- अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों तक चले संघर्ष के बाद मध्य पूर्व में शांति स्थापित हुई है और बातचीत जारी है
- अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात का लाइसेंस रद्द कर दिया है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में अनिश्चितता बढ़ी है
- ईरान में अमेरिका के प्रति गहरी दुश्मनी के कारण भरोसे की कमी बातचीत की सफलता में बड़ी बाधा बनी हुई है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने हमसे "बातचीत" जारी रखने के लिए कहा है. उन्होंने लिखा, 'हमने ऐसा करने के लिए सहमति दे दी है, लेकिन अमेरिका ने उन्हें साफ-साफ बता दिया है कि सीजफायर (युद्धविराम) खत्म हो गया है.' इसका मतलब है कि जल्द ही अमेरिका और ईरान के बीच फिर बातचीत हो सकती है. फिर सीजफायर खत्म वाली बात क्यों कही?
पता चला है कि कतर की पहल पर अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों तक चले घातक हमलों के बाद मध्य पूर्व में बंदूकें शांत हो गई हैं. अमेरिका के एक अधिकारी ने अल जजीरा को बताया कि वाशिंगटन तेहरान के साथ बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है और तकनीकी बातचीत जारी है. सीएनएन ने भी ऐसा ही दावा किया है. हालांकि, इस बात को लेकर अनिश्चितता है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कब और कहां होगी.
क्या 18 जुलाई को बात होगी
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि बातचीत का अगला दौर 18 जुलाई को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होगा. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में बार-बार सैन्य झड़पें हुई हैं और ईरानियों ने अमेरिकियों पर संघर्ष-विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. अब अमेरिकियों ने ईरान का तेल बेचने का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है. इसलिए, यह कहना मुश्किल है कि बातचीत आगे बढ़ेगी या नहीं.
क्या पटरी पर आएगी बातचीत
मिलिट्री एनालिस्ट एलेक्स अल्फिर्राज शीर्स का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फिर से शुरू हो सकती है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या पूरी तरह से अविश्वास की है. उन्होंने अल जजीरा से कहा, "मुझे लगता है कि इन बातचीत से बहुत कम नतीजा निकलेगा. मुझे लगता है कि कई मायनों में ये बातचीत लगभग दिखावटी हैं और जब तक भरोसा और विश्वास बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होती, तब तक मौजूदा हालात में इन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलेगा."
ईरानी टॉप कमांडर की धमकी
शीर्स की बात इसलिए भी सच लगती है कि IRGC के टॉप कमांडर ने बृहस्पतिवार फिर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने का संकल्प लिया है और कहा है कि इसे "इतिहास की यादों से मिटाया नहीं जा सकेगा". ब्रिगेडियर-जनरल अहमद वाहिदी ने "न्याय पूरी तरह से सुनिश्चित करने और अपराधियों, खासकर बच्चों की हत्या करने वाली अमेरिकी सेना को माकूल जवाब देने" की बात कही.
सिपाह समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान के टॉप कमांडर वाहिदी ने एक बयान में कहा, "अमेरिका के अपराधी नेताओं और इस्लामिक क्रांति व रेजिस्टेंस फ्रंट के सभी दुश्मनों को यह जान लेना चाहिए कि इस दिव्य नेता की कायरतापूर्ण हत्या करके वे कभी भी... प्रतिरोध के झंडे को नीचे नहीं गिरा पाएंगे. शहीदों का बदला लेना और दोषियों को सजा देना... एक पक्की, जायज और कभी न भूलने वाली मांग बनी रहेगी."
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