विज्ञापन
This Article is From Feb 11, 2026

PAK संसद में नेताओं के दर्शन दुर्लभ, PM शहबाज और बड़े नेता भूल गए नेशनल असेंबली का रास्ता!

फ्री एंड फेयर इलेक्शन नेटवर्क (FAFEN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो नेशनल असेंबली के 23वें सेशन के दौरान एक भी सिटिंग में शामिल नहीं हुए.

PAK संसद में नेताओं के दर्शन दुर्लभ, PM शहबाज और बड़े नेता भूल गए नेशनल असेंबली का रास्ता!
  • नेशनल असेंबली के 23वें सत्र में पीएम शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो ने एक भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया
  • 332 सदस्यों में से 56 सांसद पूरे सत्र से गायब रहे, जबकि 276 सांसद कम से कम एक बैठक से गैरहाजिर थे
  • कैबिनेट मंत्रियों में से केवल एक मंत्री सभी बैठकों में शामिल हुए, जबकि सात मंत्री किसी भी बैठक में नहीं पहुंचे

पाकिस्तान कहने को एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन वहां लोकतंत्र का क्या हाल है, इसकी पोल एक ताजा रिपोर्ट से खोल जाती है. हालत ये है कि सरकार और विपक्ष के सांसद ही नहीं, खुद प्रधानमंत्री भी संसद में दर्शन दुर्लभ हो गए हैं. एक रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी नेशनल असेंबली के 23वें सेशन के दौरान एक भी सिटिंग में शामिल नहीं हुए.

17 फीसदी सांसद पूरे सत्र से गायब

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के 23वें सत्र में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया. फ्री एंड फेयर इलेक्शन नेटवर्क (FAFEN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सत्र 12 जनवरी से 22 जनवरी तक चला जिसमें कुल 332 सदस्यों में से 276 कम से कम एक बैठक से गैरहाजिर रहे. 56 सांसदों (17 फीसदी) के तो पूरे सत्र में दर्शन नहीं हुए.

रिपोर्ट में प्रमुख नेताओं की संसद में गैरमौजूदगी पर चिंता जताते हुए बताया गया प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अलावा पूर्व पीएम नवाज शरीफ और पीपीपी चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी भी पूरे सत्र से गायब रहे. कैबिनेट मंत्रियों में से केवल एक संघीय मंत्री बलूचिस्तान अवामी पार्टी के खालिद हुसैन मगसी ने सभी बैठकों में हिस्सा लिया, जबकि सात मंत्री किसी भी बैठक में नहीं पहुंचे.

'खस्ताहाल देश में लोकतंत्र बना मजाक'

संसद जाने की अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी से दूर भागते नेताओं की ये स्थिति तब है, जब देश आर्थिक सुधार और राजनीतिक ध्रुवीकरण की समस्या से जूझ रहा है. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने संसद से सांसदों की लगातार गैरहाजिरी को लोकतंत्र का मजाक बताया और कहा कि ये लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खोखला बना रही है. पीएम शहबाज शरीफ एक भी बैठक में शामिल नहीं हुए. न ही पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी मौजूद रहे. जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग संसद को विकल्प मान लें तो बाकी मंत्री-नेताओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ना तय है.

ये भी देखें- UP के बजट के आगे भी नहीं टिकता पाकिस्तान,खुद पड़ोसी मुल्क के MP ने की थी तारीफ, देखिए वीडियो

अपने फायदे के बिल पर नेताओं की भीड़

पाकिस्तानी सांसदों के पास जनता के कामों के लिए संसद जाने का वक्त भले न हो, लेकिन जब बात उनके हित के लिए आती है तो सभी इकट्ठा हो जाते हैं. रिपोर्ट में एक बिल का जिक्र करते हुए बताया गया है कि संसद सदस्यों के हित वाले इस बिल पर सबसे ज्यादा 222 सदस्य इकट्ठा हुए थे. द ट्रिब्यून के संपादकीय में आगे कटाक्ष करते हुए लिखा गया कि ऐसा लगता है कि कानून बनाने वाले जब अपने फायदे के लिए कानून बनाते हैं, तभी असेंबली में मौजूद रहते हैं. जब रुटीन गवर्नेंस या एग्जिक्यूटिव्स की निगरानी दांव पर लगी हो, तब उन्हें कोई सरोकार नहीं.

पिछले सत्र में एक-चौथाई सांसद गायब

पाकिस्तानी संसद से सांसदों की गैरहाजिरी कोई नई बात नहीं है. FAFEN के अनुसार, पिछले साल सितंबर में 19वें सत्र के दौरान भी एक चौथाई सदस्य पूरे सेशन में गायब रहे थे. यह स्थिति पाकिस्तान की संसदीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाती है, जहां सांसद ही नहीं, शीर्ष नेता भी संसद से दूरी बनाए रखते हैं. जानकारों का मानना है कि इससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है.

ये भी देखें- ऑपरेशन सिंदूर में PAK के न्यूक्लियर डिपो किराना हिल्स पर हुआ था हमला? वायुसेना ने बता दी सच्चाई

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Pakistan Parliament, Pakistan National Assembly, Shahbaz Sharif
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com