
संयुक्त राष्ट्र का लोगो
मेड्रिड:
अपने देशों को छोड़कर विदेश में सशस्त्र जिहादियों के संगठनों से जुड़ने के लिए जाने वाले आतंकवादियों को रोकने के तरीकों पर बात करने के लिए सुरक्षा विशेषज्ञ और मंत्री रविवार को मेड्रिड में इकट्ठा हुए। ये लोग मेड्रिड इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय वार्ता के लिए इकट्ठा हुए हैं।
इससे पहले स्पेन सरकार ने कहा कि वह सोमवार को संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधी समिति की एक बैठक की भी अध्यक्षता करेगी। इस साल स्पेन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में है और उसने ‘देश के भीतर पैदा होने वाले’ जिहादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। उसका कहना है कि ये लोग इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट समूह के साथ मिलकर लड़ने के लिए अपने देश छोड़ रहे हैं।
वह जिहादियों को चरमपंथी बनने और ‘विदेशी आतंकी लड़ाके’ बनकर विदेश जाने से रोकने के तरीकों पर भी चर्चाओं की मेजबानी करेगा। चर्चाएं इस बात पर भी होंगी कि लौटने वाले इन लोगों पर किस तरह से अभियोग चलाया जाए और किस तरह इन्हें पुर्नवासित किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा कि इन बैठकों का उद्देश्य ‘रणनीतियां और तकनीकें तैयार करना है ताकि सदस्य देशों को विदेशी आतंकी लड़ाकों से निपटने के लिए दिशा निर्देश दिए जा सकें।’ मेड्रिड ने बयान में कहा, ऐसे लड़ाके ‘अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा दबावकारी और चिंताजनक खतरों में से एक हैं।’ इन दो दिवसीय बैठकों में 70 देशों के 200 से ज्यादा विशेषज्ञ और 30 आंतरिक एवं विदेश मंत्री या उनके सहायक हिस्सा लेंगे।
अधिकारियों का कहना है कि 25 से 31 हजार तक लड़ाके इस्लामिक स्टेट के साथ मिलकर लड़ने के लिए युद्ध क्षेत्रों की ओर रवाना हो चुके हैं। इनमें सैंकड़ों लड़ाके यूरोपीय देशों- ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और स्पेन से हैं।
इससे पहले स्पेन सरकार ने कहा कि वह सोमवार को संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधी समिति की एक बैठक की भी अध्यक्षता करेगी। इस साल स्पेन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में है और उसने ‘देश के भीतर पैदा होने वाले’ जिहादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। उसका कहना है कि ये लोग इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट समूह के साथ मिलकर लड़ने के लिए अपने देश छोड़ रहे हैं।
वह जिहादियों को चरमपंथी बनने और ‘विदेशी आतंकी लड़ाके’ बनकर विदेश जाने से रोकने के तरीकों पर भी चर्चाओं की मेजबानी करेगा। चर्चाएं इस बात पर भी होंगी कि लौटने वाले इन लोगों पर किस तरह से अभियोग चलाया जाए और किस तरह इन्हें पुर्नवासित किया जाए।
संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा कि इन बैठकों का उद्देश्य ‘रणनीतियां और तकनीकें तैयार करना है ताकि सदस्य देशों को विदेशी आतंकी लड़ाकों से निपटने के लिए दिशा निर्देश दिए जा सकें।’ मेड्रिड ने बयान में कहा, ऐसे लड़ाके ‘अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा दबावकारी और चिंताजनक खतरों में से एक हैं।’ इन दो दिवसीय बैठकों में 70 देशों के 200 से ज्यादा विशेषज्ञ और 30 आंतरिक एवं विदेश मंत्री या उनके सहायक हिस्सा लेंगे।
अधिकारियों का कहना है कि 25 से 31 हजार तक लड़ाके इस्लामिक स्टेट के साथ मिलकर लड़ने के लिए युद्ध क्षेत्रों की ओर रवाना हो चुके हैं। इनमें सैंकड़ों लड़ाके यूरोपीय देशों- ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और स्पेन से हैं।
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