- 20 वर्षीय युवती केजीएम ने मेटा और गूगल पर मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए केस दायर किया है
- मुकदमे का नतीजा अन्य यूजर्स के नुकसान के दावों के खिलाफ टेक कंपनियों के कानूनी बचाव को प्रभावित कर सकता है
- कैलिफोर्निया में मेटा, गूगल, टिकटॉक और स्नैप के खिलाफ हजारों समान मुकदमे पहले से ही लंबित हैं
अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य की अदालत में सोमवार को एक मामले की सुनवाई शुरू हो रही है, जिसमें यह तय किया जाना है कि क्या इंस्टाग्राम और यूट्यूब ने अपने एडिक्टिव ऐप डिजाइन के जरिए एक युवती के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया है. इस सुनवाई में यह देखा जाएगा कि क्या बड़ी टेक कंपनियां बच्चों को नुकसान पहुंचाने के लिए उत्तरदायी ठहराई जा सकती हैं.
कौन है युवती
रायटर्स के अनुसार, 20 वर्षीय युवती, जिसकी पहचान केजीएम के रूप में हुई है, ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स और अल्फाबेट की गूगल (जो यूट्यूब की मालिक है) के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार, युवती का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स के आकर्षक डिजाइन ने उसे कम उम्र में ही इनकी लत लगा दी. उसका आरोप है कि इन ऐप्स ने उसके डिप्रेशन और सुसाइड के विचारों को बढ़ावा दिया और वह कंपनियों को इसके लिए उत्तरदायी ठहराना चाहती है.
बढ़ जाएंगे मुकदमे
टेक कंपनियों के खिलाफ फैसला आने से राज्य अदालतों में इसी तरह के मामलों का रास्ता खुल सकता है और यूजर्स को हुए नुकसान के दावों के खिलाफ उद्योग के लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी कानूनी बचाव को झटका लग सकता है. गूगल, मेटा, टिकटॉक और स्नैप को कैलिफोर्निया में हजारों मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है.
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2300 से अधिक मुकदमे
राज्य अदालत में केजीएम जैसे मामलों के अलावा, कंपनियों को संघीय अदालत में अभिभावकों, स्कूल जिलों और राज्य के अटॉर्नी जनरलों द्वारा दायर 2,300 से अधिक इसी तरह के मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है. इन मुकदमों की देखरेख कर रहे न्यायाधीश संघीय अदालत में दावों पर पहले मुकदमे से पहले कंपनियों की जवाबदेही सुरक्षा का मूल्यांकन कर रहे हैं, जो जून की शुरुआत में हो सकता है.
मेटा प्लेटफॉर्म्स के सीईओ मार्क जकरबर्ग को मुकदमे में गवाह के तौर पर बुलाए जाने की उम्मीद है, जो मार्च तक चलने की संभावना है. टिकटॉक और स्नैप ने मुकदमे से पहले ही केजीएम के साथ समझौता कर लिया था.
वकील ये प्रूव करेंगे
युवती के वकीलों का लक्ष्य यह साबित करना है कि कंपनियों ने ऐप्स के डिजाइन में लापरवाही बरती, उन्होंने जनता को जोखिमों के बारे में चेतावनी नहीं दी और प्लेटफॉर्म उनके क्लाइंट के नुकसान का एक महत्वपूर्ण कारण थे. यदि वे सफल होते हैं, तो जूरी इस बात पर विचार करेगी कि क्या उन्हें दर्द और पीड़ा के लिए मुआवजा दिया जाए, और दंडात्मक हर्जाना भी लगाया जा सकता है.
मेटा और गूगल, केजीएम के जीवन के अन्य पहलुओं का हवाला देकर, युवा सुरक्षा पर अपने कार्यों को सामने रखकर और हानिकारक सामग्री अपलोड करने वाले यूजर्स से खुद को अलग करके इन दावों से अपना बचाव करने की योजना बना रहे हैं.
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