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तिब्बत-नेपाल की सीमा पर बसे कस्टम ऑफिस का इलाका अब कैसा दिखता है? NDTV ने हेलीकॉप्टर से क्या देखा

हेलीकॉप्टर से एरियल व्यू के जरिए हमने देखा, जैसे यहां पहले कभी कुछ बसा ही नहीं था. जिस जगह कस्टम ऑफिस था, वह जगह अब किसी बंजर और सपाट लगता है.

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नेपाल और तिब्बत की सीमा के चीनी हिस्से में स्थित ग्यिरोंग की इमारतों 26 अगस्त की बाढ़ में किसी सुनामी की तरह बहा गई. ये तबाही कैमरे में कैद हो गई. फिर दुनिया ने देखा कैसे सैलाब ने पानी, कीचड़, चट्टानें, बर्फ सबकुछ बहा ले गया. 

इसके बाद नेपाल-तिब्बत सीमा पर बने कस्टम ऑफिस के पास क्या हुआ? वो सैकड़ों लोग कहां गए? दर्जनों गाड़ियां कहां गईं? इसका अब तक किसी को अनुमान नहीं था. 

लेकिन NDTV ने इस पूरे इलाके की रेकी कर ये देखा है कि नेपाल को कितना नुकसान भुगतना पड़ा है. हमारी टीम ने तिब्बत-नेपाल सीमा से सटे उस इलाके का दौरा किया जहां 26 अगस्त को कस्टम ऑफिस मलबे में बह गया था. 

हेलीकॉप्टर से एरियल व्यू के जरिए हमने देखा, जैसे यहां पहले कभी कुछ बसा ही नहीं था. जिस जगह कस्टम ऑफिस था, वह जगह अब किसी बंजर और सपाट लगता है. कोई नहीं जानता है कि वो सैकड़ों लोग जो तबाही से पहले वीडियो में दिख रहे थे वो कहां गए. लेकिन अब वहां का मंजर का काफी डरावना है. 

मलबा ही मलबा... तबाही ही तबाही

NDTV की टीम जिस हेलीकॉप्टर से सर्वे कर रही थी, वह काफी ऊंचाई पर था, लेकिन तबाही का दायरा और खौफ इतना भयावह था कि इतनी ऊंचाई से भी नीचे बिखरा विनाश साफ-साफ नजर आ रहा था. पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा ढहकर नदी के बहाव में मिल चुका है, जिससे नेपाल की ओर की बस्तियों और संपर्क मार्गों को भी भारी नुकसान पहुंचा है.

इस आपदा ने नेपाल-चीन व्यापारिक मार्ग को पूरी तरह से ठप्प कर दिया है और अब भी इलाके में रेस्क्यू का काम मुश्किलों भरा है. यहां हालात कब नॉर्मल होंगे इसका कोई पता नहीं है. 

सीनियर रिपोर्टर विष्णु सोम के शब्दों में पढ़िए उन्होंने क्या देखा? 

 विष्णु सोम कहते हैं कि हमें बताया कि अब हम नदी घाटी के आखिरी हिस्से के करीब पहुंच रहे हैं और हमें दक्षिण की तरफ लौटना होगा, क्योंकि रसुवागढ़ी में चीन की सीमा अब आगे ही थी. सीमा से कुछ पहले हमने हेलिकॉप्टर से एक-दो चक्कर लगाए. इस दौरान मुझे इस महत्वपूर्ण सीमा चौकी पर बाढ़ से हुई तबाही को कैमरे में कैद करने का मौका मिला.

जो जगह कभी एक व्यस्त और फलता-फूलता बॉर्डर क्रॉसिंग थी, वहां अब बाढ़ की विनाशकारी ताकत के निशान दिखाई दे रहे थे. हेलिकॉप्टर का ईंधन लगातार कम हो रहा था, यानी काठमांडू लौटने का समय आ गया था.

कर्नल बस्नेत को यह भी सुनिश्चित करना था कि हमारे पास पर्याप्त ईंधन बचा रहे, ताकि रास्ते में मौसम खराब होने पर हेलिकॉप्टर को कुछ देर हवा में रोकना पड़े या रास्ता बदलकर उड़ान भरनी पड़े तो कोई समस्या न हो.

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