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विजय ने 200 यूनिट बिजली फ्री की; अब सोने के सिक्के, घर, कार, 2500 रुपये महीने की बारी- कैसे विश लिस्ट पूरा करेंगे थलपति?

तमिलनाडु में अब असली फिल्म शुरू हो चुकी है. सी जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री बनते ही दो महीने में 500 यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली देकर साफ कर दिया कि वो सिर्फ चुनावी डायलॉग नहीं मार रहे थे. लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है- 2500 रुपये महीना, सोने के सिक्के, फ्री गैस, बेरोजगारी भत्ता, घर, बाइक और कार जैसे बड़े वादों के लिए पैसा आएगा कहां से?

विजय ने 200 यूनिट बिजली फ्री की; अब सोने के सिक्के, घर, कार, 2500 रुपये महीने की बारी- कैसे विश लिस्ट पूरा करेंगे थलपति?
PTI
  • सीएम विजय की असली परीक्षा अब शुरू हुई है. चुनावी जीत मिल गई, सरकार का गठन भी हो गया.
  • अब फाइलों, बजट, अधिकारियों और आर्थिक हकीकत की दुनिया शुरू हो चुकी है.
  • ऐसे में अब पूरा तमिलनाडु यही देख रहा है कि क्या थलपति अपनी फिल्मों की तरह यहां भी जो कहा वो करके दिखाएंगे?

तमिलनाडु में विजय ने मुख्यमंत्री बनते ही 200 यूनिट मुफ्त बिजली देकर साफ कर दिया कि वो सिर्फ चुनावी डायलॉग नहीं मार रहे थे, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वो 2500 रुपये महीना, सोने के सिक्के, फ्री गैस, बेरोजगारी भत्ता, घर, बाइक और कार जैसे बड़े वादों के लिए पैसा कहां से लाएंगे? विजय की राजनीति सिर्फ फ्रीबीज नहीं, बल्कि गरीब और लोअर मिडिल क्लास को ऊपर उठाने वाले सपने पर भी टिकी है. अगर उद्योग, टैक्स और रोजगार नहीं बढ़े, तो यही ड्रीम प्रोजेक्ट तमिलनाडु के खजाने पर सबसे बड़ा बोझ भी बन सकता है. अब जनता देख रही है- क्या थलपति फिल्मों की तरह सिस्टम बदल देंगे, या फिर वादों की ये विशाल विश लिस्ट सरकारी फाइलों में फंस जाएगी.

तमिलनाडु में अब असली फिल्म शुरू हो चुकी है. सी जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री बनते ही दो महीने में 500 यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली देकर साफ कर दिया कि वो सिर्फ चुनावी डायलॉग नहीं मार रहे थे. लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है- 2500 रुपये महीना, सोने के सिक्के, फ्री गैस, बेरोजगारी भत्ता, घर, बाइक और कार जैसे बड़े वादों के लिए पैसा आएगा कहां से?

चुनावी मंच से बोला गया पहला बड़ा वादा तो अब सरकारी फाइलों में दर्ज हो चुका है. पर ये तो केवल शुरुआत है. असली विश लिस्ट तो कहीं लंबी है- महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये, गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए सोने के सिक्के, हर परिवार को पक्का घर, युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, मुफ्त गैस सिलेंडर, किसानों की कर्ज माफी, बुनकरों को सालाना मदद, और आगे चलकर हर घर में बाइक और कार तक का सपना.

उन्हें (विजय को) वादों को पूरा करने की जटिलताओं का पता चलेगा.

स्टालिन

पूर्व मुख्यमंत्री

स्टालिन की कड़ी टिप्पणी

राजनीति में जनता का भरोसा सबसे बड़ी करेंसी है और मुख्यमंत्री बनते ही की गई घोषणाएं ये बताती हैं कि विजय ये बखूबी समझते हैं. वो जानते हैं कि अगर शुरुआती 100 दिनों में जनता को असर दिख गया, तो उनका राजनीतिक नैरेटिव मजबूत हो जाएगा. इसीलिए सरकार के भीतर अभी सबसे ज्यादा दबाव फाइनेंस डिपार्टमेंट पर है. हालांकि विजय की तरफ से यह भी कहा गया कि राज्य का खजाना खाली है, पर पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने इसका जोरदार खंडन भी किया और कहा भी कि राजकोष स्थिर है. स्टालिन ने ये भी कहा कि अब उन्हें (विजय को) वादों को पूरा करने की जटिलताओं का पता चलेगा.

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क्या महिलाओं को मिलेंगे 2500 रुपये?

सरकार के अंदरूनी अनुमान के मुताबिक, महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने की योजना सबसे महंगी साबित हो सकती है. तमिलनाडु में करीब 2 करोड़ से ज्यादा परिवार हैं. अगर इनमें से सिर्फ आधे परिवार भी इस योजना के दायरे में आते हैं, तो सालाना खर्च लाखों करोड़ की तरफ जा सकता है. यानी सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पैसा कहां से आएगा.

तो सवाल ये है कि राजकोष खाली होने की बात करने वाली नई नवेली सरकार क्या टैक्स बढ़ाएगी या और ज्यादा कर्ज लेगी या फिर पहले से चली आ रही पूर्ववर्ती सरकारों की योजनाओं में कटौती होगी या फिर उद्योग जगत से बड़ा रेवेन्यू निकालने की कोशिश होगी?

मीडिया में आई जानकारी के मुताबिक विजय की टीम तीन मॉडल पर काम कर रही है. पहला, टारगेटेड वेलफेयर- इसके तहत केवल उन परिवारों को योजनाओं का लाभ दिया जाएगा जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं. दूसरा, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर-  योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के अकाउंट में जाएगा ताकि बिचौलियों का कोई किरदार ही न रह जाए. और तीसरा, इंडस्ट्रियल ग्रोथ से कमाई- इसके तहत वो बड़ी कंपनियों के जरिए रोजगार बढ़ाने और टैक्स बढ़ा कर उससे वेलफेयर के लिए फंड इकट्ठा करने की कोशिश भी करेंगे. लेकिन ये इतना आसान भी नहीं होगा  क्योंकि केवल 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने की घोषणा का ही राजकोष पर बहुत गहरा होगा.

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फ्री बिजली का असर क्या होगा?

200 यूनिट मुफ्त बिजली सुनने में आसान लगता है, लेकिन बिजली बोर्ड के लिए ये बहुत बड़ा वित्तीय झटका हो सकता है. तमिलनाडु पहले से बिजली सब्सिडी पर भारी खर्च करता है. स्टालिन के कार्यकाल में 100 यूनिट बिजली मुफ्त मिलती थी. इसके अलावा 100 से अधिक लेकिन 500 यूनिट से कम खर्च करने वालों को सब्सिडी दरों पर बिजली मिलती थी. तमिलनाडु में करीब 2.45 करोड़ घरेलू उपभोक्ता हैं. 
अब मुफ्त यूनिट बढ़ने से सबसे पहले तो डिस्कॉम पर दबाव बढ़ेगा और राज्य सरकार को करीब 1730 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी देनी पड़ेगी. वहीं अगर बिजली कंपनियों को सरकार से समय पर पैसा नहीं मिला तो उनका घाटा और बढ़ सकता है.

हालांकि राजनीतिक रूप से देखें तो विजय की यह पहली घोषणा मास्टरस्ट्रोक भी बन सकती है क्योंकि बिजली बिल सीधे हर घर को प्रभावित करता है. जब अगले महीने लोगों का बिल कम आएगा तो उन्हें यह अससास होगा कि विजय को चुनना सीधे उनकी जेब पर असर डाल रहा है. उनका खर्च कम हो रहा है. ऐसे में वो विजय के अलगे वादों के बारे में सोचना शुरू करेंगे. हर घर बाइक, बाद में कार जैसे वादे.

सिर्फ सपना या आर्थिक मॉडल?

विजय का सबसे चर्चित बयान वही रहा जिसमें उन्होंने कहा था, “हर परिवार के पास पक्का घर होना चाहिए. हर घर में बाइक होनी चाहिए. आगे चलकर कार भी होनी चाहिए.”

विपक्ष ने इसे मजाक बताया था. लेकिन सत्ता में आने और शुरुआती वादे पूरे करने के बाद इसे एस्पिरेशनल पॉलिटिक्स के तौर पर देखा जा रहा है यानी जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने की राजनीति.

हालांकि जानकार कहते हैं कि इन घोषणाओं का मतलब सीधे मुफ्त में कार या घर बांटना नहीं है. असल योजना ये हो सकती है कि ईएमआई की दरें सस्ती हों, कम ब्याज वाले लोन की सुविधाएं दी जाएं, गांवों में रोजगार सृजन की कवायद हो, छोटे कारोबारों को बढ़ावा और उन पर शुरुआती टैक्स माफी जैसी योजनाएं हों और मिडिल क्लास की आय बढ़ाने वाले मॉडल विकसित किए जाएं. मतलब ये कि केवल फ्रीबीज पर सरकार न टिकी रहे बल्कि लोअर मिडिल क्लास के सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें योजनाओं के तहत सीढ़ी दे.

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सोने के सिक्के वाली योजना कैसे पूरी होगी?

विजय के घोषणापत्र में गरीब दुल्हनों को शादी के लिए 8 ग्राम सोना देने का वादा किया गया है. यह सहायता आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों की दुल्हनों के लिए है. तमिल समाज में सोना- इज्जत, सुरक्षा, सामाजिक स्थिति, और परिवार की आर्थिक ताकत का प्रतीक माना जाता है. गरीब और निचले मध्यम वर्ग के परिवारों में बेटी की शादी सबसे बड़ा आर्थिक दबाव होती है.

विजय जानते हैं कि अगर सरकार शादी के खर्च का हिस्सा उठाती दिखी, तो उसका भावनात्मक असर बहुत बड़ा होगा. लेकिन वित्त विभाग का डर अलग है क्योंकि राज्य में हर साल करीब 4 लाख शादियां होती हैं और पीपल्स रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकोनॉमी के मुताबिक तमिलनाडु में मौजूद 65% परिवारों की सालाना आय पांच लाख रुपये से कम है. अब अगर 8 ग्राम सोने की कीमत देखें तो यह आज के भाव के मुताबिक 70 हजार से लेकर 1 लाख 21 हजार तक (14 कैरेट से 22 कैरेट तक का भाव) है. ऐसे में अगर लाखों परिवारों को  गोल्ड देना शुरू हुआ, तो सरकार पर हजारों करोड़ का अतिरिक्त बोझ आएगा.

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विजय की पूरी राजनीति का केंद्र युवा वर्ग है.

इसीलिए बेरोजगार ग्रेजुएट्स को 4000 रुपये, डिप्लोमा होल्डर्स को 2500 रुपये, 5 लाख युवाओं को पेड इंटर्नशिप और लोकल युवाओं को नौकरी देने वाली कंपनियों को टैक्स छूट जैसी योजनाएं सामने लाई गईं. सरकार का मानना है कि अगर युवा वर्ग को शुरुआती राहत और रोजगार का रास्ता दिखा, तो TVK लंबे समय तक राजनीतिक रूप से मजबूत रह सकती है.

विजय खुद को पुरानी द्रविड़ राजनीति से अलग दिखाने की कोशिश कर रही है. लेकिन अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए ज्यादा कर्ज लेने और अनियंत्रित खर्च करने जैसे बड़े खतरे मौजूद हैं क्योंकि रेवेन्यू अगर नहीं बढ़ा तो यह तमिलनाडु को आर्थिक परेशानियों में ढकेल देगा. जानकार कहते हैं कि फ्रीबीज तभी टिकेंगे जब उद्योग मजबूत हों, टैक्स कलेक्शन बढ़े और लगातार रोजगार पैदा हों. 

इसीलिए विजय बार-बार इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की बात कर रहे हैं. उन्हें पता है कि सिर्फ मुफ्त योजनाओं से सरकार नहीं चलती.

MGR मॉडल को नए जमाने में लाने की कोशिश

एम जी रामचंद्रन के बाद तमिलनाडु में कुछ फिल्म स्टार सत्ता तक जरूर पहुंचे, पर उस स्तर की जनभावना नहीं बना सके. विजय अब उसी रास्ते पर चलते दिख रहे हैं. बर फर्क ये है कि MGR के दौर में सपना था 'गरीबी से राहत' पाना तो विजय के समय यह सपना 'लोअर मिडिल क्लास से ऊपर उठने' का है.

और सीएम विजय की असली परीक्षा अब शुरू हुई है. चुनावी जीत मिल गई, सरकार का गठन भी हो गया. अब फाइलों, बजट, अधिकारियों और आर्थिक हकीकत की दुनिया शुरू हो चुकी है. फिल्मों में हीरो तीन घंटे में सिस्टम बदल देता है. सरकार में हर फैसला हजारों करोड़ मांगता है. ऐसे में अब पूरा तमिलनाडु यही देख रहा है कि क्या थलपति अपनी फिल्मों की तरह यहां भी जो कहा वो करके दिखाएंगे?

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