अफ्रीकी देश नाइजर की राजधानी नियामी में अल-कायदा से जुड़े आतंकवादियों ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला कर दिया. इस आतंकी हमले में नाइजर के कम से कम 11 सैनिकों की मौत हो गई और 2 नागरिकों की भी जान चली गई. हालांकि, सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए जवाबी कार्रवाई की और 22 हमलावरों को मौके पर ही ढेर कर दिया. यह हमला कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एयरपोर्ट और उसके आस-पास के इलाकों में कई घंटों तक लगातार गोलीबारी की आवाजें गूंजती रहीं.
यह हमला नाइजर के सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक दियोरी हमामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ. इस हमले की जिम्मेदारी अल-कायदा की साहेल शाखा 'जेएनआईएम' (JNIM) ने ली है. आतंकी संगठन ने माना है कि उसने हवाई अड्डे और उसके पास स्थित सैन्य अड्डे को निशाना बनाकर यह आत्मघाती हमला किया था. नाइजर के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, कुछ हमलावरों ने आत्मघाती बेल्ट पहन रखी थी.
टैक्सी से आए थे आतंकी
चश्मदीदों के मुताबिक, गुरुवार सुबह करीब 6 बजे एयरपोर्ट के मुख्य सुरक्षा चेकपॉइंट के पास अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई. सूत्रों ने बताया कि आतंकी एक टैक्सी में सवार होकर आए थे और जैसे ही उन्हें सुरक्षा घेरे पर रोका गया, उन्होंने गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. इसके बाद सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई. इस संकट की घड़ी में स्थानीय नागरिकों और बाइक-टैक्सी ड्राइवरों ने भी गजब का साहस दिखाया. स्थानीय लोग लाठी-डंडों और हथियारों के साथ सुरक्षाबलों की मदद के लिए सड़कों पर उतर आए और आतंकियों को खदेड़ने में जुट गए.
छह महीने में दूसरा बड़ा हमला
नियामी का यह एयरपोर्ट कितना संवेदनशील है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ठीक छह महीने पहले भी यहां इसी तरह का एक बड़ा हमला हुआ था. उस समय 'इस्लामिक स्टेट इन द साहेल' (EIS) के आतंकियों ने एयरपोर्ट और ड्रोन बेस को निशाना बनाया था. इस हमले को नाइजर की सेना ने रूसी सैनिकों की मदद से नाकाम किया था.
नाइजर पिछले तीन सालों से सैन्य शासन के अधीन है. साल 2023 में हुए तख्तापलट के बाद सत्ता में आए जनरल तियानी लगातार देश से आतंकवाद खत्म करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों के आगे उनकी चुनौतियां कम नहीं हो रही हैं. पिछले एक दशक से पूरा पश्चिम अफ्रीका (नाइजर, बुर्किना फासो और माली) इस जिहादी हिंसा से जूझ रहा है. अपनी सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए नाइजर ने फ्रांस से दूरी बना ली है और अब वह रूस, ईरान और तुर्की जैसे देशों से सैन्य मदद ले रहा है.
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