अमेरिका-ईरान के बीच शांति को कोशिशों पर अब पानी फिरता दिख रहा है. ट्रंप और ईरानी पक्ष के बीच किसी भी समझौते पर एक राय नहीं बन रही है. दरअसल दोनों देशों के बीच शर्तों की खाई बहुत बड़ी है. अब अगर युद्ध फिर से छिड़ता है तो पहले से ही हांफ रही वैश्विक सप्लाई चेन दम तोड़ देगी.
अगर यह तनाव पूर्ण युद्ध में बदलता है, तो मामला सिर्फ पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा. जानकारों की मानें तो इस बार खतरा आपकी थाली तक पहुंचने वाला है. दुनिया के सामने एक ऐसा मानवीय संकट खड़ा हो सकता है, जिसकी कल्पना भी डरावनी है.
सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने इस खतरे को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है. उनके मुताबिक, दुनिया अब तक के सबसे बड़े 'एनर्जी सप्लाई शॉक' यानी ऊर्जा आपूर्ति के सबसे खराब दौर से गुजर रही है. नासिर का कहना है कि अगर आज भी हालात सुधर जाएं, तब भी बाजार को पुराने स्तर पर लौटने में महीनों का समय लगेगा. लेकिन अगर युद्ध छिड़ा और देरी हुई, तो इसके घातक नतीजे साल 2027 तक भुगतने पड़ सकते हैं.

तेल के साथ खाद का भी संकट
ईरान और अमेरिका की इस संभावित जंग का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर पड़ेगा. आधुनिक खेती पूरी तरह से उर्वरक और ईंधन पर टिकी है. खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई बाधित होते ही खाद का उत्पादन और वितरण ठप हो जाएगा. संयुक्त राष्ट्र (UNOPS) ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि अगर अगले कुछ हफ्तों में कोई समाधान नहीं निकला, तो दुनिया को एक बड़े मानवीय संकट का सामना करना पड़ सकता है.

गरीब देशों पर दोहरी मार
यह युद्ध उन देशों के लिए 'काल' बनकर आएगा जो अपनी खाद्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं. दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहां खेती न के बराबर होती है और वे अनाज का आयात करते हैं. युद्ध की स्थिति में कोई भी देश अपने सुरक्षित भंडार को छोड़कर अनाज निर्यात करने का जोखिम नहीं उठाएगा. हर देश पहले अपने नागरिकों का पेट भरने की सोचेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनाज की भारी कमी हो जाएगी.
इसके अलावा, भौगोलिक चुनौतियां भी कम नहीं हैं. युद्ध शुरू होते ही हॉर्मुज स्ट्रेट में मौजूदा स्थिति से भी बदतर हालात हो जाएंगे. शिपिंग कंपनियां ऐसे जोखिम भरे रास्तों से माल ले जाने से कतराएंगी और अगर जाएंगी भी, तो बीमा और माल ढुलाई का खर्च इतना अधिक होगा कि आम आदमी के लिए अनाज खरीदना नामुमकिन हो जाएगा.

युद्ध के स्थिति में कई गरीब देशों में भुखमरी जैसे हालात की आशंका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Photo Credit: United Nations
प्रोडक्शन और सप्लाई चेन का टूटना चिंताजनक
जब खाद की सप्लाई रुकती है, तो इसका असर तुरंत नहीं बल्कि अगली फसल चक्र पर पड़ता है. यानी आज की कमी आने वाले कुछ सालों तक अनाज की पैदावार को कम कर देगी. अमीन नासिर की 2027 वाली चेतावनी इसी ओर इशारा करती है कि सप्लाई चेन का एक बार टूटना, अर्थव्यवस्था के पूरे पहिये को जाम कर सकता है.
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