भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर बेचने पर चल रही बहस के बीच पड़ोसी देश नेपाल ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा लिए हैं. नेपाल ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड मेट्रोलॉजी ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के लिए एक ड्राफ्ट स्टैंडर्ड जारी किया है. इस आदेश के तहत नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) को पेट्रोल में 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाना होगा. यानी नेपाल में E10 पेट्रोल लाने की तैयारी है. नेपाल सरकार का कहना है कि वह कैबिनेट के फैसले से पेट्रोल में कितना इथेनॉल मिलाना है, इसके अनुपात में बदलाव कर सकती है.
E10 पेट्रोल नेपाल की तैयारी
नेपाली अखबार द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट इस प्रस्तावित स्टैंडर्ड में इथेनॉल उत्पादन के सोर्स और तकनीकों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है. इसमें पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल के स्टोरेज, उसकी लेबलिंग और क्वालिटी कंट्रोल के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं. इसके अनुसार चूंकि इथेनॉल बहुत जल्दी आग पकड़ने वाला होता है, इसलिए ड्राफ्ट में इसे सुरक्षित, सूखे और लीक-प्रूफ ड्रम या टैंक में रखने की जरूरत बताई गई है.
हर कंटेनर पर इथेनॉल किस कंपनी ने बयाना है, इसकी जानकारी, बैच नंबर, मात्रा और उत्पादन किस तकनीक से की गई है, उसकी जानकारी देनी होगी. कहा गया है कि इथेनॉल पूरी तरह से साफ, पारदर्शी होना चाहिए. इसमें कोई भी ठोस कण नहीं होना चाहिए. नेपाल सरकार के इस ड्राफ्ट के अनसुार मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे हानिकारक पदार्थों को डीनेचुरेंट के तौर पर इस्तेमाल करने पर भी रोक लगाई गई है. ये पदार्थ इथेनॉल में मिलाए जाते हैं और वाहन के इंजन, रबर पाइप और फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
नेपाल सरकार का मकसद क्या है?
यह कदम 5 जनवरी, 2026 को नेपाल कैबिनेट के उस फैसले के बाद उठाया गया है जिसमें "इथेनॉल मिस्क पेट्रोल के इस्तेमाल पर आदेश, 2026" को मंजूरी दी गई थी. यह आदेश 12 मार्च, 2026 को नेपाल गजट में प्रकाशित होने के बाद लागू हुआ.
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल सरकार का मकसद स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना, नौकरियां पैदा करना और तेल में इथेनॉल मिलाकर दूसरे देशों से आयात होने वाले पेट्रोल पर निर्भरता कम करना है. नेपाल सरकार इस बात पर भी नजर रखे हुई है कि कहीं इथेनॉल बनाने के चक्कर में देश के अंदर अनाज की ही कमी न हो जाए. इसलिए ड्राफ्ट में इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के तौर पर खाने योग्य अनाज के इस्तेमाल पर भी रोक लगाया गया है.
कहा गया है कि इथेनॉल बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर चीनी उद्योगों से निकलने वाला शीरा (मोलासेस), नेपियर घास, कृषि और वन अपशिष्ट बायोमास, धान का पुआल, मक्के के डंठल, गेहूं की भूसी, खाने के लिए अनुपयुक्त खराब अनाज, कसावा, यीस्ट और फर्मेंटेशन के लिए जरूरी अन्य केमिकल का इस्तेमाल किया जाएगा.
साथ ही कहा गया है कि पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से ही इथेनॉल का उत्पादन करना होगा. अंतिम उत्पाद केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को ही बेचना होगा. सरकार की एक सिफारिश समिति हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले इथेनॉल की कीमतें तय करेगी. जब तक नई कीमत तय नहीं हो जाती, तब तक पिछले साल की कीमत ही लागू रहेगी. बदली हुई कीमत हर साल जुलाई के मध्य से लागू होगी.
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