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कोरियन कल्चर के ट्रेंड में मुस्लिम देश सबसे ऊपर, आखिर क्या है वजह?

भारत के बाहर मुस्लिम देशों यूएई, मिस्र, तुर्की और इंडोनेशिया में कोरियन कल्चर जबरदस्त तरीके से छाया हुआ है. क्या है वजह? क्या के-पॉप, के-ड्रामा और कोरियन लाइफस्टाइल इन मुस्लिम देशों के युवाओं की पसंद और रोजमर्रा की जिंदगी भी बदल रहे हैं?

कोरियन कल्चर के ट्रेंड में मुस्लिम देश सबसे ऊपर, आखिर क्या है वजह?
  • कोरियन कल्चर का ट्रेंड दक्षिण एशिया के देशों में सबसे अधिक भारत में छाया हुआ है.
  • हालांकि इसकी गहरी छाप मुस्लिम देशों यूएई, मिस्र, तुर्की और इंडोनेशिया में अधिक है.
  • मुस्लिम देशों में सरकारें इसे सॉफ्ट पावर एक्सचेंज मानती हैं.
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन बहनों की आत्महत्या और मोबाइल पर कोरियन कल्चर की ओर उनके झुकाव ने एक बार फिर भारत में इसे लेकर बहस छेड़ दी. कुछ हलकों में के-पॉप और के-ड्रामा को लेकर आपत्तियां उठीं. कहीं इसे पश्चिमी प्रभाव कहा गया तो कहीं इसे संस्कृति के लिए खतरा बताया गया. लेकिन जहां कोरियन कल्चर का ट्रेंड दक्षिण एशिया के देशों में सबसे अधिक भारत में छाया हुआ है, वहीं यह जानकर हैरानी होगी कि इसकी गहरी छाप मुस्लिम देशों में अधिक है. इस मामले में सबसे ऊपर यूएई है तो मिस्र, तुर्की और इंडोनेशिया भी इस मामले में टॉप-5 में बने हुए हैं.

दक्षिण कोरिया का संस्कृति, खेल एवं पर्यटन मंत्रालय 2018 से विदेशों में अपने देश की छवि को लेकर सर्वे करता आया है. उसके ताजा आंकड़े बताते हैं कि विदेशों में कोरियन इमेज पिछले 8 सालों के अपने उच्चतम स्तर पर है. मंत्रालय ने बताया कि यह सर्वे अक्टूबर 2025 के दौरान 26 देशों में 13 हजार लोगों पर किया गया. 2025 में किए गए इस सर्वे के मुताबिक 82.3 प्रतिशत लोगों ने कोरिया के बारे में अपनी सकारात्मक राय रखी. यह 2024 की तुलना में  3.3 प्रतिशत अंकों की वृद्धि है. साथ ही अब तक के सर्वे के इतिहास में दर्ज किया गया यह सबसे बड़ा आंकड़ा भी है.

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मुस्लिम देशों में कोरियन वेव

इस सर्वे में जिन शीर्ष 10 देशों में दक्षिण कोरियाई कल्चर का क्रेज (कोरियन वेव या Hallyu) सबसे अधिक बताया गया है उनमें मुस्लिम देशों की संख्या अधिक है. हैरानी की बात यह है कि नंबर एक पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) आता है जहां 94.8 प्रतिशत लोगों ने दक्षिण कोरिया के बारे में सकारात्मक राय रखी. वहीं टॉप-10 मुस्लिम देशों में मिस्र (94%), तुर्की (90.2%) और इंडोनेशिया (%) शामिल हैं. फिलीपींस (91.4%), भारत (89%) और दक्षिण अफ्रीका (88.8%) भी शीर्ष 10 देशों में शामिल हैं.

कोरियाई मंत्रालय का कहना है कि जिन देशों में उसकी लोकप्रियता बढ़ रही है उनके साथ बढ़ते संबंध इसकी एक बड़ी वजह हैं. हालांकि इस सब के बावजूद यह एक चौंकाने वाला तथ्य है कि कोरियाई ऑब्सेशन यूएई, मिस्र, तुर्की और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देशों में बढ़ ही नहीं रहा बल्कि कोरिया के प्रति लगाव के मामले में ये भारत से भी ऊपर हैं. 

तो जब एक तरफ हम ये देखते हैं कि भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से विविध देश में कोरियन संस्कृति इतनी गहरी पैठ बना चुकी है, तो मुस्लिम देशों में यह ट्रेंड कैसे और क्यों इतना लोकप्रिय हो रहा है?

सबसे पहले तो ये बता दें कि कोरियाई संस्कृति की बढ़ती लोकप्रियता इसके के-ड्रामा (कोरियाई ड्रामा), और के-पॉप की वजह से है. इन देशों में इन्हें देखने और फॉलो करने वाले युवाओं, महिलाओं की संख्या बहुत अधिक है.

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मुस्लिम देशों में कोरियन कल्चर क्यों पनपा?

जानकारों के मुताबिक मुस्लिम देशों में कोरियन ड्रामा और के-पॉप की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है इसके कंटेंट का कम सेक्सुअलाइज्ड होना है. साथ ही यह पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों की भावनात्मकता को पर्दे पर बखूबी उतारता है. इसे बहुत हद तक क्लीन इंटरटेनमेंट कंटेंट के तौर पर देखा जा सकता है. 

जहां एक तरफ हॉलीवुड और कई पश्चिमी शो खुले यौन कंटेंट, ड्रग्स और हिंसा पर आधारित होते हैं, वहीं के-ड्रामा में रिश्तों को अमूमन भावनात्मक तरीके से दिखाया जाता है. ये परिवार, त्याग, सम्मान और जीवन के संघर्ष जैसे मूल्यों पर टिके होते हैं और इनमें रोमांस को अधिकतर इशारों और भावनाओं से दर्शाया जाता है.

संभवतः यही वो वजह है जो इसे यूएई, मिस्र, तुर्की और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम देशों में पॉपुलर बना रहा है क्योंकि यह न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक रूप से भी स्वीकार्य है क्योंकि परिवार इसे बच्चों के साथ देखने में खुद को सहज पाता है.

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क्यों बढ़ रहा कोरियाई लगाव?

जानकार बताते हैं कि कोरियाई कल्चर के प्रति दुनिया भर में बढ़ता लगाव पिछले कुछ सालों में नहीं हुआ है बल्कि यह पिछले दो दशकों में कोरियाई म्युजिक और वहां की फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सफलता की वजह से भी है. इसकी शुरुआत 2009 में अमेरिकी म्युजिक चार्ट पर के-पॉप ग्रुप वंडर गर्ल्स के हिट गाने 'नोबडी' के आने से हुई थी.

उसके बाद से ही दक्षिण कोरियाई म्युजिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय होना शुरू हुई. वहीं  2019 में कोरियाई फिल्म पैरासाइट का गैर-अंग्रेजी फिल्म की कैटेगरी में ऑस्कर जीतना उसके फिल्मों की लोकप्रियता को और बढ़ा गया. बॉय बैंड बीटीएस इतना लोकप्रिय हो गया कि उसने ग्रैमी अवार्ड 2021 में अपने ही गानों पर परफॉर्म किया.

के-पॉप की लोकप्रियता की एक वजह यह भी है कि यह आज की दुनिया के अहम मुद्दों से भी जुड़े होते हैं. इनमें लव, ब्रेकअप के अलावा डिप्रेशन, सफलता, असफलता, फैमिली और रिजेक्शन जैसे मुद्दों को भी कवर किया जाता है.

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यूएईः मॉडर्न सोसाइटी और कोरियन वेव

यूएई आज मुस्लिम दुनिया का सबसे ग्लोबल और मॉडर्न चेहरा है. यहां कोरियन कल्चर का असर तीन स्तरों पर दिखता है.

पहला, दुबई और अबू धाबी जैसे ग्लोबल सिटी में के-पॉप केवल म्युजिक तक ही सीमित नहीं है. यह युवाओं के पहनावे, हेयरस्टाइल, सोशल मीडिया की भाषा और फैन कल्चर में रच-बस गया है. 

दूसरा, कोरियाई फूड और लाइफस्टाइल- किमची, रेमन, बिबिम्बप यूएई के मॉल्स और फूड कोर्ट्स में आम हैं. हलाल फ्रेंडली कोरियन फूड ने इस ट्रेंड को लोगों के बीच और पॉपुलर बना दिया है. 

तीसरा, दक्षिण कोरिया के सॉफ्ट पावर होने की वजह से इन देशों में स्वीकार्यता बढ़ी है. यूएई की सरकार कोरियाई कल्चर को कल्चरल एक्सचेंज के रूप में देखती है. उसे अपने लिए कहीं से भी खतरा नहीं मानती. लिहाजा के-पॉप के कंसर्ट, वर्कशॉप्स और फेस्टिवल के आयोजन को वहां खुला मंच मिला हुआ है. यही वजह है कि आज कोरियाई टीवी सीरीज और फिल्में यूएई के स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (ओटीटी) पर टॉप रैंप पर रहती हैं. 

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मिस्र: रूढ़िवादी समाज और भावनात्मक विद्रोह

मिस्र में कोरियन ड्रामा खासकर महिलाओं और छात्राओं के बीच बेहद लोकप्रिय है. जानकार इसकी एक बड़ी वजह वहां की सोसाइटी का कंजर्वेटिव यानी रूढ़िवादी होना बताते हैं. के-ड्रामा में दिखाई जाने वाली महिलाएं अमूमन मजबूत शख्सियत वाली होती हैं. पर्दे पर दिखाया जाता है कि महिलाओं के साथ पुरुष किरदार सम्मानजनक तरीके से पेश आते हैं.

मिस्र में बढ़ती कोरियाई लोकप्रियता के बारे में जानकार बताते हैं कि यह आकर्षण उसे (कोरिया को) ऐसी जगह के तौर पर पेश करना है जो बहुत मॉडर्न और टेक्नोलॉजी में काफी आगे होने के बाद भी सांस्कृतिक रूप से भी आगे है, साथ ही इसे एक साफ-सुथरी छवि रखने वाले समाज के तौर पर भी पेश किया जाता है. 

इजिप्ट कोरियन कल्चर सेंटर की एक लेक्चरर ने अपने सोशल पोस्ट में बताया कि एक दशक पहले वहां आने वाले स्टूडेंट उनसे दक्षिण कोरिया के बारे में पूछते थे, यह भी पूछते थे कि वो कहां है. पर आज वो यह पूछते हैं कि वहां कैसे जाया जा सकता है, वहां की भाषा कैसे सीख सकते हैं, तो निश्चित रूप से उनकी दिलचस्पी कोरियाई कल्चर में बढ़ी है.

यहां तक कि मिस्र के छात्रों के बीच कोरियाई भाषा सीखने वालों की संख्या भी पिछले कुछ सालों के दौरान बढ़ने लगी है. इजिप्ट कोरियन कल्चर सेंटर के मुताबिक यह वहां बढ़ती कोरियाई क्रेज (हलायु) के कारण है. हलायु का मतलब कोरियाई म्युजिक, ड्रामा और फिल्मों से लोगों के बीच कोरियाई कल्चर के प्रति बढ़ते लगाव से है. मिस्र के टेलीविजन पर कोरियाई ड्रामा आज आसानी से देखे जा सकते हैं.

बीटीएस म्युजिक पूरी दुनिया में लोकप्रिय है पर इसने कोरियाई भाषा और वहां की संस्कृति के लोगों में एक आकर्षण भी बनाया है. साथ ही दक्षिण कोरिया की आर्थिक रूप से समृद्धि और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उसकी सफलता ने भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस देश के प्रति लोगों के लगाव में वृद्धि की है.

तुर्की: इस्लाम और आधुनिकता के बीच कोरियाई पुल

बात अगर तुर्की की करें तो यह देश अपने मजबूत टीवी ड्रामा, रोमांटिक नैरेटिव और परिवार से जुड़ी कहानियों पर आधारित ड्रामा के लिए पहले ही प्रसिद्ध रहा है. फिर भी कोरियाई कंटेंट ने यहां अपनी जबरदस्त पैठ बनाई है तो इसके पीछे इसका अधिक ग्लोबल और डिजिटल फ्रेंडली होना बताया जाता है.

इसे युवा कूल कंटेंट के तौर पर आसानी से फॉलो करने लगते हैं. वहां के युवा के-पॉप को एक नई पहचान के रूप में अपना रहे हैं. यह वहां एक स्टाइल लैंग्वेज बन रहा है. यही वजह है कि तुर्की में कोरियन ड्रामा के रीमेक भी बन रहे हैं. तुर्की के युवाओं के बीच बीटीएस बहुत लोकप्रिय हैं, यहां तक कि बड़ी संख्या में वहां के युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पॉप की बातें करने वालों में शुमार हैं.

तुर्की के युवा वर्ग में कोरियाई भाषा सीखने की प्रवृति भी बढ़ रही है. किंग सेजॉन्ग इंस्टीट्यूट जैसे कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र विभिन्न शहरों में वहां की भाषा और संस्कृति सिखाने में सहयोग करती है. इसके साथ ही दोनों देश सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दे रहे हैं, इससे मनोरंजन के साथ-साथ कला और शिक्षा के क्षेत्र में भी कोरियाई-तुर्की कनेक्शन मजबूत बन रहे हैं.

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इंडोनेशियाः इस्लाम के आदर्शों के साथ कोरियाई सौंदर्य का मेल

यह माना जाता है कि दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में के-ड्रामा की लोकप्रियता कोरियन कल्चर के इस्लाम से टकराव नहीं होने की वजह से है. बल्कि पारिवारिक सम्मान, सामाजिक अनुशासन, मेहनत, संघर्ष और सामूहिकता जैसी चीजें इसे अन्य धार्मिक कल्चर के समान ही बताती हैं. ये सभी कोरियाई ही नहीं, मुस्लिम समाज की संस्कृतियों में मौजूद तत्व हैं. लिहाजा हिजाब पहनने वाली के-पॉप की फैन भी हैं और कोरियाई भाषा सीखने वाले मुस्लिम संस्कृति के मुताबिक अपनी भाषा के जानकार भी हैं. 

जब शुरू शुरू में कोरियाई कल्चर मुस्लिम देशों में अपनी पैठ बनाने लगा तो इनमें से कुछ मुस्लिम देशों में इसका यह कहते चिंता भी जताई गई कि क्या के-पॉप हमारी संस्कृति को बदल देगा? पर सच्चाई तो यह है कि आज के युवा इसे पूरी तरह नहीं अपनाते बल्कि वो इसके चुनिंदा हिस्सों को ही आजमाते हैं, जैसे- म्युजिक, फैशन, ड्रामा की कहानी. इसका उनके धर्म या आस्था या परिवार पर सीधा असर नहीं पड़ता. कुल मिलाकर मुस्लिम देश इसे सॉफ्ट पावर एक्चेंज मानते हैं.

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