- पोप लियो चौदहवें ने बिना नाम लिए अमेरिकी और इजरायली नेताओं की युद्ध शुरू करने वाली नीतियों की आलोचना की
- पोप ने यीशु मसीह को शांति का राजा बताते हुए हिंसा के बजाय विनम्रता और त्याग को अपनाने का संदेश दिया
- पोप ने धर्म का उपयोग युद्ध को सही ठहराने के लिए न करने की चेतावनी दी
US Israel War against Iran: पिछले से महीने से मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईसाई समुदाय के सबसे बड़े धर्मगुरू पोप लियो चौदहवें ने बिना नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू पर निशाना साधा है. रविवार, 29 मार्च को पोप लियो चौदहवें ने पाम संडे के अपने संबोधन में शांति और अहिंसा का एक शक्तिशाली संदेश दिया. उन्होंने कहा कि भगवान उन नेताओं की प्रार्थनाएं स्वीकार नहीं करते जो युद्ध शुरू करते हैं और जिनके “हाथ खून से भरे होते हैं”. इसे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को शुरू करने वाले नेताओं की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है.
पोप ने क्या कहा
यीशु मसीह की पीड़ा (पैशन) पर विचार करते हुए पोप ने मसीह को “शांति का राजा” बताया. उन्होंने कहा कि यीशु मसीह ने हिंसा की जगह विनम्रता और त्याग को चुना, यहां तक कि तब भी जब उन्हें दुख और मृत्यु का सामना करना पड़ा. उन्होंने जोर देकर कहा कि यीशु का जीवन और उनके कार्य युद्ध और आक्रामकता के बिल्कुल विपरीत थे. पोप ने कहा, “जब यीशु क्रूस के मार्ग पर चलते हैं, तो हम उनके कदमों का अनुसरण करते हैं और मानवता के लिए उनके प्रेम पर चिंतन करते हैं.” उन्होंने यह भी बताया कि हिंसा का सामना होने के बावजूद यीशु ने हथियार उठाने से इनकार कर दिया था.
यीशु को शांति का प्रतीक बताते हुए पोप ने कहा कि यीशु मसीह लोगों के बीच की दीवारों को तोड़ने और मानवता को भगवान और एक-दूसरे के करीब लाने के लिए आए थे. उन्होंने यह भी कहा कि यीशु का गधे पर बैठकर यरूशलेम में प्रवेश करना विनम्रता और युद्ध के अस्वीकार का प्रतीक था.
बता दें कि ईसाई कैलेंडर में एक पवित्र दिन के रूप में पाम संडे ईसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे गहरी श्रद्धा और पारंपरिक जुलूसों के साथ मनाया जाता है. यह अवसर समुदाय के लिए पैशन वीक या होली वीक की शुरुआत भी दर्शाता है, जो लेंट के छठे और अंतिम सप्ताह को चिह्नित करता है.
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