- ओमान के तट पर, होर्मुज के पास एक तेल टैंकर पर किसी "अज्ञात चीज" (प्रोजेक्टाइल) से हमला हुआ, जिससे उसमें आग लगी
- UKMTO ने कहा कि किसी की मौत होने या पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की कोई खबर नहीं है
- "जहाजों को सावधानी से गुजरने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना UKMTO को देने की सलाह दी जाती है"- एजेंसी
अमेरिका और ईरान में भले जंग खत्म हो चुका है लेकिन होर्मुज का पानी खौलना बंद नहीं हो रहा. ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने बताया कि सोमवार, 6 जुलाई को ओमान के तट पर, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक तेल टैंकर पर किसी "अज्ञात चीज" (प्रोजेक्टाइल) से हमला हुआ, जिससे उसमें आग लग गई. यह घटना दुनिया के सबसे अहम एनर्जी शिपिंग रूट में से एक यानी होर्मुज के पास हुई है, जिसे ईरान ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जंग में अपने हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था. अभी अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर है और स्थायी शांति समझौते के लिए कोशिशें चल रही हैं.
होर्मुज के पास क्या हुआ है?
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने बताया कि यह घटना ओमान के लिमाह से आठ नॉटिकल मील पूर्व में है. UKMTO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "दक्षिण की ओर जाते समय एक टैंकर के बाईं ओर (पोर्ट साइड) एक अज्ञात चीज टकराने की खबर मिली है, जिससे आग लग गई."
UKMTO WARNING 080-26 - ATTACK
— UKMTO Operations Centre (@UK_MTO) July 6, 2026
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फिर से ध्यान दिलाएं कि मीडिल ईस्ट की जंग के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव का केंद्र था, जब ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते को ब्लॉक कर दिया था और कई कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए थे, जिससे दुनिया भर में तेल-गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं. अमेरिका ने भी नाकेबंदी करके जवाब दिया और बाद में ईरानी सेना पर कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए ईरान के खिलाफ जवाबी हमले किए. फिर पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने और रणनीतिक रूट को फिर से खोलने के मकसद से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद समुद्री आवाजाही फिर से शुरू हुई थी.
ईरान ने जोर देकर कहा है कि होर्मुज में युद्ध से पहले वाली व्यवस्था में वापसी नहीं होगी, अब उसका होर्मुज पर कंट्रोल होगा. ईरानी ने साफ-साफ चेतावनी दी है कि जहाजों को उसके द्वारा मंजूर कॉरिडोर का ही इस्तेमाल करना है. होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, खासकर एशिया में तेल-गैस एक्सपोर्ट के लिए मुख्य समुद्री रास्ता है. US एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 2024 में हर दिन इस जलमार्ग से लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा है.
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