विज्ञापन
This Article is From Sep 04, 2020

रूस का कोविड-19 वैक्‍सीन 'सुरक्षित', शुरुआती ट्रायल टेस्‍ट पास किया: लेंसेट स्‍टडी

रूस ने पिछले माह कोरोना वायरस के वैक्‍सीन को विकसित करने की घोषणा की थी और इसका नाम 1957 में स्‍पेस में लांच किए गए सैटेलाइट पर Sputnik V रखा था. इस वैक्‍सीन को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है.

रूस का कोविड-19 वैक्‍सीन 'सुरक्षित', शुरुआती ट्रायल टेस्‍ट पास किया: लेंसेट स्‍टडी
रूस ने पिछले माह कोरोना वायरस के वैक्‍सीन को विकसित करने की घोषणा की थी (प्रतीकात्‍मक फोटो)
  • स्‍टडी के अनुसार, शुरुआती टेस्‍ट में नहीं दिखा कोई 'विपरीत असर'
  • तीन सप्‍ताह के अंदर डेवलप हो गए एंडीबॉडीज
  • रूस ने पिछले माह की थी वैक्‍सीन विकसित करने की घोषणा
लंदन:

रूस की ओर से विकसित की गई कोरोना वायरस वैक्‍सीन का जिन मरीजों पर शुरुआती टेस्‍ट किया गया, उनमें 'बिना किसी विपरीत असर' (No serious adverse events) के एंटीबॉडीज विकसित हो गए थे. यह जानकारी लेंसेट में प्रकाशित एक रिसर्च में दी गई है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रायल इतने कम संख्‍या में हुए थे कि वैक्‍सीन के सुरक्षित और प्रभावी होने की बात साबित की जा सके. गौरतलब है कि रूस ने पिछले माह कोरोना वायरस के वैक्‍सीन को विकसित करने की घोषणा की थी. रूस के  राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin)  ने इसका ऐलान करते हुए कहा था कि उनके देश ने कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन बना ली है. उन्होंने यह भी बताया था क‍ि उनकी बेटी को भी यह टीका लगाया गया है और वह अच्छा महसूस कर रही है. रूस ने इस वैक्सीन का नाम स्पुतनिक-5 (Sputnik V) रखा है कि जो उसके एक उपग्रह का भी नाम है. दावा है कि इस वैक्‍‍‍‍‍सीन से कोविड-19 के खिलाफ स्‍थायी इम्यूनिटी विकसित की जा सकती है. 

रूस ने बनाई दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन, राष्ट्रपति पुतिन की बेटी को लगाया गया टीका

रूस के इस वैक्‍सीन को  लेकर पश्चिमी देशों के वैज्ञानिकों ने वैक्‍सीन को सुरक्षित होने को लेकर चिेंता जताई थी, उनका मानना था कि किसी वैक्‍सीन पर इतनी तेजी से 'आगे बढ़ना' खतरनाक साबित हो सकता है. दूसरी ओर, रूस ने उसके रिसर्च को कम करने का आरोप लगाते हुए इन आलोचनाओं को दरकिनार कर दिया था. लेंसेट की स्‍टडी के अनुसार, रूसी शोधकर्ताओं ने दो छोटे ट्रायल कराए, इसमें से हर ट्रायल में 16 से 60 वर्ष की उम्र के 38 स्‍वस्‍थ लोगों को शामिल किया गया था, इन्‍हें दो हिस्‍सों में वैक्‍सीन दिया गया. हर पार्टिसिपेंट को पहले हिस्‍से में वैक्‍सीन की एक डोज दी गई और इसके 21 दिन बाद उसे दूसरा डोज  दिया गया.  इन सभी पर 42 दिन तक नजर रखी गई. तीन सप्‍ताह के अंदर ही इनमें एंटीबॉडीज डेवलप हो गए थे.

भारत में लगातार दूसरे दिन कोरोना के 83 हजार से ज्यादा नए मामले

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Russia, Russia COVID-19 Vaccine, Lancet Study, Trial Test
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com