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धरती पर पहला इंसान कैसा दिखता था? 3 लाख साल बाद चेहरा आया सामने

वैज्ञानिकों ने मोरक्को में मिली 3 लाख साल से अधिक पुरानी जीवाश्म खोपड़ी का इस्तेमाल किया है और धरती पर सबसे पुराने ज्ञात होमो सेपियंस का फेस फिर से तैयार किया है. यहां समझिए कि खोपड़ी से ही उस इंसान की चमड़ी और बालों के रंग का पता कैसे लगाया गया?

धरती पर पहला इंसान कैसा दिखता था? 3 लाख साल बाद चेहरा आया सामने
धरती पर सबसे पुराने ज्ञात होमो सेपियंस का चेहरा इनमें से एक ही है

3 लाख से भी ज्यादा साल पहले धरती पर चलने वाले पहले इंसान कैसे दिखते थे? इस सवाल का जवाब मिल गया है. यह कोई हवा में फेंका तीर नहीं है, इसके पीछे साइंस के पावर का इस्तेमाल किया गया है और हम इंसानों के पहले पूर्वज की शक्ल अब हमारे सामने है.1960 के दशक में जब पश्चिमी मोरक्को के जेबेल इरहौड में जमीन के अंदर से खनिज निकाला जा रहा था तब उस दौरान एक जीवाश्म खोपड़ी मिली थी. वह 3 लाख साल पहले के इंसान की खोपड़ी थी. अब उस खोपड़ी की मदद से उस व्यक्ति के चेहरे-मोहरे को डिजिटल रूप से फिर से तैयार किया गया है.

अनुमान से भी पुरानी निकली थी वह खोपड़ी

जब 1960 के दशक में यह खोपड़ी मिली थी तक शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा कि ये अवशेष निएंडरथल के हैं. निएंडरथल आधुनिक इंसानों की सबसे करीबी विलुप्त मानव प्रजाति है जो लगभग 4 लाख से 40 हजार साल पहले यूरेशिया (यूरोप और पश्चिम एशिया) में रहती थी. लेकिन 2017 में दोबारा जांच करने पर पता चला कि ये अब तक मिले सबसे पुराने होमो सेपियंस के अवशेष थे. जानकारों का कहना है कि करीब 3,15,000 साल पहले, यानी इंसानों के अफ्रीका से बाहर निकलने से भी पहले भी वे काफी हद तक आज के इंसानों जैसे ही दिखते थे.

इस रीक्रिएशन में इस्तेमाल की गई खोपड़ी 1960 के दशक में मोरक्को में मिली थीं (फोटो- MDPI.com / Heritage)

इस रीक्रिएशन में इस्तेमाल की गई खोपड़ी 1960 के दशक में मोरक्को में मिली थीं (फोटो- MDPI.com / Heritage)

द टेलीग्राम की रिपोर्ट के अनुसार फोरेंसिक फेशियल रिकंस्ट्रक्शन यानी चेहरे की बनावट को फिर से तैयार करने की टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनिया के जाने-माने एक्सपर्ट सिसरो मोरेस ने इस काम को लीड किया है. उन्होंने कहा कि 3 लाख साल पहले के भी इंसान को अगर भीड़ के बीच मॉडर्न कपड़ों में देखा जाए, तो शायद पहली नजर में कोई उन पर ध्यान भी न दे. उन्होंने कहा कि करीब से देखने पर ही चेहरे की बनावट में मामूली अंतर पता चलेगा, जैसे कि भौंहों का ज्यादा उभरा हुआ होना और चेहरे का आगे की ओर ज्यादा निकला हुआ होना.

कैसे बनाया गया चेहरा? इसे अश्वेत ही क्यों बनाया गया?

रिपोर्ट के अनुसार इस खोपड़ी के चेहरे को रिक्रिएट बनाने के लिए, एक्सपर्ट्स ने जर्मनी के लीपजिग में स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपोलॉजी द्वारा तैयार किए गए जेबेल इरहौड खोपड़ी के 3D डिजिटल रिकंस्ट्रक्शन का इस्तेमाल किया. उन्होंने अफ्रीका के लोगों के डेटासेट के आधार पर सॉफ्ट टिश्यू और शारीरिक बनावट की डिटेल्स जोड़ीं. टीम को आधुनिक इंसानों की तुलना में चेहरे के आकार में कुछ बारीक अंतर मिले, जैसे कि ज्यादा उभरी हुई ठुड्डी, चौड़ी नाक और सिर का बड़ा घेरा.

बिना बालों और दाढ़ी वाले चेहरे का एक ग्रेस्केल वर्जन भी तैयार किया गया (फोटो- MDPI.com/Heritage)

बिना बालों और दाढ़ी वाले चेहरे का एक ग्रेस्केल वर्जन भी तैयार किया गया (फोटो- MDPI.com/Heritage)

रिसर्च में चेहरे के दो वर्शन तैयार किए गए. एक ग्रेस्केल में, ताकि अंदरूनी शारीरिक बनावट को दिखाया जा सके, और दूसरा गहरे रंग की चमड़ी और बालों वाला. वैसे खोपड़ी से चमड़ी के रंग, बालों या आंखों के रंग का कोई सबूत नहीं मिलता. फिर भी टीम ने गहरे रंग के बाल और दाढ़ी जोड़ी. इसकी वजह क्या थी. दरअसल पुराने और आधुनिक इंसानों पर पहले हुई स्टडीज के आधार पर, लगभग 3.15 लाख साल पहले उत्तरी अफ्रीका के किसी व्यक्ति के लिए इन्हें संभावित विशेषताएं माना गया.

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