटकाने से इनकार किया। उसने कहा कि भविष्य के एक करार के लिए वह यूरोपीय संघ (ईयू) के प्रस्तावों का समर्थन करता है। छोटे द्वीप देशों ने कहा है कि समस्या का हल निकालने में देशों के बीच पर्याप्त 'गम्भीरता' नहीं है। जलवायु परिवर्तन के अमेरिकी दूत टॉड स्टर्न ने कहा, "यह कहना पूरी तरह से गलत है कि करार पर विलम्ब के लिए अमेरिका प्रस्ताव दे रहा है। ईयू ने करार को लेकर एक रूपरेखा का आह्वान किया है और हम उसका समर्थन करते हैं।" ज्ञात हो कि ईयू ने बुधवार को ग्रीनहाउस गैसों में कटौती के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी करार पर अमेरिका और चीन के सहमत न होने और डरबन में जारी जलवायु वार्ता का 'अपहरण' करने के लिए दोनों देशों की आलोचना की। टॉड ने कहा कि अमेरिका क्योटो प्रोटोकाल के एक दूसरे चरण पर निर्णय लेने जैसे गम्भीर मुद्दों पर व्यस्त है। ज्ञात हो कि क्योटो प्रोटोकाल कानूनी रूप से अकेला बाध्यकारी नियामक है जो अमीर देशों को कार्बन के उत्सर्जन में कटौती के लिए बाध्य और भविष्य के एक प्रभावी करार की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा, "विकासशील एवं गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और हरित प्रौद्योगिकी की हिस्सेदारी के तरीकों में मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन तेजी से एक हरित जलवायु कोष की स्थापना कर रहा है।" वहीं, 'द एसोसिएशन आफ स्माल आइलैंड स्टेट्स' (एओएसआईएस) ने कहा कि वे डरबन में जारी वार्ता से खुश नहीं है और देश किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए ज्यादा गम्भीर नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि ईयू ने वर्ष 2015 के पहले एक कानूनी रूप से बाध्यकारी एक करार का प्रस्ताव दिया है। जबकि चीन ने घोषणा की है कि वह वर्ष 2020 के बाद शर्तो के साथ बाध्यकारी करार को स्वीकार करेगा। वहीं, अमेरिका ने कहा है कि बाध्यकारी करार के लिए शर्ते स्वीकारना अभी उसके लिए ठीक नहीं है।
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