एक अस्पताल, जहां बच्चों की जान बचनी चाहिए थी, वहीं उन्हें ऐसी बीमारी दे दी गई जिसका इलाज आज भी पूरी तरह संभव नहीं है. पाकिस्तान के एक सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही ने दर्जनों मासूमों की जिंदगी बदल दी. एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल किया गया और उसका नतीजा यह हुआ कि कम से कम 78 बच्चे HIV पॉजिटिव हो गए. इनमें से 6 बच्चों की मौत भी हो चुकी है. आसपास के इलाकों में 10,500 लोगों की जांच हुई, जिनमें कुल 120 लोग HIV संक्रमित मिले. कराची के कुलसुम बाई वालिका अस्पताल में जो हुआ, उसने न सिर्फ लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि पाकिस्तान के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मौत की सौगात देने वाला हॉस्पिटल
पाकिस्तानी मीडिया, जीयो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लेबर और सोशल प्रोटेक्शन मिनिस्टर सईद गनी ने मंगलवार, 14 जुलाई को पुष्टि की कि कराची के कुलसूम बाई वालिका अस्पताल से जुड़े HIV के प्रकोप से प्रभावित छह बच्चों की मौत हो गई है. सिंध की राजधानी कराची में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए गनी ने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ेगी और स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल एक्सपर्ट्स, जिनमें प्राइवेट सेक्टर के स्पेशलिस्ट भी शामिल हैं, के साथ मिलकर काम कर रही है.
मंत्री ने बताया कि लोकपाल के निर्देश पर गठित जांच समिति ने 19 जून को इस मामले में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, प्रांतीय अधिकारियों ने कुल 37 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है.
हॉस्पिटल ने कैसे किया संक्रमित?
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार कुल 331 बच्चे नवंबर 2024 और अक्टूबर 2025 के बीच शहर में HIV पॉजिटिव पाए गए थे. HIV संक्रमण फैलने की वजह साफ थी कि कराची के हॉस्पिटल्स में एक ही सिरिंज यानी इंजेक्शन का इस्तेमाल कई लोगों पर किया जा रहा था. अगर एक को भी HIV संक्रमण था तो वह दूसरों में फैल गया.
बीबीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 के आखिर में, जब एक प्राइवेट क्लिनिक के डॉक्टर ने बीमारी के फैलने का संबंध THQ टौंसा अस्पताल से जोड़ा, तो स्थानीय अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई का वादा किया था और मार्च 2025 में अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को सस्पेंड कर दिया. लेकिन बीबीसी की जांच से पता चला है कि खतरनाक तरीके से इंजेक्शन लगाने का काम महीनों बाद भी जारी रहा.
साल 2025 के आखिर में THQ टौंसा में 32 घंटे की अंडरकवर फिल्मिंग के दौरान पाया गया कि 10 अलग-अलग मौकों पर दवा की मल्टी-डोज शीशियों (vials) के लिए सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल किया गया, जिससे अंदर की दवा के दूषित होने का खतरा पैदा हो गया. इनमें से चार मामलों में देखा गया कि एक ही शीशी से दवा निकालकर दूसरे बच्चे को दी गई.
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