- मक्का समझौते के तहत एक देश पर हमला सभी समझौते में शामिल देशों पर हमला माना जाएगा, जिससे पाकिस्तान दबाव में है
- पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर संघर्ष सऊदी राजधानी तक पहुंचा तो समझौता लागू हो सकता है
- अमेरिका पाकिस्तान और तुर्की को हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के लिए उसका रहा, हूती को ईरान का सपोर्ट है
सऊदी अरब और तुर्की के साथ इस्लामिक नाटो कहे जाने वाले मक्का समझौते में शामिल पाकिस्तान प्रेशर में है. ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोही सऊदी अरब पर हमला कर रहे हैं और ऐसे में पाकिस्तान पर दबाव है कि वह भी इस जंग में कूदे और हूतियों पर हमला करे. वजह है कि मक्का समझौते के अनुसार एक देश पर हमला, समझौते में शामिल सभी देशों पर हमला माना जाएगा. ऐसे में अमेरिका भी पाकिस्तान को उकसाने में लगा है कि वह हूतियों पर हमला करे.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी मजबूरन चेतावनी दे रहे हैं है कि अगर यमन में चल रहा संघर्ष फैलकर सऊदी अरब की राजधानी रियाद तक पहुंचता है, तो यह समझौता लागू हो सकता है. एक बड़ी रिपोर्ट यह भी है कि पाकिस्तान ने ईरान को हूतियों पर लगाम लगाने की चेतावनी दी है.
पाकिस्तान ने ईरान को हूतियों पर लगाम लगाने की चेतावनी दी
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट है कि पाकिस्तान ने ईरान को सऊदी अरब की ओर से चेतावनी दी है कि वह यमन में अपने सहयोगी हूती विद्रोहियों पर लगाम लगाए. रॉयटर्स ने यह रिपोर्ट सऊदी, पाकिस्तानी और ईरानी सूत्रों के हवाले से छापी है. सालों तक सऊदी अरब और ईरान के साथ रिश्तों में संतुलन बनाए रखने के बाद पाकिस्तान का दखल हूती हमलों की गंभीरता को दिखाता है. रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने बताया है कि पाकिस्तान की ओर से ईरान को मैसेज दिया जा रहा है कि हूतियों पर लगाम लगाओ, वरना छद्म युद्ध (प्रॉक्सी वॉर) के एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा संकट में बदलने का खतरा है.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री क्या बोल रहे?
पाकिस्तान के जियो न्यूज के कार्यक्रम में एंकर ने सऊदी अरब में हुए हूती हमलों का जिक्र किया. उन्होंने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से पूछा कि क्या ऐसी स्थिति में यह रक्षा समझौता लागू किया जा सकता है. यानी क्या पाकिस्तान सऊदी को बचाने के लिए सेना का इस्तेमाल करेगा. इसपर ख्वाजा आसिफ ने कहा कि हां, ऐसा हो सकता है. उन्होंने कहा कि समझौते को लेकर कोई भ्रम नहीं है. इसमें साफ लिखा है कि एक देश के खिलाफ हमला, तीनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा.
आसिफ ने यह भी कहा कि यह समझौता किसी पर हमला करने के इरादे से नहीं किया गया है. उन्होंने कहा, “अगर तीनों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो तीनों देश मिलकर उसका जवाब देंगे.”
अमेरिका पाकिस्तान को उकसाने में लगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास और उनके पार्टी के सांसद जोए विलसन ने पाकिस्तान और तुर्की को मैसेज दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, "मक्का डिफेंस अलायंस का कहना है कि किसी एक पर हमला सभी पर हमला है- अब तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के लिए हुतियों को खत्म करने का समय आ गया है. यमन को आजाद करो."
क्या यमन में घुसेगी पाकिस्तानी सेना?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी सूत्र ने बताया कि सऊदी अधिकारियों ने रियाद में पाकिस्तान और तुर्की के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की ताकि वे अपने सैन्य जवाब के बारे में तालमेल बिठा सकें. सूत्र ने आगे कहा कि तीनों देश इस बात पर सहमत हुए कि उनके सैनिक यमन में प्रवेश नहीं करेंगे और कोई भी जवाबी कार्रवाई सऊदी क्षेत्र से ही की जाएगी.
वहीं पाकिस्तान के एक दूसरे सूत्र ने कहा कि जवाबी हमलों में शामिल होने का कोई फैसला नहीं किया गया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सऊदी के साथ उनका सैन्य समझौता रक्षात्मक है और यह सिर्फ सऊदी इलाके की सुरक्षा तक ही सीमित है. सूत्र ने बताया कि पाकिस्तानी सेना सऊदी अरब के अंदर सैन्य, तकनीकी, जमीनी या हवाई मदद तो दे सकती है, लेकिन विदेशी जमीन पर लड़ाई वाले अभियानों में हिस्सा नहीं लेगी.
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