- Wikipedia के को-फाउंडर जिमी वेल्स ने India AI Impact Summit में भारत की AI क्षमता पर गहरी उम्मीद जताई.
- भारत की युवा आबादी, भाषाई विविधता और तकनीकी अपनाने की ताकत इसे वैश्विक AI केंद्र बनने में मदद कर रही है.
- AI के भाषाई प्रयोगों में सुधार की जरूरत है और भारत के बहुभाषी माहौल में इसके विकास के व्यापक अवसर मौजूद हैं.
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit में Wikipedia के को-फाउंडर जिमी वेल्स ने भारत की AI क्षमता पर गहरी उम्मीद जताई है. लेकिन साथ ही सावधानी बरतने की जरूरत भी बताई. उन्होंने कहा कि भारत आज AI का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और यह दौर भारत के AI मोमेंट की शुरुआत है.
भारत की AI ताकत: युवा, आबादी और भाषाई विविधता
वेल्स ने कहा कि भारत वह देश है जहां तकनीक अपनाने की ताकत सिर्फ कंपनियों से नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं से आती है. उन्होंने बताया कि भारत अंग्रेजी विकिपीडिया का तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है और 25 भारतीय भाषाओं में सक्रिय है. यह भाषाई विविधता भारत को वैश्विक AI युग में सबसे महत्वपूर्ण देशों में शामिल करती है.
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AI और भाषाएं: भारत के लिए बड़ा अवसर
वेल्स के अनुसार, AI की सबसे उत्साहजनक दिशा उसका भाषाओं के बीच सुचारू रूप से काम करना है. यह क्षेत्र अभी सुधार की मांग करता है, लेकिन भारत जैसे बहुभाषी देश के लिए इसमें अपार संभावनाएं मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि मजबूत सॉफ़्टवेयर टैलेंट और उद्यमशीलता की संस्कृति भारत को AI नवाचार का बड़ा केंद्र बना सकती है.
AI के जोखिम: मानव निगरानी जरूरी
जिमी वेल्स ने चेतावनी दी कि AI का उपयोग संघर्ष या हथियारकरण में सावधानी मांगता है. उन्होंने कहा, 'AI बहुत सारा टेक्स्ट बना सकता है, लेकिन सही क्या है और गलत क्या, यह बताने के लिए इंसान की जरूरत है.'
सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी अनिवार्य
AI नियमों पर वेल्स की राय स्पष्ट थी कि सिर्फ सरकारें AI को रेगुलेट नहीं कर सकतीं, क्योंकि वे अक्सर धीमी और जटिल होती हैं. उन्होंने कहा कि Public-Private Partnership ही एकमात्र रास्ता है, ताकि AI का सुरक्षित और सकारात्मक उपयोग हो सके, विशेषकर स्वास्थ्य और कम शोध वाले रोगों में.
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फेक न्यूज़ और AI: भारत के लिए खास चुनौती
वेल्स ने कहा कि भारत में गलत जानकारी (misinformation) पहले ही एक गंभीर समस्या है और AI इसे और बढ़ा सकता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती. पेशेवर पत्रकारिता और विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा जरूरी है.
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