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This Article is From Jan 20, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी पर ट्रंप के एक साल पूरे, दुनिया हिलाने वाले इन 10 फैसलों में देखिए रिपोर्ट कार्ड

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दूसरे कार्यकाल में एक साल पूरा हो चुका है. इस एक साल के कार्यकाल के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बड़े फैसले लिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी पर ट्रंप के एक साल पूरे, दुनिया हिलाने वाले इन 10 फैसलों में देखिए रिपोर्ट कार्ड
डोनाल्ड ट्रंप
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में एक साल पूरा हो चुका है
  • इस कार्यकाल के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैरिफ से लेकर कई बड़े फैसले किए
  • ट्रंप ने अप्रत्याशित कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को उनके घर से उठवा लिया
नई दिल्ली:

'पागलपन और महानता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. हर बार जब एक नया टारगैरियन पैदा होता है, तो देवता सिक्के को हवा में उछालते हैं और दुनिया यह देखने के लिए अपनी सांसें रोक लेती है कि सिक्का किस ओर पलटेगा.'

दुनिया के सबसे बेहतरीन टीवी सीरीज में से एक 'गेम ऑफ थ्रोन्स' में यह बात सेर बैरिस्टरन सेल्मी ने किंग जेहेरीज II टारगैरियन के लिए कही थी. 2024 में अमेरिका के लोगों ने भी एक सिक्का उछाला था. उन्हें पता था कि उन्हें कैसा राजा मिलने वाला है. इसके बावजूद ठीक एक साल पहले 20 जनवरी 2025 को जब डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठें तो उन्होंने पहले ही दिन से साबित करना शुरू कर दिया कि वो अपने फैसले लेने के अंदाज, अपने मिजाज, अपने जिद्द के मामले में किसी टारगैरियन से कम नहीं हैं. एक साल बाद ट्रंप वर्ल्ड ऑर्डर और वर्ल्ड पॉलिटिक्स में वो उथल-पुथल ला चुके हैं जिसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल था. आज कौन सा देश अमेरिका का दोस्त है और कौन दुश्मन नंबर 1, यह दुनिया भर के जियोपॉलिटिक्स एक्सपर्ट के लिए लाख टके का सवाल बना हुआ है.

चलिए इंटरनेशनल स्तर से लेकर अमेरिका के अंदर तक, पिछले एक साल के अंदर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लिए गए उन 10 फैसलों पर नजर डालते हैं जिन्होंने हंगामा मचा रखा है. 

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1- वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठाना

सबको पता था कि अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर ट्रंप तेल के खजाने वेनेजुएला में कुछ करने वाले हैं, लेकिन 3 जनवरी को जो हुआ उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. अमेरिका की सेना ने 3 जनवरी, 2026 को एक सैन्य अभियान में वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया है. उन्हें अमेरिका ले जाया गया है जहां वे ड्रग्स की तस्करी और संबंधित आरोपों का सामना कर रहे हैं. इस अमेरिकी सैन्य अभियान का कोडनेम "ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व" था. कमाल की बात है कि यह सब अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी के नाम पर किया गया लेकिन इन सैन्य अभियान के बाद ट्रंप उसकी एकदम बात नहीं कर रहे हैं. ट्रंप का कहना है कि अब अमेरिका ही वेनेजुएला को चलाएगा, उसके तेल के कुओं को मैनेज करेगा. यह सब 21वीं सदी में हो रहा है.

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2- ग्रीनलैंड पर कब्जे का ऐलान 

डेनमार्क के अर्धस्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जा करने को लेकर ट्रंप की जिद्द सनक में बदल गई है. नाटो का सबसे पावरफुल देश ही दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करना चाहता है और इसके लिए वो सैन्य हमले की सीमा तक भी जाने को तैयार है. ट्रंप का कहना है कि रूस या चीन को रोकने के लिए यह जरूरी है. भले ग्रीनलैंड और डेनमार्क ने साफ कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है, लेकिन ट्रंप ने उसे हड़पने के लिए सैन्य ताकत के प्रयोग से इनकार नहीं कर रहे हैं. ट्रंप ने उनके कब्जे का विरोध कर रहे सहयोगी देशों पर ही टैरिफ की घोषणा कर दी है जबकि नाटो के दूसरे देश ग्रीनलैंड में अपनी सेना भेज रहे हैं. ग्रीनलैंड की शांत बर्फीली जमीन आज ट्रंप की सनक से पैदा हुए तनाव से तमतमा गई है.

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3- यूक्रेन-रूस जंग न रोक पाए ट्रंप

ट्रंप ने चुनावी वादा किया था कि कुर्सी पर बैठने के 24 घंटे के अंदर रूस-यूक्रेन जंग को खत्म कर देंगे. एक साल गुजर चुका है, ट्रंप दुनिया में 8 जंग रोकने का झूठा दावा करते फिर रहे हैं लेकिन रूस-यूक्रेन जंग पर उनकी एक न चली. इस पूरे मुद्दे पर ट्रंप का एक स्टैंड नहीं रहा. वो कभी यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को व्हाइट हाउस में बुलाकर दुनिया भर के सामने सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करते रहे तो कभी पुतिन को जंगी मौतों का जिम्मेदार ठहराते रहे. कुल मिलाकर जंग जारी है और यूक्रेन में अमेरिकी हथियार बिक रहे हैं.

4- गाजा पर फ्लिप-फ्लॉप

राष्ट्रपति की कुर्सी संभाले अभी एक महीने ही हुए थे कि फरवरी 2025 में ट्रंप ने सीधा कहा था कि अमेरिका गाजा पर कब्जा करेगा. UN ने इस प्रस्ताव की निंदा की और इसे “जातीय सफाए” जैसा बताया. बाद में उन्होंने इस बात से धीरे-धीरे पीछे हटना शुरू किया. आगे अक्टूबर में गाजा में एक कमजोर संघर्षविराम (सीजफायर) शुरू करने के लिए ट्रंप ने एक और योजना दी. इसमें कहा गया कि गाजा को अस्थायी रूप से एक “बोर्ड ऑफ पीस” चलाएगा, जिसके अध्यक्ष खुद ट्रंप होंगे. अब इस  “बोर्ड ऑफ पीस” की घोषणा हो चुकी है और इसमें परमानेंट मेंबर बनने के लिए देशों से 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) मांग रहे हैं.

5- कम से कम 7 देशों पर हमला

अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल के दौरान, राष्ट्रपति ट्रंप ने कम से कम सात देशों: ईरान, इराक, नाइजीरिया, सोमालिया, सीरिया, वेनेजुएला और यमन में सैन्य हमले का आदेश दिया. ऐसा लग रहा है कि ट्रंप ने अमेरिका के लिए नया सिद्धांत दिया है- "बम फर्स्ट". उनके कार्यकाल के पहले पांच महीनों में ही 529 से अधिक हवाई हमले दर्ज किए गए थे. इसमें ईरान के 3 परमाणु ठिकानों पर भी हमला शामिल था.

6- "शांतिदूत" का झूठा दावा

बस मैडमैन की तरह हमलों और दबाव से अपनी बात मनवाने वाले ट्रंप इन एक सालों में खुद को शांतिदूत बताने से नहीं चूके. कार्यालय में अपने पहले वर्ष के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने आठ जंगों को समाप्त करने का दावा किया. इसमें भारत-पाकिस्तान संघर्ष को भी खत्म करवाने का झूठा दावा भी शामिल था. भारत ने बार-बार ट्रंप को इस बात पर आईना दिखाया है. भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ किसी मुद्दे पर सीधी बातचीत होती आई है और सीजफायर समझौते के मामले में भी वैसा ही है. ट्रंप पर शांतिदूत बनने और दिखने की ऐसी सनक छाई रही कि उन्होंने शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए धमकी से लेकर गिड़गिड़ाने तक, हर हथकंड़ा अपनाया. आखिर में नहीं मिला तो विजेता (वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो) से खुद को दिलवा भी लिया. हालांकि नॉर्वे की नोबेल समिति का कहना है कि एक बार पुरस्कार की घोषणा होने के बाद इसे न तो बदला जा सकता है और न ही किसी और के नाम किया जा सकता है. भले ही मेडल अपना मालिक बदल ले.

7- व्यापार को हथियार बनाया

ट्रंप ने इस एक साल में टैरिफ को अपनी विदेश नीति को जबरदस्ती लागू करने के टूल के रूप में उपयोग किया. क्या सहयोगी देश और क्या विरोधी देश, उन्होंने समान रूप से इससे सबको अपने टारगेट पर लिया. रूसी तेल की खरीद के जवाब में भारत से होने वाले आयात पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया और कुछ भारतीय निर्यातों पर 500% टैरिफ का प्रस्ताव करने वाले विधेयक का समर्थन किया है. डेनमार्क पर ग्रीनलैंड को अमेरिका को बेचने के लिए दबाव डालने के लिए डेनमार्क, फ्रांस और जर्मनी सहित कई यूरोपीय सहयोगियों पर 25% टैरिफ की धमकी दी गई है. ट्रंप के इस फैसले ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है.

8- तमाम अंतर्राष्ट्रीय समझौते और गठबंधनों से निकलना

ट्रंप ने "अमेरिका फर्स्ट" के बैनर तले अमेरिका को तमाम अंतर्राष्ट्रीय समझौते और गठबंधनों से बाहर निकाल लिया है. अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन अमेरिका को पेरिस समझौते और विश्व स्वास्थ्य संगठन से फिर से अलग कर लिया. नाटो के अपने यूरोपीय सहयोगियों की अक्सर आलोचना की है और बार-बार चेतावनी दी है कि यदि वे खर्च लक्ष्य पूरा नहीं करते हैं तो अमेरिका नाटो के आर्टिकल 5 के तहत आपसी रक्षा प्रतिबद्धताओं का सम्मान नहीं करेगा. ट्रंप ने अमेरिका के वैश्विक फंडिंग में उल्लेखनीय रूप से कमी ला दी है, जिसमें USAID का बड़ा हिस्सा खत्म करना भी शामिल है.

9- 33 साल बाद न्यूक्लियर टेस्ट की बात

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि रूस, चीन और पाकिस्तान सहित कई देश छिपाकर अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट कर रहे हैं और अब अमेरिका भी ठीक ऐसा ही करेगा. 2 नवंबर को जारी एक इंटरव्यू में ट्रंप ने CBS के एक प्रोग्राम में कहा था, "रूस टेस्ट कर रहा है, और चीन टेस्ट कर रहा है, लेकिन वे इसके बारे में बात नहीं करते हैं." उन्होंने कहा, ''मैं एकमात्र ऐसा देश नहीं बनना चाहता जो टेस्ट नहीं करता है.''  अगर ट्रंप ने ब्लास्ट करने का आदेश दिया है तो इसका मतलब होगा कि 1992 के बाद अमेरिका पहली बार न्यूक्लियर विस्फोट करेगा.

10- अमेरिका के अंदर उथल-पुथल

a) ट्रंप प्रशासन ने संघीय DEI (diversity, equity, inclusion) कार्यक्रमों को समाप्त करने का कार्यकारी आदेश जारी किया. अब सरकारी नौकरियों में भर्ती और प्रमोशन के लिए किसी की जाति, लिंग या पृष्ठभूमि को आधार नहीं बनाया जाएगा. ट्रंप सरकार का कहना है कि अब केवल योग्यता और टैलेंट के आधार पर ही चुनाव होगा.

b) ट्रंप ने संघीय सरकार के पैसपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में केवल जन्म के समय का लिंग (मेल या फीमेल) मान्यता देने का नियम लागू किया.

c) ट्रंप ने बड़े पैमाने पर प्रवासन नियंत्रण और अवैध प्रवास पर कठोर क्रैकडाउन नीतियां अपनाईं, जिससे आलोचना हुई है. उनके एजेंट अमेरिका के सड़कों पर भी अमेरिकी जनता अवैध प्रवासी होने के संदेह में गोली मार रहे हैं. ट्रंप ने अपनी कठोर घरेलू नीतियों को लागू करने के लिए अमेरिकी जमीन पर ही सैनिकों को उतार दिया है. ट्रंप ने राष्ट्रीय आपातकाल और संघीय सरकार के अधिकारों का विस्तृत उपयोग करने की धमकी दी है.

d) डोनाल्ड ट्रंप ने हार्वर्ड, कोलंबिया और अन्य बड़ी यूनिवर्सिटियों पर यह आरोप लगाकर कार्रवाई की धमकी दी कि वे “वामपंथी विचारधारा और यहूदी-विरोध” को बढ़ावा दे रही हैं. ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी कैंपस में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों को “राष्ट्र-विरोधी” बताकर कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर विवाद हुआ. उनके प्रशासन ने विदेशी छात्रों और प्रोफेसरों के वीजा नियम सख्त किए, जिससे अमेरिकी रिसर्च और उच्च शिक्षा को नुकसान की आशंका जताई गई.

e) उनके प्रशासन ने FDA और अन्य स्वास्थ्य निगरानी कर्मियों में बड़े कटौती निर्णय लिए, जिससे खाद्य सुरक्षा पर चेतावनी उठी है.

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