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रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल पूरे- क्यों नहीं हो रहा युद्धविराम, शांति वार्ता कहां अटकी?

रूस और यूक्रेन के बीच ठीक चार साल पहले युद्ध शुरू हुआ था. इस दौरान युद्ध को खत्म करने के लिए कई दौर की शांति वार्ता भी हुई. यहां तक कि अमेरिका भी मध्यस्थ बना पर अब तक युद्धविराम नहीं हो सका है. आखिर यह चर्चा कहां अटकी हुई है और अब तक क्या हुआ?

रूस-यूक्रेन युद्ध के चार साल पूरे- क्यों नहीं हो रहा युद्धविराम, शांति वार्ता कहां अटकी?
  • रूस-यूक्रेन के बीच शांति वार्ता कई दौर में हुई, पर डोनबास-क्रीमिया जैसे विवादित मुद्दों पर सहमति नहीं बनी.
  • यूक्रेन अपनी संप्रभुता और रूस की ओर से सुरक्षा गारंटी पर जोर दे रहा है, रूस अपनी रणनीतिक मांगों पर टिक गया है.
  • आने वाले दौर में फिर कोशिशें होंगी, लेकिन युद्ध जारी रहने के कारण रास्ता कठिन है.
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रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुए आज चार साल पूरे हो गए हैं. 24 फरवरी 2022 को शुरू हुए इस युद्ध के बाद से लाखों लोग बेघर हो चुके हैं, हजारों की संख्या में लोग मारे गए हैं और वैश्विक राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ा है. इस युद्ध के बीच शांति की कोशिशें भी लगातार चल रही हैं, लेकिन अब तक कोई अंतिम समझौता या स्थायी युद्धविराम नहीं हो पाया है. इस रिपोर्ट में हम यह समझेंगे कि शांति वार्ता क्यों अटकी हुई है अब तक क्या-क्या प्रयास हुए और मुख्य कारण क्या हैं जिनके वजह से दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण समाधान नहीं मिल पा रहा. 

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शांति वार्ता कब शुरू हुई और अब तक कितने दौर हुए?

युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद ही दोनों देशों के बीच बातचीत और मध्यस्थता के प्रयास शुरू हो गए थे. 

शुरुआती दौर: रूस और यूक्रेन ने बेलारूस-यूक्रेन सीमा के पास शुरुआती बैठकें कीं, लेकिन वो सफल नहीं हो पाईं और आगे का रास्ता कठिन हो गया. युद्ध शुरू होने के कुछ ही हफ्ते बाद ये बातचीत हुई थी, लेकिन युद्ध की भयानक शुरुआत और युद्ध के नियमों पर सहमति नहीं होने से वो वार्ता सफल नहीं हुई. 

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Photo Credit: AFP

तुर्की में वार्ताः तुर्की के इस्तांबुल में एक बार फिर दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की कोशिशें हुईं, जिसमें युद्धविराम और बच्चों की रिहाई जैसे मुद्दों पर बात हुई, लेकिन यहां भी ठोस प्रगति नहीं हो सकी.

अमेरिकी मध्यस्थता में त्रिपक्षीय वार्ताः इसके बाद से अमेरिका लगातार दोनों देशों के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाता आया है. अबू धाबी में भी अमेरिकी मध्यस्थता में यूक्रेन और रूस के बीच शांति वार्ता हुई पर कोई बड़ा समझौता नहीं हो सका. 

जिनेवा वार्ता (2026): अब एक बार फिर इसी महीने जिनेवा में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता शुरू हुई. इसमें भी अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका में था. वहीं रूस और यूक्रेन की ओर से उनके प्रतिनिधि मौजूद थे. यह ऐसा दौर था जिसमें उम्मीद जताई गई कि कुछ निश्चित फैसले लिए जा सकते हैं, लेकिन बातचीत केवल कुछ ही घंटों तक चली और फिर बेनतीजा समाप्त हो गई. अब यूक्रेन की तरफ से ये कहा गया है कि इस हफ्ते फिर से बातचीत का एक दौर आयोजित हो सकता है. साथ ही कुछ कैदियों को भी छोड़े जाने की उम्मीद है.

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बातचीत कहां अटकी है? मुख्य मुद्दे क्या हैं?

जानकार इस शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के पीछे कारण  राजनीतिक, सैन्य और क्षेत्रीय मुद्दों को बताते हैं. सबसे बड़ा विवाद यह है कि कौन-सा इलाका किसका होना चाहिए. रूस चाहता है कि वह जो डोनबास और क्रीमिया को कब्जे में रखे हुए है, उसे उसकी ‘सुरक्षा जोन' के रूप में मान्यता मिले. जबकि यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगी इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं. यूक्रेन का कहना है कि अगर उसे अपने इलाकों से हाथ धोना पड़ा, तो वह अपनी संप्रभुता खो देगा. इसी कारण डोनबास जैसे विवादित इलाकों पर सहमति नहीं बन पा रही है. साथ ही यूक्रेन यह भी चाहता है कि युद्ध समाप्ति के बाद उसे सुरक्षा गारंटी भी मिले ताकि भविष्य में दोबारा कोई आक्रमण न कर सके. रूस और अन्य शक्तियां इस बात पर सहमत नहीं हैं.

सैन्य संघर्ष जारी और इसके अलावा...

इधर रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता चल रही थी और उसी दौरान दोनों पक्षों के बीच संघर्ष भी चल रहा था. जिनेवा वार्ता से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली पर बड़ी संख्या में ड्रोन हमले किए, जिससे वार्ता का माहौल और बिगड़ गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कुछ समय पहले ही एक 28 सूत्री शांति समझौता पेश किया था, जिसमें रूस की मांगों को भी शामिल करने की कोशिश की गई थी पर इसे यूक्रेन और यूरोपीय सहयोगियों ने पूरी तरह नकार दिया था.

शांति वार्ता अटकने के पीछे केवल ये ही कारण नहीं हैं. इसके पीछे कई राजनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक कारण हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बार-बार संकेत दिया है कि वे यूक्रेन को नेटो से हटाने और उसके कुछ क्षेत्रों पर नियंत्रण कायम करने पर जोर दे रहे हैं. वर्तमान स्थिति में रूस का लक्ष्य युद्ध को जितना संभव हो उतना जारी रखना और अपनी मांगों पर जोर देना है.

यूक्रेन अपने क्षेत्रीय अधिकारों को बचाने की जद्दोजहद में लगा है. पर दूसरी तरफ यूरोपीय संघ के कुछ देशों ने रूस के प्रति नरमी बरती है. जैसे- हंगरी ने रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को रोक दिया है. 

चार साल बाद भी ये युद्ध जारी है और अब तक शांति वार्ता की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. साथ ही दोनों देश एक दूसरे से लगातार संघर्ष में जुटे हैं तो अगले हफ्ते भी इस पर कोई नतीजा निकलेगा इसकी कम ही उम्मीद है.

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