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ग्रीनलैंड, नाटो, यूरोप, रूस... दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की 10 सबसे बड़ी बातें

दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं. ये संबोधन ऐसे समय हो रहा है, जब ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के तेवरों का कई यूरोपीय देश खुलकर विरोध कर चुके हैं.

ग्रीनलैंड, नाटो, यूरोप, रूस... दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की 10 सबसे बड़ी बातें

स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच के सालाना सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत अपने कार्यकाल की उपलब्धियों से की. उसके बाद ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क और यूरोपीय देशों को सुनाया. उन्होंने कहा कि हमने ही ग्रीनलैंड को डेनमार्क को वापस दिलाया था, हम कितने बेवकूफ थे. उन्होंने साफ कर दिया कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए ताकत का इस्तेमाल नहीं करेंगे.

ट्रंप ने यूरोप को जमकर सुनाया

इसके बाद उन्होंने यूरोप को सुनाना शुरू किया और कहा कि मैं यूरोप को प्यार करता हूं, लेकिन वो सही दिशा में नहीं जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यूरोप में कुछ जगहें अब पहचानने लायक नहीं रह गई हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मामले पर अब किसी बहस या विवाद की गुंजाइश नहीं है.

ग्रीनलैंड को हमारे अलावा कोई नहीं बचा सकता 

अमेरिका ने ग्रीनलैंड का जिक्र करते हुए कहा कि मैं ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों की बहुत इज्जत करता हूं. उन्होंने ग्रीनलैंड को खतरे में बताते हुए कहा कि अपनी सीमाओं को बचाना नाटो के हर देश का दायित्व है. लेकिन यह भी सच्चाई है कि अमेरिका के अलावा कोई भी ग्रीनलैंड को नहीं बचा सकता. चाहे कोई देश अकेला आए या फिर साथ मिलकर, वो ग्रीनलैंड को नहीं बचा पाएंगे. लोग जितना समझते हैं, हम उससे भी बड़ी ताकत हैं.

द्वितीय विश्व युद्ध का वाकया याद दिलाया

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में डेनमार्क जर्मनी के हाथों चला गया था. छह घंटे के युद्ध के बाद भी वह न तो खुद अपने को बचा पा रहा था और न ही ग्रीनलैंड को. तब अमेरिका आगे आया और ग्रीनलैंड को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी. ये बात डेनमार्क भी जानता है. 

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हम कितने बेवकूफ थे... ग्रीनलैंड पर बोले ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि हम डेनमार्क को बचाने की कोशिश करते आए हैं. हमने डेनमार्क के लिए ग्रीनलैंड में अपने मिलिट्री बेस बनाए हैं. हमने दुश्मनों को अपने गोलार्ध में पैर जमाने से रोका है. युद्ध जीतने के बाद हमने जर्मनी और जापान से बात की और ग्रीनलैंड को वापस डेनमार्क को दिलाया. हम कितने बेवकूफ थे. उन्हें तो हमारा आभारी होना चाहिए था. 

मैं बेकाबू नहीं होना चाहताः ट्रंप 

दावोस में ट्रंप ने कहा कि हम कभी किसी से कुछ नहीं मांगते हैं और न ही हमें कभी कुछ मिला है. अगर मैं अत्यधिक शक्ति और बल का इस्तेमाल न करूं तो शायद हमें कुछ मिले भी नहीं. लेकिन ताकत का इस्तेमाल करते हुए मैं बेकाबू नहीं होना चाहता. मैं ऐसा नहीं करूंगा.

'ग्रीनलैंड पर ताकत का इस्तेमाल नहीं करूंगा'

ट्रंप ने आगे कहा कि लोग सोचते हैं मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा. मैं ऐसा नहीं करूंगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका सिर्फ ग्रीनलैंड मांग रहा है जो ट्रस्टी होने के नाते हमारा है. हमने द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी, जापान, इटली को हराकर उसे डेनमार्क को वापस दिलाया था. अब अमेरिका सिर्फ उसी जगह को सम्मानपूर्वक वापस मांग रहा है.

नाटो ने हमारे साथ ठीक बर्ताव नहीं किया

ट्र्ंप ने नाटो देशों को भी खूब सुनाया. उन्होंने कहा कि मैंने पिछली बाइडेन सरकार से कहीं ज्यादा नाटो के लिए किया है. हमने उसे बहुत कुछ दिया है, बदले में बहुत ही मामूली मिला है. लेकिन वह हमारे साथ ठीक बर्ताव नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड पर कंट्रोल से नाटो को कोई खतरा नहीं है. इससे संगठन की सुरक्षा ही बढ़ेगी. उन्होंने साफ किया कि ग्रीनलैंड को वह ताकत के दम पर हासिल नहीं करेंगे. 

अमेरिका दुनिया का आर्थिक इंजन

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था इतिहास के सबसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी है.अब हम दुनिया के सबसे कठोर देश बन चुके हैं. हम दुनिया के आर्थिक इंजन हैं. अगर हम बुरी स्थिति में पहुंचे तो दुनिया की व्यवस्था भी बिगड़ जाएगी.  उन्होंने कहा कि हमने ऐतिहासिक ट्रेड डील की हैं. यूरोपीय नेशन, जापान, साउथ कोरिया हमारे साझेदार हैं. तेल और गैस में हमने बड़े सौदे किए हैं. जो भी देश हमसे डील कर रहे हैं, वहां मार्केट ऊपर जा रहा है.

वेनेजुएला का जिक्र कर क्या बोले

उन्होंने वेनेजुएला का जिक्र करते हुए कहा कि वह 20 साल पहले बहुत महान देश हुआ करता था, लेकिन उसके बाद से उसकी हालत खराब होती चली गई. उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में अमेरिकी अटैक निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के साथ खत्म हो चुका है और उसके बाद वेनेजुएला ने अमेरिका के साथ एक डील ऑफर की है. ट्रंप का कहना था कि दुनिया की हर बड़ी तेल कंपनी अब अमेरिका आ रही है. 

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