- अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल 15 दिनों का सीजफायर जारी है, जिसे दो सप्ताह और बढ़ाने पर विचार चल रहा है
- अमेरिका ने ईरान के साथ बातचीत शुरू करने से पहले दो शर्तें रखी हैं, जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना शामिल है
- दूसरी शर्त के तहत ईरान की वार्ता टीम को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से पूरा अधिकार मिलना चाहिए
अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल 15 दिनों का सीजफायर जारी है. सीजफायर के दौरान दोनों ही पक्ष शांति वार्ता करने और किसी समाधान तक पहुंचने की कोशिशों में जुटे हैं. हालांकि, बीते दिनों इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता में दोनों ही पक्ष किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाए थे.अब खबर आ रही है कि अमेरिका और ईरान पक्ष इस सीजफायर को अगले दो सप्ताह तक बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. ब्लूमबर्ग की खबर के अनुसार दोनों ही पक्ष चाहते हैं कि उन्हें शांति वार्ता के लिए कुछ और समय मिले. यही वजह है कि मौजूदा सीजफायर को दो सप्ताह के लिए आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.
इससे पहले खबर आ रही थी कि अमेरिका ने ईरान के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने से पहले दो नई शर्तें रखी हैं. यह दावा इजरायली अखबार ने अपनी एक रिपोर्ट में किया था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि तेहरान के साथ बातचीत का नया दौर दो दिनों के अंदर फिर शुरू हो सकता है. उन्होंने साफ-साफ संकेत दिया है दूसरे दौर की वार्ता भी पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होगी.
रिपोर्ट में कहा गया था कि अमेरिका “जैसा को तैसा” की नीति पर टिका हुआ है. यानी अगर ईरान होर्मुज से जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही रोकता है, तो उसके अपने जहाजों और टैंकरों को भी वहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा. जबकि दूसरी ये कि अमेरिका की दूसरी शर्त है कि ईरान की जो भी टीम बातचीत के मेज पर आए, उसको इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से पूरा अधिकार मिलना चाहिए ताकि वे किसी भी समझौते को अंतिम रूप दे सकें. अमेरिका चाहता है कि इस्लामाबाद में जो भी सहमति बने, उसे ईरान के सभी बड़े अधिकारी मंजूरी दें.
हम दुनिया के लिए होर्मुज खोल रहे हैं
अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बुधवार को एक बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा कि मैं चीन और दुनिया के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को हमेशा के लिए खोल रहा हूं. उन्होंने आगे लिखा कि मैं यह उनके लिए भी कर रहा हूं और पूरी दुनिया के लिए भी. ऐसी स्थिति दोबारा कभी नहीं आएगी. उन्होंने इस बात पर सहमति जताई है कि वे ईरान को हथियार नहीं भेजेंगे. जब मैं कुछ हफ़्तों में वहां पहुंचूंगा, तो राष्ट्रपति शी मुझे गले लगाकर बहुत प्यार से मिलेंगे. हम मिलकर बहुत समझदारी से और बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं! क्या यह लड़ाई-झगड़े से कहीं बेहतर नहीं है??? लेकिन याद रखना, अगर ज़रूरत पड़ी तो हम लड़ने में भी बहुत माहिर हैं - किसी भी और से कहीं ज़्यादा बेहतर!
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