करोड़ों साल पहले धरती पर खौफ का दूसरा नाम रहे टायरेनोसौरस रेक्स यानी टी-रेक्स अंदर से बिल्कुल हमारी और आपकी तरह थे. वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने इतिहास की किताबों को पलट कर रख दिया है. अब तक हम जिसे एक ठंडी, सुस्त छिपकली जैसा समझते थे, वो असल में हमारी तरह ही गर्म खून वाला यानी warm-blooded जीव था. इतना ही नहीं, उसके शरीर का तापमान भी लगभग ह्यूमन बॉडी जितना ही होता था.
साल 2022 में जब अलास्का की कड़कड़ाती ठंड वाले इलाके में टी-रेक्स के पैरों के निशान मिले, तब वैज्ञानिकों का माथा ठनका. आखिर हाड़ कंपा देने वाली ऐसी ठंड में कोई छिपकली या मगरमच्छ जैसा ठंडे खून वाला जीव कैसे जिंदा रह सकता है? क्योंकि ठंडे खून वाले जीवों को तो एक्टिव होने के लिए धूप और गर्मी की जरूरत होती है.
अब वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि टी-रेक्स के शरीर का तापमान करीब 97 डिग्री फारेनहाइट (यानी 36 डिग्री सेल्सियस) रहता था. यह तापमान लगभग उतना ही है, जितना हम इंसानों का होता है.
दांतों में छिपा था 6.6 करोड़ साल पुराना थर्मामीटर
अब आप सोचेंगे कि जो जीव करोड़ों साल पहले खत्म हो चुका है, उसके शरीर का तापमान भला आज कैसे नापा गया? वैज्ञानिकों ने इसके लिए गजब की तरकीब निकाली. उन्होंने टी-रेक्स के दांतों को 'प्रागैतिहासिक थर्मामीटर' की तरह इस्तेमाल किया.
लॉस एंजिल्स के म्यूजियम में मौजूद 'थॉमस' नाम के टी-रेक्स के दांतों के बेहद छोटे टुकड़ों का केमिकल टेस्ट किया गया. दांतों के इनेमल के अंदर कार्बन और ऑक्सीजन के खास बॉन्ड (आइसोटोप) बनते हैं. जब तापमान कम होता है तो ये बॉन्ड ज्यादा बनते हैं, और तापमान ज्यादा होने पर कम.
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (UCLA) की प्रोफेसर अराधना त्रिपाठी और उनकी टीम ने इस तकनीक को सटीक बनाने में 10 साल से ज्यादा का वक्त लगाया. आज वे सिर्फ कुछ मिलीग्राम इनेमल से ही करोड़ों साल पुराना तापमान पढ़ सकते हैं.
सुस्त नहीं, लंबी रेस का घोड़ा था टी-रेक्स
इस खोज ने टी-रेक्स को लेकर वैज्ञानिकों की पूरी सोच ही बदल दी है. गर्म खून होने के कई बड़े फायदे थे जो इसे एक खतरनाक शिकारी बनाते थे. ठंडे खून वाले मगरमच्छ थोड़ी दूर तो तेजी से भाग सकते हैं, लेकिन जल्द ही थक जाते हैं. इसके उलट, गर्म खून होने की वजह से टी-रेक्स बिना थके लंबे समय तक शिकार का पीछा कर सकता था.
एक्टिव रहने और शरीर को गर्म रखने के लिए टी-रेक्स को बहुत ज्यादा खाना पड़ता था. इसका मेटाबॉलिज्म बेहद तेज था, यानी इसे हर वक्त भारी मात्रा में मांस की जरूरत रहती थी. इस क्षमता के दम पर टी-रेक्स बर्फीले आर्कटिक से लेकर गर्म मैक्सिको तक, पूरे महाद्वीप में कहीं भी बेधड़क घूम और शिकार कर सकता था.
पक्षियों और रेंगने वाले जीवों के बीच की कड़ी
भले ही हम डायनासोर को रेंगने वाले जीवों की कैटेगरी में रखते हैं, लेकिन वे आज के पक्षियों के बेहद करीब थे. वैज्ञानिकों के मुताबिक, टी-रेक्स का तापमान रेंगने वाले जीवों (औसतन 82-86°F) से काफी ज्यादा था, लेकिन आज की फुर्तीली चिड़ियों (104°F से ज्यादा) से थोड़ा कम था.
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