
- जापान के सेंडाई शहर को पेड़ों का शहर, जापान का छिपा रत्न और सेमीकंडक्टर हब कहा जाता है.
- PM मोदी जापान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं, जहां वे टोक्यो में वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे और सेंडाई जाएंगे.
- सेंडाई शहर की स्थापना 1601 में समुराई देत मासमूने ने की थी, जिन्हें वन-आइड ड्रैगन के नाम से जाना जाता है.
आज आपको कहानी सुनाएंगे जापान के उस सेंडाई शहर की जिसे एक नहीं कई नामों से जाना जाता है. उसे पेड़ों का शहर कहा जाता है, उसे जापान का छिपा हुआ रत्न कहा जाता है, उसे जापान का पावर हाउस कहा जाता है, उसे जापान का सेमीकंडक्टर हब भी कहा जाता है. जब सेंडाई की बात होगी तो उस एक आंख वाले समुराई की भी बात होगी जिसने आज से 400 साल पहले इस शहर की नींव रखी थी. यह कहानी है एक ऐसे शहर की जिसने हर मुश्किलों को पार पाते हुए हर बार अपने पैरों पर खड़ा होना सीखा है.
लेकिन आपके मन में यह भी ख्याल आ रहा होगा कि हम आपको अचानक जापान के इस शहर की बात क्यों बता रहे हैं. दरअसल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान की दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार, 29 अगस्त को तोक्यो पहुंचे हैं. यहां पीएम मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर वार्ता तो करेंगे. साथ ही वो यात्रा के दूसरे दिन, पीएम मोदी और इशिबा बुलेट ट्रेन पर बैठकर सेंदाई शहर जाएंगे और वहां की सेमीकंडक्टर फैक्ट्री को देखेंगे.
जापान का ‘पेड़ों वाला शहर' जहां सेमीकंडक्टर उगते हैं!
जापान का छिपा हुआ रत्न, सेंडाई एक ऐसा बड़ा शहर है जिसमें एक छोटे शहर का एहसास है, जहां अभी भी पर्यटकों की भीड़ आपको नहीं मिलेगी. मियागी प्रान्त की राजधानी सेंडाई में मानों प्रकृति ने कोई खास कृपा की है. यहां जितना प्रकृति मेहरबान है, वहीं आधुनिकता को भी इसने अपने आप में समाहित किया है.
सेमीकंडक्टर हब के रूप में सेंडाई का उदय हुआ है. इस रोल के लिए इसका चयन रणनीतिक रूप से हुआ है. सेंडाई अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करने और अगली पीढ़ी के चिप विकास को बढ़ावा देने के लिए जापान की मजबूत सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, उन्नत बुनियादी ढांचे और सरकारी सपोर्ट का लाभ उठाता है. यहां कुशल वर्कफोर्स मौजूद है, यहां रिसर्च की क्षमताएं और लचीला बुनियादी ढांचा है. ये फैक्टर भी सेंडाई को अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर फैक्टरी की स्थापना के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं.
सेंडाई शहर बसाने वाला समुराई
सेंदाई शहर को समुराई देत मासमूने ने बसाया था. देत मासमूने 16वीं और 17वीं शताब्दी का एक शक्तिशाली और प्रसिद्ध डेम्यो (सामंती स्वामी) थे. उन्होंने 1601 में इस शहर की स्थापना की थी. उनकी दूरदर्शी नगर योजना और सांस्कृतिक प्रभाव आज भी सेंडाई को आकार दे रहे हैं. उन्हें अक्सर "डोकुगनरीयू" या "वन-आइड ड्रैगन" कहा जाता था क्योंकि उन्होंने बचपन में चेचक के कारण अपनी दाहिनी आंख खो दी थी. अपनी सैन्य उपलब्धियों के अलावा, मासमूने ने संस्कृति को भी पोषित किया. उन्होंने एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत छोड़ी, जो सेंडाई के ऐतिहासिक महलों, मंदिरों और तीर्थस्थलों में दिखाई देती है.
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