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This Article is From Mar 20, 2026

कंगाल होने की कगार पर पाकिस्तान! मिडिल ईस्ट जंग ने तोड़ी कमर, तेल और गैस की कीमतों में लगी आग

फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद इसके प्रभाव पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर हैं. तेल की कीमत में 55 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि और गैस की कीमत में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी से महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में और वृद्धि होगी.

कंगाल होने की कगार पर पाकिस्तान! मिडिल ईस्ट जंग ने तोड़ी कमर, तेल और गैस की कीमतों में लगी आग
  • अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण पाकिस्तान की आर्थिक अस्थिरता गंभीर स्तर पर पहुंच गई है.
  • पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय 1812 डॉलर, गरीबी दर 28.9 प्रतिशत और वयस्क साक्षरता दर 60 प्रतिशत है.
  • पाकिस्तान का व्यापार घाटा दस अरब डॉलर से अधिक है और विदेशी मुद्रा भंडार केवल 16.5 अरब डॉलर है.
नई दिल्ली:

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के बाद तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और व्यापार घाटे में उछाल के कारण पाकिस्तान की आर्थिक अस्थिरता एक गंभीर स्तर पर पहुंच गई है. लाहौर स्थित 'फ्राइडे टाइम्स' में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय, आर्थिक विकास दर, घटते निर्यात और कम विदेशी मुद्रा भंडार के संदर्भ में पाकिस्तान गंभीर संकट में है.

लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान की आर्थिक अस्थिरता उसके 3.1 प्रतिशत के जीडीपी विकास दर और मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) पर 193 देशों में 168वें स्थान पर है. पाकिस्तान की 1,812 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय, 28.9 प्रतिशत गरीबी दर, 60 प्रतिशत वयस्क साक्षरता दर, 2.52 करोड़ स्कूल से बाहर बच्चों और 15-24 आयु वर्ग में 12.8 प्रतिशत बेरोजगारी दर है.

ये आंकड़े दक्षिण एशिया में सबसे खराब हैं और यह दर्शाते हैं कि शासक वर्ग आर्थिक अस्थिरता को कम करने में विफल रहा है. पाकिस्तान का व्यापार घाटा 10 अरब डॉलर से अधिक है, निर्यात घट रहे हैं और विदेशी मुद्रा भंडार भी संतोषजनक नहीं है, जिसमें स्टेट बैंक के पास केवल 16.5 अरब डॉलर हैं.

फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद इसके प्रभाव पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर हैं. तेल की कीमत में 55 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि और गैस की कीमत में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी से महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में और वृद्धि होगी. बिजली और परिवहन की लागत बढ़ने से पाकिस्तान की 250 मिलियन आबादी की मुश्किलें और बढ़ेंगी.

लेख में यह भी कहा गया है कि जब कोई देश आर्थिक रूप से कमजोर हो और अपने लगभग 80 वर्षों के अस्तित्व में आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ाने में असफल रहा हो, तो इसका मतलब है कि वह अपने लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में विफल रहा है. इसमें स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल, बेहतर आवास, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता शामिल है.

संघीय बजट का बड़ा हिस्सा बाहरी कर्ज चुकाने या रक्षा खर्चों में चला जाता है. केवल लगभग 20 प्रतिशत राशि ही प्रशासन चलाने और 18वें संशोधन के तहत प्रांतों को देने के लिए बचती है. विकासात्मक खर्चों के लिए कोई पैसा नहीं बचता, जिससे आंतरिक और बाहरी उधारी बढ़ती जाती है.

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