- नेपाल की त्रिशूली नदी में भयंकर बाढ़ ने हजारों परिवारों को विस्थापित कर दिया है
- राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं, लेकिन उफनती नदी की तेज धाराओं के कारण अभियान बहुत चुनौतीपूर्ण है
- स्निफर डॉग्स की मदद से नदी किनारे बहते शवों की पहचान और तलाश की जा रही है ताकि शिनाख्त की जा सके
नेपाल में आई भयंकर बाढ़ ने हजारों परिवारों को उजाड़ दिया है. पानी और मलबे के सैलाब के सामने जो आया, वो बह गया. नेपाल की तबाही की तस्वीरें आपने जमीन से देखी हैं. NDTV ने इस त्रासदी का एरियल व्यू भी दिखाया. अब NDTV ग्राउंड जीरो से त्रिशूली नदी के बीच चल रहे राहत और बचाव कार्य को दिखा रहा है. इस रेस्क्यू में मौसम की चुनौतियां भी हैं, जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं.
त्रिशूली नदी में शवों की तलाश के लिए चल रही नावें
नेपाल की त्रिशूली नदी में अब शवों की तलाश के लिए नाव चलाई जा रही है, ताकि देखा जा सके कि कोई और शव बहकर तो नहीं आया है. नेपाल की जितनी भी फोर्सेज यहां हैं, वे लगातार समय के खिलाफ और पानी के बहाव के खिलाफ काम कर रही हैं.
उफनती नदी के सामने मुश्किल हो रहा रेस्क्यू
यह इसलिए मुश्किल है क्योंकि किसी को नहीं पता कि यह नदी कितने तेज उफान या कितनी तेज लहर लेकर आएगी. मुश्किल इसलिए भी है क्योंकि बेहतरीन से बेहतरीन प्रशिक्षित फोर्स को भी यह समझ में नहीं आ रहा कि आखिर पानी किस तरफ अपनी लहर बनाएगा.
स्निफर डॉग्स की मदद से चल रही तलाश
यहां स्निफर डॉग्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, यह पहचान करने के लिए कि कहीं कोई शव है या नहीं. नदी अपने साथ ट्रक से लेकर गाड़ी तक, जो कुछ भी रास्ते में आया, सब बहा ले गई. लगातार नाव चलाकर तलाश करना बेहद मुश्किल है और किस तरह आपसी सामंजस्य के साथ यह काम किया जा रहा है. दिन-रात यह अभियान जारी है. ये चुनौतियां बहुत मुश्किल हैं.
युद्धस्तर पर चल रहा राहत और बचाव कार्य
त्रिशूली नदी को देखकर ऐसा नहीं लगता कि अगले कुछ दिनों में भी वह अपना वेग, अपना प्रवाह या अपनी तासीर बदलने को तैयार है. फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं, क्योंकि यह ऐसा संकट है जिसके लिए नेपाल क्या, कोई भी तैयार नहीं था.
नदी किनारे पहुंच रहे शव, पहचान में हो रही दिक्कत
नदी के किनारे अलग-अलग इलाकों से शव आ रहे हैं. इनकी शिनाख्त स्निफर डॉग्स के जरिए कराई जा रही है. ये स्निफर डॉग्स लगातार पूरे इलाके में गश्त लगाते हैं और जहां संभव हो, वहां संकेत देते हैं कि यहां कोई शव फंसा हो सकता है. सुबह से लेकर शाम तक यह प्रक्रिया कई बार दोहराई जाती है, क्योंकि त्रिशूली नदी अलग-अलग समय पर अपना प्रवाह बढ़ाती है और कई बार यहां शव छोड़ जाती है.
चितवन से नीचे तक नदी के किनारों पर तलाश जारी
चितवन के इलाके में भी कुछ शव बहकर आए हैं. चितवन से लेकर नीचे तक, जहां तक यह नदी जाती है, भले ही इसका नाम बदलता जाता हो, लेकिन इस बार इसने अपने प्रवाह और प्रलयकारी स्वरूप से एक अलग पहचान बना दी है.
50 किलोमीटर के दायरे से मिल चुके 350 से ज्यादा शव
इन स्निफर डॉग्स के सहारे ही शवों की पहचान हो पा रही है. मुश्किलें कई गुना ज्यादा हैं. कई जगह बारिश होने की वजह से जलस्तर बढ़ जाता है और फिर शव यहां आकर रुक जाते हैं. करीब 50 किलोमीटर के दायरे में साढ़े तीन सौ से ज्यादा शव निकाले जा चुके हैं और यह कार्य अभी भी लगातार जारी है.
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