
पाकिस्तान में आतंकवाद से संबंधित घटनाओं में फांसी की सजा पर से रोक हटने के बाद 55 कैदियों को फांसी देने की तैयारी की जा रही है। पेशावर के एक स्कूल पर आतंकवादी हमले के बाद यह तैयारी की जा रही है, जिसमें 148 लोगों की हत्या कर दी गई। इनमें अधिकतर बच्चे थे।
आतंकवाद और देश में गंभीर अपराधों से संबंधित अन्य मामलों में 522 अपराधियों को फांसी की सजा मिली हुई है। इसमें 11 ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें सैन्य अदालत ने दोषी करार दिया है।
द न्यूज ने आज खबर दी कि देश के पंजाब प्रांत में सबसे ज्यादा 465 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इसके बाद खबर पख्तूनख्वा में 30, सिंध में 14 और बलूचिस्तान में 13 अपराधियों को फांसी की सुनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने मौत की सजा प्राप्त 55 कैदियों की दया याचिका खारिज कर चुके हैं।
पाकिस्तान में 2008 से ही असैन्य अपराधियों की फांसी की सजा पर वस्तुत: रोक थी। हालांकि आतंकवाद से संबंधित मामलों में मौत की सजा पर प्रतिबंध बुधवार को खत्म कर दिया गया।
प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पेशावर में बुधवार को सर्वदलीय बैठक में कहा कि मौत की सजा पर निषेध खत्म कर दिया गया है। शरीफ ने कहा, 'कल की घटना बहुत ही दुखद है। ये बलिदान जाया नहीं जाएंगे और हम सभी पाकिस्तान से आतंकवाद का पूरी तरह खात्मा चाहते हैं।'
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