फास्टफूड और फर्राटा सी भागती जिंदगी में लोगों की याददाश्त बहुत छोटी हो चली है. और जब बात भारत में क्रिकेट जैसे खेल की आती है, जो चंद महीने पहले का 'लाइफ टाइम कमाल' भी फैंस को याद नहीं रहता क्योंकि वर्तमान खेल में ज्यादा अहम होता है. वर्तमान पसंद भी और हालात भी! कुछ ऐसा ही एक बार फिर से टीम इंडिया में लौटने वाले "टैलेंटेड" संजू सैमसन के साथ होता दिखाई पड़ा रहा है. छह महीने पहले ही पूरा भारत संजू, संजू के नारे लगा रहा था, सैमसन को पलकों पर बैठा रहा था, लेकिन इन छह महीनों में टीम इंडिया की 'तस्वीर', भले न बदली हो, लेकिन उनकी और उनके हालात की जरूर बदल गई है. और फिलहाल उनसे फैंस की नाराजगी की वजह बने हैं वैभव सूर्यवंशी! अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 मैच में संजू सैमसन सिर्फ 10 रन बनाकर लौटे, तो फैंस का गुस्सा चरम पर पहुंच गया. ये फैंस भूल गए कि एक महीने पहले ही कैसे सैमसन का 'हक' मारकर सूर्यवंशी को टीम में जगह दी गई थी! शायद यही इस दौर का कड़वा सच है लेकिन इन हालात के लिए शायद सैमसन खुद भी कहीं न कहीं दोषी हैं! चलिए संजू की सिर्फ 'क्रिकेट स्टोरी' को डिकोड करते हैं.

Photo Credit: Image: ICC
केकेआर ने 14 साल की उम्र में ही पहचाना
तब सैमसन सिर्फ 14 साल के थे और केरल के लिए अंडर-13 टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के बाद उनके बचपन के कोच बीजू जॉर्ज उन्हें साल 2008 में केकेआर के ट्रायल में ले गए थे.और यहां कप्तान सौरव गांगुली का ध्यान संजू के बड़े-बड़े छक्कों ने खींचा, तो ट्रॉयल में उनके प्रदर्शन से प्रभावित होकर केकेआर प्रबंधन ने उन्हें अपनी बी टीम में जगह दी. टीम के साथ ही उन्हें श्रीलंका दौरे पर भी जाने का मौका मिला.
अंडर-19 में जगह बनाने से चूके
सैमसन के शुरुआती दिन दिल्ली में गुजरे, लेकिन पुलिस में कांस्टेबल पिता ने बेटे के करियर के लिए घरेलू राज्य केरल का रुख किया. और संजू ने शुरुआती दिनों में केरल में अपनी प्रभावशाली तकनीक और गेंद को बेहतरीन ढंग से टाइम करने की क्षमता दिखाते हुए जूनियर सर्किट पर अपनी बल्लेबाजी से तहलका मचा दिया. उन्होंने 2011 में अंडर-19 एशिया कप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई, लेकिन टूर्नामेंट में खास छाप नहीं छोड़ सके और अगले साल यानी 2012 में भारत की अंडर-19 विश्व कप टीम में जगह बनाने से चूक गए. यह वही साल था, जब उन्मुक्त चंद की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया जूनियर को फाइनल में हराकर अंडर-19 विश्व कप जीता था.
शानदार प्रथम श्रेणी आगाज, इस स्कोर से बदली 'जिंदगी'
सैमसन ने 2011-12 में करीब 17 साल की उम्र में ही प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया. और रणजी ट्रॉफी में केरल के लिए बल्लेबाज और विकेटकीपर के रूप में खासा प्रभावित किया. साल 2013-14 में उन्होंने लगभग 60 के औसत से 530 रन बनाए, जिसमें अपने पहले मैच में लगाया गया एक दोहरा शतक भी शामिल था. इसके बाद अगले सीज़न में उन्होंने 475 रन बनाए. साल 2015-16 में 20 साल की उम्र में उन्हें केरल टीम का कप्तान नियुक्त किया गया था.
टीम इंडिया के लिए आगाज, "लंबा गैप".. और लगने लगा 'ठप्पा'
भारत के लिए सैमसन का करियर 19 जुलाई, 2015 को शुरू हुआ, लेकिन धोनी और दूसरे विकेटकीपर ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक की तिकड़ी के बीच संजू को अगला टी20 मैच करीब साढ़े 4 साल बाद 10 जनवरी 2020 को पुणे में श्रीलंका के खिलाफ खेलने को मिला. लेकिन पहला अर्द्धशतक बनाने में उन्होंने 12 पारिया लीं, तो वहीं दूसरा पचासा इसके ठीक अगली करीब 10 पारियों के बाद और कुल मिलाकर पूरी 23 पारियों बाद आया. यही वजह रही कि इस दौरान धोनी के दबदबे के बीच रेस में ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक आगे निकल गए और सैमसन बहुत पीछे चले गए. वह आईपीएल में अच्छा कर रहे थे, लेकिन सबसे बड़ी समस्या निरंतरता की थी. वे कुछ पारियों में बेहद शानदार खेल दिखाते थे, लेकिन उसके बाद लगातार फ्लॉप हो जाते थे. और यहीं से उन्हें एक टैग मिला "मिस्टर इनकंसिस्टेंट". और यह तब से लेकर अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 तक जारी है और दिग्गजों, मीडिया और पीआर द्वारा खड़े किए गए "मिस्टर टैलेंटेड" के नरेटिव और इसी बीच बल्ले से किए गए बड़े धमाके के बावजूद सैमसन इससे पीछे नहीं ही छूटा सके.

भारत के लिए सैमसन का करियर 19 जुलाई, 2015 को शुरू हुआ, लेकिन धोनी और दूसरे विकेटकीपर ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक की तिकड़ी के बीच संजू को अगला टी20 मैच करीब साढ़े 4 साल बाद 10 जनवरी 2020 को पुणे में श्रीलंका के खिलाफ खेलने को मिला. लेकिन पहला अर्द्धशतक बनाने में उन्होंने 12 पारिया लीं.
और यहीं से उन्हें एक टैग मिला "मिस्टर इनकंसिस्टेंट". और यह तब से लेकर अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 तक जारी है और दिग्गजों, मीडिया और पीआर द्वारा खड़े किए गए "मिस्टर टैलेंटेड" के नरेटिव और इसी बीच बल्ले से किए गए बड़े धमाके के बावजूद सैमसन इससे पीछे नहीं ही छूटा सके.
खुद को मानो राख से फिर से खड़ा किया!!
निश्चित तौर पर सैमसन की स्थिति ऐसी ही हो गई थी. वह इस साल टी20 विश्व कप में चुने गए, लेकिन शुरुआती मैचों की नाकामी के बाद लगा संजू का करियर समझो गया! सभी समीकरण ये कह रहे थे कि सैमसन ने भारत के लिए आखिरी मैच खेल लिया, तो तभी मानो वह हुआ, जो उनके करियर में बाकी करियर एक तरफ और यह 'चमत्कार' एक तरफ रहा! सैमसन ने विंडीज, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ खुद और देश की सबसे बड़ी जरूरत के समय लगातार तीन धमाकेदार पारियां खेलते हुए 97*, 89, 89 रन बनाए. इन पारियों ने उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज बनाया, तो इतिहास में अमर कर दिया. सैमसन ने करियर को वह फिनिशिंग टच दिया, जो शायद उन्होंने भी नहीं सोचा था. लेकिन टूर्नामेंट हुआ थो, फिर से पुराना टैग लौट आया!
फिर से हुआ "टैग" से मिलन! हुई नई तस्वीर की इंट्री
विश्व कप खत्म होने के बाद से सैमसन ने पांच पारियां खेली हैं. इसमें उन्होंने 5, 0, 1, 27 और अब अफगानिस्तान के खिलाफ 10 रन बनाए हैं. इन्हीं पांच नाकामियों के बीच टीम इंडिया में नई सनसनी वैभव सूर्यवंशी की इंट्री हुई, तो उनके उभार, पंसद, ब्रॉकास्टर्स के दबाव और सैमसन की नाकामी से समीकरण बदलते दिखे. और फिर से उनका पुराना टैग चिपक गया; "मिस्टर इन्कंसिस्टेंट!"

....टैलेंटेड हैं, लेकिन क्या इस बड़ी समस्या ने किया नुकसान?
इसमें दो राय नहीं कि जब व्हाइट-बॉल की बात आती है, तो संजू सैमसन टैलेंटेंड दिखाई पड़ते है. उनके पक्ष में एक तबके और पीआर ने यह नरेटिव स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि वह टैलेंटेड हैं. नरेटिव की जरूरत भी नहीं थी! जब वह खेलते हैं, तो बैटिंग सहज, सरल दिखती है. वह बड़ी सहजता से छक्के लगाते हैं, संगीत सा अहसास कराता फ्लिक डीप-स्कवॉयर लेग के ऊपर से जाता है, तो फैंस झूम उठते हैं, स्मैश करके कवर के ऊपर से छक्के जड़ते हैं, बल्ला भी सीधा आता है. लेकिन
, तो इसी वजह से वह शॉट खेलने के लिए अनेकों मौकों पर सही पोजीशन में नहीं आ सके. इस वजह से कई बार गलत शॉट का चयन उनसे हुआ. और इतने टैलेंटेंड खिलाड़ी को जमकर या पैदा हुई स्थिति से अटपटा शॉट खेलकर पवेलियन लौटते देखना किसी को भी अच्छा नहीं लगा क्योंकि संजू पिच पर इतना अच्छे "बैटिंग लुक" की उपस्थिति दर्ज कराते हैं कि मन करता है कि वह खेलते ही रहें, वह आउट न हों!
क्यों नहीं छूटा पीछा, आखिर वजह क्या रही?
संजू को सचिन सहित तमाम दिग्गजों ने फुटवर्क पर काम करने को कहा. बहुत कम मौकों पर यह दिखाई पड़ा, लेकिन ज्यादातर मौकों पर नदारद रहा. और अब जब उनके करियर का सांध्यकाल चल रहा है, तो इससे अभी भी उनका पीछा नहीं छूटा है. सबसे बड़ा सवाल हमेशा यह रहेगा कि संजू इससे पीछे क्यों नहीं छुड़ा सके? और सवाल यही है कि क्या इसी समस्या के कारण वह मिस्टर इनकंसिस्टेंट बन गए? संजू 32वें साल में चल रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि इस पहलू से अब समय लगभग निकल चुका है! अगला टी20 विश्व कप ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में है. संजू तब 34 यां 35वें साल में होंगे. यहां की पिचें "कदमताल" की मांग उपमहाद्वीप की पिचों से दोगुना करती हैं! अगले मेगा टूर्नामेंट की प्लानिंग शुरू हो चुकी है. कप्तान सूर्यकुमार फिट नहीं थे, तो टा-टा कह दिए गया! सूर्यवंशी का समीकरण रह-रहकर 'उबाल' मार रहा है! अब जो है, आपके सामने है! और इन्हीं तमाम बातों की वजह से अब संजू सैमसन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
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