संयुक्त राष्ट्र:
संयुक्त राष्ट्र की इंटरगवर्नर्मेटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) संस्था शुक्रवार को स्वीडेन में जलवायु पर मानव गतिविधि के प्रभाव और भविष्य में जलवायु परिवर्तन के तथ्य के आकलन की रिपोर्ट पेश करेगी।
आईपीसीसी के आकलन में सरकार को जलवायु संबंधित नीतियों के विकास के हर स्तर पर वैज्ञानिक आधार पेश किए जाते हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन में समझौता करते हैं।
विश्वभर के देशों की सरकारों के प्रतिनिधि और वैज्ञानिक स्टाकहोम में जलवायु परिवर्तन के साक्ष्यों एवं इसके कारण के आकलन रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए बैठक कर रहे हैं।
यह रिपोर्ट आईपीसीसी द्वारा पेश किए गए पिछले चार आकलन रिपोर्ट पर आधारित है, जो 1988 में आईपीसीसी की स्थापना के बाद जारी किया गया है।
हालिया रिपोर्ट के पहले हिस्से में जलवायु परिवर्तन के भौतिक विज्ञान के मूल सिद्धांत पर बात की गई है। अगले एक साल में आईपीसीसी दो अन्य हिस्से को जारी करेगी जो हजारों श्रेष्ठ अध्ययनों पर आधारित है।
'आईपीसीसी वर्किंग ग्रुप 1' के उपाध्यक्ष किनदाहे ने कहा, "मानव विकास आधारित जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक साक्ष्य साल दर साल मजबूत हुए हैं, जिसने जलवायु विज्ञान के कुछ क्षेत्र में अनिश्चितता और ज्ञान संबंधी अंतर रहने के बावजूद निष्क्रियता के गंभीर परिणाम पर कुछ अनिश्चितताएं पेश की हैं।"
यह रिपोर्ट 2015 तक जलवायु परिवर्तन की किसी संधि पर पहुंचने और 2020 तक इसे क्रियान्वित करने वाले देशों के आधार का काम करेगा।
इस पांचवे आकलन रिपोर्ट में 831 लेखकों और संपादकों के विचार हैं।
आईपीसीसी के आकलन में सरकार को जलवायु संबंधित नीतियों के विकास के हर स्तर पर वैज्ञानिक आधार पेश किए जाते हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन में समझौता करते हैं।
विश्वभर के देशों की सरकारों के प्रतिनिधि और वैज्ञानिक स्टाकहोम में जलवायु परिवर्तन के साक्ष्यों एवं इसके कारण के आकलन रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए बैठक कर रहे हैं।
यह रिपोर्ट आईपीसीसी द्वारा पेश किए गए पिछले चार आकलन रिपोर्ट पर आधारित है, जो 1988 में आईपीसीसी की स्थापना के बाद जारी किया गया है।
हालिया रिपोर्ट के पहले हिस्से में जलवायु परिवर्तन के भौतिक विज्ञान के मूल सिद्धांत पर बात की गई है। अगले एक साल में आईपीसीसी दो अन्य हिस्से को जारी करेगी जो हजारों श्रेष्ठ अध्ययनों पर आधारित है।
'आईपीसीसी वर्किंग ग्रुप 1' के उपाध्यक्ष किनदाहे ने कहा, "मानव विकास आधारित जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक साक्ष्य साल दर साल मजबूत हुए हैं, जिसने जलवायु विज्ञान के कुछ क्षेत्र में अनिश्चितता और ज्ञान संबंधी अंतर रहने के बावजूद निष्क्रियता के गंभीर परिणाम पर कुछ अनिश्चितताएं पेश की हैं।"
यह रिपोर्ट 2015 तक जलवायु परिवर्तन की किसी संधि पर पहुंचने और 2020 तक इसे क्रियान्वित करने वाले देशों के आधार का काम करेगा।
इस पांचवे आकलन रिपोर्ट में 831 लेखकों और संपादकों के विचार हैं।
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