'Once upon a time...', किताबों में इतिहास पढ़ते हुए ये शब्द हर बार सामने आ जाता है, जो कई बड़े साम्राज्य के पतन की कहानी को बयान करते हैं. कभी दुनिया में अपनी कॉलोनीज बनाने वाले, पूरे विश्व भर में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना करके हुकूमत करने वाले अंग्रेजों को आज खुद को संभाल पाना उनके लिए मुश्किल हो गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि यूनाइटेड किंगडम भी अब अलग थलग हो सकता है. UK के 3 डेवलप्ड देश वेल्स, स्कॉटलैंड और नॉर्दर्न आयरलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर यानी तीनों सरकारों के प्रमुख वेल्स की राजधानी कार्डिफ में सोमवार को मुलाकात करने वाले हैं.
The Telegraph के मुताबिक, वेल्स, स्कॉटलैंड और नॉर्दर्न आयरलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर कार्डिफ में एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिसमें यह अधिकार मिले की उनको यूके में रहना है या नहीं यह खुद वो तय कर सकें, जिससे यह सुनिश्चित हो कि अगर आजादी की जरूरत है, तो वो यूके से अलग हो जाएं. यहां जनमत संग्रह कराने की बात पर भी बात हो सकती है. तीनों मंत्रियों की मांगे अलग-अलग हैं. तीनों का जोर है कि जो मौजूदा व्यवस्था है उसमें बदलाव हो. अपना भविष्य खुद तय करने को लेकर उनकी तरफ से साझा बयान जारी किया जा सकता है.
इन बैठकों का दौर तब शुरू हुआ, जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने सांसदों को सुझाव देते हुए कहा था कि अगर स्कॉटलैंड के UK से अलग होने के पक्ष में सहमति बनती है, तो जनमत संग्रह की मंजूरी दे सकते हैं. जैसे ही उन्होंने ये बयान दिया उसके तुरंत बाद स्कॉटिश नेशनल पार्टी ने इसे मुद्दा बना लिया. इस बयान के स्कॉटलैंड की आजादी का मुद्दा गरम होते देख पीएम बर्नहैम ने सफाई दी और कहा कि चुनाव तक कोई जनमत संग्रह नहीं होगा.
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कार्डिफ का यह सम्मेलन डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के दो दिन बाद ही होने जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह आयरलैंड को संयुक्त आयरलैंड के रूप में देखना पसंद करेंगे. डबलिन की यात्रा में ट्रंप ने कहा था कि यह बहुत अच्छी बात होगी. लेकिन स्कॉटिश नेशनल पार्टी के नेता और फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया. उनका दावा है कि एंडी बर्नहैम UK के आखिरी प्रधानमंत्री होंगे.
जॉन स्विनी ने कहा कि ऐसा पहली है कि स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड तीनों ही राज्यों की कमान ऐसे लोगों के पास हैं, जो आजादी के समर्थक हैं. इससे बड़ा कोई संकेत नहीं है कि मौजूदा स्थिति अब टिकाऊ नहीं है. अब UK की सरकार को ब्रिटेन के भविष्य के लिए अभी से तैयार हो जाना चाहिए. इस बड़े संवैधानिक परिवर्तन के उत्साह को देखते हुए एंडी बर्नहैम को स्वीकार करना होगा कि वे अंतिम प्रधानमंत्री माने जाएंगे.
जॉन स्विनी ने आगे कहा कि कार्डिफ में सभी सहयोगियों के बेहतर भविष्य पर चर्चा करने के लिए तैयार हूं और भविष्य केवल स्वतंत्रता की नई शुरुआत से आ सकती है.
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किन मुद्दों पर होगा जोर?
इस सम्मेलन में चार बातों पर फोकस रहेगा अर्थव्यवस्था, एनर्जी यूरोप इंटरनेशनल सहयोग और स्वतंत्र निर्णय. तीनों दल इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि उनको EU का हिस्सा होना चाहिए. वेल्स और स्कॉटलैंड नए मेंबर के रुप में साथ में नॉर्दर्न आयरलैंड रिपब्लिक आयरलैंड के हिस्से के रूप में. कहा जा रहा है कि ये गुट इस बात पर जोर दे कर कह सकता है कि UK का इकोनॉमिक मॉडल इन तीनों क्षेत्रों के नागरिकों के लिए काम नहीं कर रहा है.
अगर इतिहास की बात करें तो वेल्स पर इंग्लैंड का अपना कब्जा धीरे-धीरे बढ़ा रहा था. कानून बनाकर 1536 में इंग्लैंड में शामिल कर लिया था. इसके 1603 में स्कॉटलैंड के राजा इंग्लैंड के राजा बन गए थे. 1707 में ग्रेट ब्रिटेन बना दिया गया. उसके बाद आयरलैंड और ग्रेट ब्रिटेन 1801 में एक हुए. 1922 में आयरलैंड का कुछ हिस्सा अलग होकर रिपब्लिक आयरलैंड बना और बचा हुआ नॉर्दर्न आयरलैंड अभी UK में है. अब इनका भविष्य क्या होगा, आगामी बैठकों में तय हो जाएगा.
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