यमन के हूती विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने खमीस मुशैत में सऊदी अरब के किंग खालिद एयर बेस पर बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया. साथ ही दावा किया कि उनके हमले "सीधे निशाने पर लगे". रियाद की ओर से इस पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.
द्वीपों पर भी कब्जा करने का दावा
ईरान समर्थित विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने दक्षिणी लाल सागर में और भी रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा कर लिया है, जिससे बाब अल-मंदेब के अहम शिपिंग रूट पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई है.
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इससे पहले यमन के ईरान-समर्थक हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण सऊदी अरब की यमन से लगी सीमा पर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी. इसके बाद, सोमवार को सऊदी अरब ने दक्षिण के चार शहरों में संभावित खतरे की चेतावनी हटा ली.
कहां के लिए जारी हुआ था अलर्ट
सऊदी सिविल डिफेंस ने इन इलाकों को सुरक्षित घोषित करने से पहले नज्रान, खमीस मुशैत, जाज़ान और आभा के लिए अलर्ट जारी किए थे. बाद में उसने खमीस मुशैत और आभा के लिए फिर से चेतावनी जारी की और फिर उन्हें भी हटा लिया.
इन हमलों की खाड़ी और मुस्लिम संगठनों के साथ-साथ अरब और क्षेत्रीय सरकारों ने कड़ी निंदा की है और एकजुटता दिखाई है. सऊदी अरब का समर्थन करने और उसके इलाके तथा अहम बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा करने वालों में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल, मुस्लिम वर्ल्ड लीग और ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन शामिल हैं.
ये अलर्ट दक्षिणी सऊदी अरब में आम नागरिकों और आर्थिक सुविधाओं को निशाना बनाकर किए गए हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों के कई दिनों के बाद जारी किए गए थे.
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