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पाकिस्तान में जालिम सेना के खिलाफ आवाज उठाने की सजा देखिए, पति-पत्नी को 17 साल की जेल

पाकिस्तान में 32 साल वकील इमान मजारी देश के कुछ सबसे संवेदनशील मामलों को बिना कोई फीस लिए लड़ती हैं यानी प्रो-बोनो वकील हैं. इन केसों में बलूचों के जबरन गायब होने के साथ-साथ बलूचों के शीर्ष कार्यकर्ता महरंग बलूच का बचाव भी शामिल है.

पाकिस्तान में जालिम सेना के खिलाफ आवाज उठाने की सजा देखिए, पति-पत्नी को 17 साल की जेल
इमान मजारी और उनके साथी वकील पति को 17-17 जेल की सजा
  • पाकिस्तान की एक अदालत ने वकील इमान मजारी और उनके पति को देश-विरोधी सोशल मीडिया पोस्ट के आरोप में सजा सुनाई
  • मजारी और उनके पति को साइबर आतंकवाद और झूठी जानकारी प्रसार के तीन आरोपों में कुल 17-17 साल की जेल की सजा मिली
  • इमान मजारी बिना फीस के संवेदनशील मानवाधिकार मामलों में वकालत करती हैं और बलूच कार्यकर्ताओं का बचाव भी करती हैं
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पाकिस्तान की एक अदालत ने शनिवार, 24 जनवरी को एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता वकील और उनके पति को "देश-विरोधी" सोशल मीडिया पोस्ट डालने के आरोप में कुल मिलाकर 17-17 साल की जेल की सजा सुनाई. इस्लामाबाद की एक अदालत के अनुसार 32 साल वकील और पाकिस्तान की सेना की मुखर आलोचक इमान मजारी ने अपने X अकाउंट पर "अत्यधिक आक्रामक" कंटेंट डाले हैं.  अदालत के एक बयान में कहा गया है कि मजारी और उनके पति, साथी वकील हादी अली चट्ठा को कुल मिलाकर 17-17 साल तक जेल में रहना होगा.

अदालत के डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि उन दोनों को तीन आरोपों में जेल की सजा सुनाई गई - जिनमें "साइबर आतंकवाद" और "जानबूझकर झूठी और नकली जानकारी का प्रसार (ब्रॉडकास्ट करना)" शामिल है. एक मामले में 5 साल, दूसरे में 10 साल और तीसरे में 2 साल की सजा सुनाई गई है. सजा के ऐलान के एक दिन पहले ही उस समय दोनों को पाकिस्तानी पुलिस ने फिर से गिरफ्तार किया था जब वे आरोपों का सामना करने के लिए इस्लामाबाद में एक अदालत की सुनवाई के लिए जा रहे थे.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस वैन मजारी को अदालत ले जा रहे बार एसोसिएशन के वाहन को अंडरपास पर रोकने से पहले एस्कॉर्ट कर रही थी. यहां तक कि नकाबपोश सुरक्षा अधिकारियों ने पत्रकारों को गिरफ्तारी का वीडियो बनाने से रोका भी.

पाकिस्तान में जालिम सेना के खिलाफ उठाती हैं आवाज

न्यूज एजेंसी एएफफी की रिपोर्ट के अनुसार मजारी पाकिस्तान की पूर्व मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी (मां) की बेटी हैं, जबकि उनके दिवंगत पिता पाकिस्तान के टॉप के बाल रोग विशेषज्ञ थे. मजारी देश के कुछ सबसे संवेदनशील मामलों को बिना कोई फीस लिए लड़ती हैं यानी प्रो-बोनो वकील हैं. इन केसों में बलूचों के जबरन गायब होने के साथ-साथ बलूचों के शीर्ष कार्यकर्ता महरंग बलूच का बचाव भी शामिल है. मजारी ने ईशनिंदा के आरोपियों का भी केस लड़ा है. साथ ही उन अफगानों का भी प्रतिनिधित्व किया, जो सेना और पुलिस की हिंसक कार्रवाई का सामना करते हैं. 

पाकिस्तानी संसद के विपक्षी नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने कहा कि दोनों वकीलों को "केवल सोशल मीडिया पोस्ट के लिए दोषी ठहराया गया था, जिसमें उन्होंने सरकारी तंत्र के दुरुपयोग की आलोचना की थी और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की वकालत की थी". उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "यह फैसला एक डरावना संदेश भेजता है कि शांतिपूर्ण वकालत और सत्ता की आलोचना का गंभीर दमन किया जाएगा."

इमान मजारी ने मंगलवार को एएफपी को बताया था कि उन्हें और उनके पति को अज्ञात पुलिस मामलों में गिरफ्तारी का डर है, उन्होंने कहा कि यह कदम "गंभीर अन्याय" होगा. साइबर अपराध मामले में जमानत मिलने के बाद, दोनों पति-पत्नी मंगलवार से इस्लामाबाद हाई कोर्ट के परिसर में ही बंद थे और एक वकील संघ की इमारत में रातें बिता रहे थे.

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